उसे आघात पहुंचा था और वह सेक्स से डरता था, लेकिन उसने ठीक होने में उसकी सहायता की

Joyeeta Talukdar
Stressed-Man

हमारा विवाह 6 वर्षों पहले हुआ, लेकिन मेरा उसके साथ कोई शारीरिक संबंध नहीं है।

एक रूढ़िवादी राजस्थानी परिवार से होने के कारण सही समय पर विवाहित हो जाना महत्त्वपूर्ण है, अत्यधिक पारिवारिक दबाव में मैंने अवनी से विवाह कर लिया। वह मुझे चाहती थी और मैं भी उसे चाहता था। लेकिन जब भी मैं उसके पास जाता था, पुरानी यादें मुझे मानसिक यातना देता थीं और मेरा मन अपराधबोध से भर जाता था।

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अवनी शुरूआत में झिझकी, लेकिन समय बीतने के साथ भी जब मैं सकुचाता रहा, उसने प्रश्न पूछना शुरू कर दिया जिनका मैं उत्तर नहीं दे सकता था।

“क्या तुमने परिवार के दबाव में आकर मुझसे विवाह किया? क्या तुम नपुंसक या समलैंगिक हो?’’

लेकिन हर बार मैं उसे निराश, भ्रमित और भावनात्मक रूप से टूट हुआ छोड़ कर चुप रहता था और दूर चला जाता था।

हालांकि, एक दिन उसका धैर्य समाप्त हो गया। वह अपनी आखों में विश्वासघात लिए मेरे सामने खड़ी थी। मैं दिन भर का कार्य समाप्त कर बस घर लौटा ही था और थका हुआ था लेकिन वह वहां स्थिर खड़ी हुई थी। उसने मेरे हाथ पकड़ लिए और उन्हें दबाया, मैंने हाथ खींचे लेकिन उसने छोड़ा नहीं।

अवनी ने मेरा हाथ अपनी कमर पर रख दिया। मैं काँप गया और उसे दूर कर दिया, ‘‘तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है क्या?’’

“हाँ, मेरा दिमाग खराब हो गया है। क्या मेरे पास और कोई चारा है? तुमने हमारे विवाह से लेकर आज तक मुझे छुआ तक नहीं है लेकिन हर दूसरी तरह से मेरा इतना खयाल रखते हो। हमारे विवाह को दो वर्ष हो चुके हैं और अब हमारे परिवार वालों ने प्रश्न पूछना शुरू कर दिए हैं जैसे कि, ‘‘हमें खुशखबरी कब सुना रहे हो?’’

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अवनी ने एक गहरी सांस ली और कहा, ‘‘मेरे पास उत्तर नहीं है, क्या तुम्हारे पास है?’’ मैं उससे नज़रें नहीं मिला सका, उसकी आँखे सवालों से भरी हुई थीं।

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फिर मैंने धीरे से कहा, ‘‘मैं जानता हूँ कि मैं ठीक नहीं कर रहा हूँ और अगर तुम चाहो तो मुझे छोड़कर जा सकती हो। तलाक के लिए अर्जी दे दो। सारा दोष मुझ पर डाल दो। मैं वादा करता हूँ कि विरोध नहीं करूंगा। मेरे लिए अपना जीवन बर्बाद मत करो।”

“नहीं मैं तुम्हें छोड़ कर नहीं जाऊंगी। मैं तुम्हें जानना चाहती हूँ। क्या हम एक दूसरे को जानना शुरू कर सकते हैं? क्या हम मित्र बन सकते हैं?’’

उस घटना के 10 वर्षों बाद उसके शब्दों ने मेरे आसपास के कवच को तोड़ा और मैंने इस बारे में कहा।

एक महानगर में इंजीनियर के रूप में प्रशीक्षण का मेरा पहला दिन था और रात के 10 बजे थे।

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मैं उस घर में चला गया जहां मैं चार अन्य लड़कों के साथ एक किराएदार के रूप में रह रहा था। आज मैंने उन्हें पहली बार देखा था। उन्होंने गर्मजोशी से मेरा स्वागत किया और मुझे ड्रिंक्स दिए। हालांकि उनके अत्यधिक मित्रवत व्यवहार के पीछे कुछ बहुत बुरा प्रतीत हो रहा था। उनमें से एक ने धीरे से दरवाजा बंद कर दिया।

वे मेरे साथ सहज होने लगे और कुछ ड्रिंक्स के बाद मुझे धमकाने लगे। उन्होंने मेरा वॉलेट छीन लिया लेकिन दुर्भाग्य से उसमें केवल 200 रूपये थे।

“माफ करना, आज मेरे प्रशिक्षण का पहला दिन है और मेरे पास इससे अधिक पैसे नहीं हैं,’’मैंने अनुरोध किया।

इससे वे क्रोधित हो गए।

एक ने कहा, ‘‘इसके पास हमें देने के लिए कुछ नहीं है लेकिन हमारे पास इससे लेने के लिए बहुत कुछ है।”

उन्होंने मुझे मारना शुरू कर दिया। मैंने खुद को बचाने की कोशिश की लेकिन फिर मैंने हार मान ली। और फिर मुझे अहसास हुआ कि वे उसके बाद क्या करना चाहते थे। उन्होंने मेरा यौन शोषण शुरू कर दिया। कोई मेरी मदद के लिए आगे नहीं आया। मैंने चिल्लाने की कोशिश की लेकिन उनमें से एक ने मेरा ही शर्ट मेरे मुंह में ठूंस दिया और मेरी गर्दन के पास चाकू लिए हुए खड़ा था।

उन्होंने मुझे मेरे बिस्तर पर असहाय छोड़ दिया जहां मैं सुबह तक पड़ा रहा। सुबह होने पर मैंने जैसे तैसे हिम्मत इक्ट्ठी की और बाथरूम तक गया, शावर के नीचे खड़ा रहा और रोने लगा, इतना डरा हुआ था कि चिल्ला ना सका। मैं भयभीत और शर्मिंदा था।

मैं नींद के बगैर बेचैन, कमरे में रूका रहा। वे लड़के वापस आए और मुझे फिर से डराया, मेरा शोषण किया। मैं पुलिस के पास जाना चाहता था लेकिन मेरे परिवार की प्रतिष्ठा के बारे में सोचा। इसलिए मैंने भाग जाने का और इस राज़ को अपने दिल की गहराईयों में दफन करने का निर्णय लिया। हालांकि उस घटना के अदृश्य घाव मेरे सबसे भयानक दुःस्वप्न बन गए।

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मेरे घुटने लड़खड़ा रहे थे और मैं गिरने ही वाला था जब अवनी ने मुझे बैठने के लिए सहारा दिया। मैं रोया और उसने कस कर मुझे गले लगाया। लेकिन कहीं ना कहीं मुझे हल्का महसूस हुआ जैसे कि मेरी आत्मा से एक बड़ा भारी बोझ उतर गया हो।

कुछ दिनों के भीतर मैं उसके साथ सब कुछ साझा कर पा रहा थाः मेरे डर, मेरे तनाव का कारण, सेक्स से दूर भागने की वजह, और केवल वह ही थी जिसने मेरे आँसू देखे थे। वह पूरे समय मेरे साथ रही। वह मुझे परामर्शदाता के पास ले गई और मेरे डर से लड़ने में मेरी मदद की।
मुझे परामर्श लेने में चार वर्ष लग गए। और आज से मेरा नया जीवन शुरू होता है।

(जैसा कि जोयिता तालुकदार को बताया गया)

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