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जब मेरा विवाह एक समलैंगिक पुरूष से हुआ

वह उसके लिए एक आदर्श व्यक्ति प्रतीत होता था, लेकिन एक वर्ष बीतने के बाद भी विवाह असहवासित था
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2003 की वह शरद श्रतु लगभग आदर्श प्रतीत हो रही थी। मेरी आयु 20 के दशक के उत्तरार्ध की थी, मेरा व्यावसायिक जीवन सफल था और अब मैं वैवाहिक जीवन में प्रवेश करने के लिए उत्साहित थी।

एक पारिवारिक मित्र ने हमारा परिचय करवाया। नबील कॉफी और बातें बहुत अच्छी बनाता था, एक प्रचलित रेस्त्रां श्रृंखला का स्वामी था, विश्व के पकवानों का अन्वेषण करने में रूचि रखता था, पढ़ने में आनंद प्राप्त करता था, ‘फ्रेंड्स’ धारावाहिक की हर कड़ी देखता था। मैंने ब्रायन एड्म्स का उल्लेख किया और उसने कहा ‘समर ऑफ 69’। विभिन्न महाद्वीपों की यात्रा उसकी आकांक्षाओं की सूची में पहले स्थान पर थी। मेरे दिल ने कहा उत्तम!

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मैं एक काफी सीमा तक आधुनिक मुस्लिम परिवार से थी और सौभाग्य से नबील का दृष्टिकोण अदूरदर्शी था। हमने जल्दी ही विवाह की योजना बनाना शुरू कर दिया। जीवन में उसकी श्रेष्ठ पसंद उसकी खरीदारी में दिखाई देती थी। मैं निश्चित ही शिकायत नहीं कर रही थी। निकाह और रिसेप्शन में गुणवत्ता और नबील की व्यक्तिगत पसंद की एक झलक थी।

विवाह की रात, हालांकि, पारंपरिक दांपत्य जीवन की शुरूआत नहीं हुई। मैंने सोचा ‘‘एक पुरूष ऐसा है जिसे जल्दी नहीं है, शायद वह बिस्तर में मिलन होने से पहले हमारे मध्य एक अच्छा बंधन बनाने का इरादा रखता हो”।

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दिन सप्ताह में बदल गए। यूरोपीय हनीमून के वादे भी धुंधले हो गए। उसने कारण बतायाः ‘‘एक रेस्त्रां में मजदूर संघ की समस्याएं” हमारे विवाह को कुछ महीने हो चुके थे और अब तक हम एक दूसरे के साथ सहज हो गए थे, जबकि बिस्तर पर, एक तकिया हमेशा हमारे बीच रहता था। पता नहीं क्यों…

इसी दौरान, वह घर पर पार्टियों का आयोजन करता था, जिसमें वह आदर्श मेज़बान की भूमिका निभाता था और मैं वह सुंदर पत्नी होती थी जिसे वह शान से दिखाता था। वह उदासीनता से कहा करता था कि ये पार्टियां उसके तनाव को दूर करने का साधन थीं।

हम हमारी पहली वर्षगांठ से कुछ ही महीने दूर थे। मुझे याद नहीं कि मैं मेहमान कक्ष की अलमारी में क्या ढूंढ रही थी, कुछ समलैंगिक पत्रिकाएं और कंडोम का एक पैकेट बाहर निकल आया। उस दिन शाम को, मैंने सहजता से पूछा और उसने उत्तर दिया कि एक मित्र वह भूल से छोड़ गया था।

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एक नौकरानी ने कहा, ‘‘आपको साहब को प्यार जताने की आवश्यकता है। उनकी मालिश करो। क्योंकि उन्होंने आपसे विवाह किया, उनका पसंदीदा मालिश करने वाला अब नहीं आता।” एक पड़ोसी ने असहज प्रश्न किए। खोया हुआ महसूस करते हुए, मैंने उसकी बहन से संपर्क किया और उत्तर में उन्होंने मुझे ऐसी दृष्टि से देखा जिसे मैं कभी भूल नहीं सकूंगी। आखिरकार, ‘‘अच्छी लड़कियां सेक्स के बारे में इतनी खुल कर चर्चा नहीं करतीं।”

जल्दी ही उसके मैनेजर के साथ घनिष्ट संबंधों के बारे में कानाफूसी सुनाई देने लगी। मेरे पारिवारिक शोफर (चालक) ने संकेत दिए कि उसने उसके दामाद जी के विषय में कुछ बातें सुनी हैं जो इतनी अच्छी नहीं हैं। मैंने हो-हल्ले को अनदेखा कर दिया और एक बेहतर भविष्य की आशा की, जिसके आने के कोई संकेत दिखाई नहीं दिए।

