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अपना कैरियर त्यागने के लिए मेरी आलोचना की गई लेकिन मेरे पति ने मेरा साथ दिया

जब हर कोई घर के बाहर उसके कैरियर ना होने के कारण उसकी आलोचना करना चाहता है, उसका पति सुनिश्चित करता है कि वह शांत चित्त रहे
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यह अजीब है कि किस प्रकार हर वह व्यक्ति जिससे आप मिलते हैं, आपकी व्यावसायिक स्थिति के बारे में एक राय रखता है। जब मैंने विवाह के बाद काम नहीं करने का निर्णय लिया, मैं जानती थी कि मेरा बहिष्कार तो नहीं किया जाएगा क्योंकि मैं एक महिला हूँ, लेकिन निश्चित ही मुझे हर ऐरे-गैरे नत्थू खैरे की राय झेलनी पड़ेगी।

“तो तुमने क्या पढ़ाई की है?’’ वह हम नव-विवाहितों को बधाई देने के लिए घर आया था।

“मैं एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हूँ”, मैंने उसे बताया

“बहुत बढ़िया,’’ उसने कहा। ‘‘तुम कहां काम करती हो?’’

“मैंने काम नहीं करना चुना है।“

“क्या? क्या तुम्हें खुद पर शर्म नहीं आती?’’

नहीं। मैं शर्मिंदा नहीं थी। मैं क्रोधित थी। मैं चाहती थी कि बिजली की बोल्ट इस गंजे आदमी के सिर पर गिरे और इसे ज़िंदा जला डाले। वर्ष बीतते गए लेकिन स्थितियां बेहतर नहीं हुईं।

मेरे बेटों के जन्म के बाद भी, जहां आधे लोगों ने उनके लिए घर पर रहने के लिए मेरी सराहना की वहीं बाकी आधों ने मुझे सावधान किया कि मेरे बेटे बड़े होकर पुरूष शोवीवादी बन जाएंगे जो मानेंगे कि एक महिला का स्थान किचन में होता है।

मैं जानती थी कि वे ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि वे मुझे कभी कभार ही वहां देखते थे।

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घर पर होने का अर्थ यह नहीं था कि मैं एक घरेलू देवी हूँ। मैं नहीं हूँ। इसका अर्थ यह था कि मैं अपने बच्चों के साथ हो सकूँ जब वे पहली बार मुस्कुराएं, पहला कदम चलें और पहला शब्द कहें। इसका अर्थ था कि मैं उन्हें विद्यालय छोड़ सकूँ, उनके ग्रहकार्य में सहायता कर सकूँ और हर रात उन्हें कहानियां सुना सकूँ। इसका अर्थ था कि मैं उनकी चोटों को दूर कर दूंगी, जब उन्हें डराया जाएगा तब उनके साथ रोऊंगी और उनके सभी प्रदर्शनों में उपस्थित रहूंगी।

मुंबई में दोहरी आय के साथ जीवन अधिक सहज हो सकता है। इसलिए, प्रारंभ में मेरे चयन को स्वीकार करना मेरे पति के लिए थोडा कठिन था। जल्दी ही, उन्होंने मेरे परिपेक्ष्य को समझ लिया। वे मेरे साथ खड़े रहे और घर में एक ऐसा वातावरण बनाया जहां मैं वह कर सकूं जो मुझे सबसे अधिक पसंद है- लेखन!

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लेखन एक गुप्त प्रसन्नता बन गई। मैं किसी के सामने स्वयं को एक लेखक के रूप में वर्णित नहीं कर सकती थी। मैं अगले अपरिहार्य प्रश्नों का सामना कैसे करूंगी?

“तुमने क्या प्रकाशित किया है?’’

“तुम कितना कमा लेती हो?’’

और सबसे बुरा

“क्या हम मिलकर एक पुस्तक लिख सकते हैं? मैं तुम्हें कहानी बताऊंगा और तुम उसे लिख सकती हो।”

इसलिए, जब भी कोई मुझसे पूछता था कि तुम क्या करती हो, मैं कहती थीः ‘‘कुछ नहीं!’’

