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क्यों मैंने अपनी शादी को “खुशहाल” दिखाया

हमारे समाज में लाखों औरतें, अपनी शादीशुदा ज़िन्दगी में चुपचाप शारीरिक और मानसिक शोषण सहती जाती हैं. ये आपबीती है ऐसी ही एक महिला की जिसने इससे निकलने की राह ढूंढी.
Man-Hitting-Woman

हाल ही में मैंने एक पूरी रात यूट्यूब पर पोस्ट किये उन वीडियोस को देख कर बितायी जिसमे कई विवाहित औरतें अपनी शादीशुदा ज़िन्दगी के काले भयावह पन्नें पलट रही थी. यह वीडियो उन औरतों के थे जो या तो घरेलु हिंसा की शिकार रह चुकी हैं या फिर अब भी उस हिंसा से जूझ रहीं हैं.

सच कहूँ तो मुझे भी नहीं पता की मैं उन औरतों की कहानिया क्यों इतनी तन्मयता से सुन रही हूँ? क्यों मैंने घंटो अपनी नज़रे अपने लैपटॉप से नहीं हटाई? मगर हाँ, मुझे यह पता हैं की उस लम्हे में उनकी सिसकियों मैं बनी बातों से ज़्यादा ज़रूरी कुछ नहीं लग रहा था.

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हर एक आपबीती की एक अलग शुरुवात थी, एक अलग दर्द था. यहाँ तक की हर कहानी में महिला के साथ हुए गए दुर्व्यवहार की सीमा भी अलग थी और होने वाली क्षति भी अलग. मगर हर महिला का दर्द एक था और इंटरव्यू के अंत में हर एक से साक्षारकारकर्ता एक ही सवाल पूछती थी, “आपने कुछ कहा क्यों नहीं? क्यों सब कुछ सहती चली गयीं? क्यों नहीं आवाज़ उठाई?”

हाँ, अधिकांश महिलाओं ने अपने साथ हो रहे दुर्व्यवहार का ज़िक्र भी किसी से नहीं किया. चुपचाप बस सहती रहीं.

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