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इस समय मुझे महसूस हुआ कि एक सहयोगी पति होना कितना महत्त्वपूर्ण है। जब लोगों ने मेरे कैरियर या यूं कहें कि ‘कैरियर की कमी’ -चयन को दुत्कारा, मेरे पति मेरे साथ खड़े रहे।

उन्होंने मुझे सिखाया कि लोगों के विचारों के साथ बहस करना कितना व्यर्थ है। उन्होंने एक ‘घर पर रहने वाली माँ’ होने की श्रेष्ठता और शांति का आनंद लेने में मेरी सहायता की।

उन्होंने मुझे मेरा कार्य भेजने के लिए प्रोत्साहित किया और हर कहानी जो प्रकाशित हुई उसकी प्रशंसा की। जो करना मुझे पसंद है वह करने और उस पर गर्व करने का आत्म विश्वास और शक्ति उन्होंने मुझे दी। उन्होंने हर उस छोटे से काम की सराहना की जो मैंने खुद किया। चाहे वह बच्चों को चिकित्सक के पास ले जाना हो या घर ढूंढने के लिए रीयल एस्टेट ब्रोकर के साथ घूमना हो, जो ऐसी भाषा बोलते हैं जिन्हें मैं नहीं समझती।

हाँ, एकल आय और रीयल एस्टेट की बढ़ती कीमतों के बावजूद, हम अपना घर खरीदने के लिए पर्याप्त रूप से बचत करने में सफल हुए।

घर के उद्घाटन समारोह के बाद, एक बुज़ुर्ग महिला-हमारी पड़ोसी- हमें मिलने आई। जैसे ही उन्हें पता चला कि मैं एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हूँ, पुछताछ शुरू हो गईः

“तुम कहां काम करती हो?’”

“घर पर” मैंने कहा

“खुद का कार्य?’’

“मातृत्व का कार्य मुझे पूरे दिन व्यस्त रखता है…’’

“क्या? तुम काम नहीं करती हो? यह शर्मनाक है!’’

मैं एक तीन वर्षीय बच्चे और पेट में एक छह महीने के गर्भ के साथ खड़ी थी। ‘‘बच्चों की देखभाल कौन करेगा आंटी?’’ मैंने पूछा।

उन्होंने कहा ‘‘बच्चे खुद बड़े हो जाते हैं”। वह दो बच्चों की माँ थी और अपने जीवन में एक दिन भी कार्य नहीं किया था, फिर भी उनकी एक राय थी। शुक्र है कि मेरे पति ने मुझे उनसे दूर खड़ा कर दिया और मेरे मुंह से ऐसे शब्द नहीं निकले जिनके लिए मुझे बाद में पछतावा होता।

कल, मैं उनसे फिर मिली। इन पांच वर्षों ने उन्हें बदल दिया है।

उन्होंने मुझे आवाज़ दी ‘‘अर्चना, तुम कैसी हो?’’। उनके नाजु़क कंधे पर एक विद्यालय का बस्ता टंगा हुआ था, उनका पोता उनकी कमर पर था और वह उसे केला खिलाने की कोशिश कर रही थी, जिसे वह बिल्कुल खाना नहीं चाहता था।

“मैं ठीक हूँ आंटी। आप कैसी हैं?’’

“हालत बहुत खराब है। मेरे बेटा और बहु इसके जागने से भी पहले चले जाते हैं। मुझे इसे जगाना पड़ता है, इसे नहलाना पड़ता है, इसके दांत ब्रश करना पड़ते हैं, इसे खाना खिलाना पड़ता है और विद्यालय ले जाना पड़ता है। मैं उसे कहती रहती हूँ कि नौकरी छोड़ दे लेकिन वह सुनती ही नहीं है।’

मैंने कुछ नहीं कहा। मैंने हस्तक्षेप नहीं किया। मैंने मेरी राय अपने तक ही सीमित रखी।

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विवाह के बाद एक महिला के काम करने अथवा ना करने के उसके निर्णय की आलोचना क्यों करें?

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मेरा पति स्वयं को बहुत लिबरेटेड दर्शाता था लेकिन उसने मेरे जीवन के हर पहलू को नियंत्रित करने की कोशिश की

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