घटनाओं की एक श्रृंखला ने आशंका उत्पन्न की। उदाहरण के लिए, मैं अपना वॉलेट लेने के लिए घर जल्दी आ गई जिसे ले जाना मैं भूल गई थी, मुझे वहां मेरा पति और उसका मेनेजर रौनक मिले। उसने तुरंत सफाई दी। ‘‘हम परेशानियों से निपटने के लिए रणनीतियों पर चर्चा कर रहे हैं।” मैं इतनी दंग थी कि प्रतिक्रिया भी नहीं दे पाई।

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एक वर्ष गुज़र गया, और मैं उसकी कुंवारी पत्नी बनी रही। मेरे मित्र ने मुझसे आग्रह किया कि मैं अपने पति का सामना करूं और यदि स्थितियां ना बदलें, तो संबंध समाप्त कर दूँ। मैंने निश्चिय किया कि मैं अपनी माँ को यह बात बताऊं। जब मैंने उन्हें बताया कि हमारा विवाह असहवासित है, तो उनके चेहरे पर पीड़ा और अविश्वास के भाव साफ ज़ाहिर हो रहे थे। लेकिन उन्होंने मुझसे आग्रह किया कि मैं और थोड़ा समय दूँ। मैं उन्हें ना नहीं कह सकी।

प्रत्येक बार जब ‘‘सेक्स” शब्द का उल्लेख होता था, वह क्रोधित हो जाया करता था। दूसरी तरफ, वह सुनिश्चित करता था कि मुझे डायमंड सेट और डिज़ाइनर कपड़ों की कमी ना रहे।

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जून 2005 की एक रात को, मैं लगातार एक उत्तर की मांग कर रही थी। एकाएक उसे कुछ हुआ और उसने कॉफी टेबल पर लात मारी, जिससे उसका शीर्ष टूट गया। उसने मौखिक हमला किया, ‘‘वेश्या, सेक्स के लिए मरने वाली, घटिया उग्र औरत, बदसूरत…’’ आदि और अंत में सच सामने आया, ‘‘हाँ, मैं समलैंगिक हूँ। मैं तुम्हारे साथ कुछ नहीं करना चाहता हूँ।” डेढ़ साल की पहेली के बाद, सच मेरे सामने था।

हद से ज़्यादा रोते हुए, मैंने मेरी माँ को फोन किया। मैं इस ढोंग को समाप्त कर अपने घर जाना चाहती थी।

उन्होंने कोई सांत्वना नहीं दी। ‘‘आवेगी मत बनो। वह केवल गुस्से में है। एक शादी को निभाने के लिए बहुत कुछ करना पड़ता है। तुम्हारे पिता जीवित नहीं हैं, तुम्हारे भाई का खुद का परिवार है। बात अब पहले जैसी नहीं है।” ‘‘लेकिन माँ वह समलैंगिक है” मैं सुबकते हुए चिल्लाई।

नबील ने मेरे प्रति उसका क्रोध या घृणा छुपाई नहीं। एक दिन गुज़र गया। काश की मेरी माँ ने मेरा साथ दिया होता। इस अहसास ने मुझे अपमानित और निराश कर दिया की मैं उन दोनो स्थानों पर अवांछित थी जिन्हें मैं घर समझती थी।

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मैंने उन्हें गिना नहीं, लेकिन मुझे लगा कि वे मुझे हमेशा के लिए सुलाने के लिए पर्याप्त हैं। मैंने तत्काल नींद की गोलियां निगल लीं। मैंने विवाह नहीं तोड़ा। मुझे उस घर में अपने अंतिम क्षण भी याद नहीं।

मुझे याद है कि मुझे अस्पताल के आईसीयू वार्ड में होश आया। एक पुलिस अफसर मेरा बयान दर्ज करने आया।

“क्या उसने शारीरिक रूप से आपका शोषण किया? यदि आप इसकी पुष्टि कर दें, हम उसे गिरफ्तार कर लेंगे।” मैंने केवल सच कहा ‘‘नहीं उसने मुझे कभी नहीं छुआ।”

तलाक आपसी सहमती से था।

ग्यारह वर्ष पहले मैं अपने पुराने घर मैं लौट आई। समय के साथ मैंने फिर अपने व्यावसायिक आधार को प्राप्त कर लिया। जब मैं पीछे मुड़ कर देखती हूँ, मुझे लगता है कि निराशा के सामने आत्म समर्पण करतु हुए मैं कितनी गलत थी। एक बुरे विवाह के अलावा भी जीवन में बहुत कुछ है।

(जैसा कि शगुफ्ता कलीम को बताया गया)

जब आपका जीवनसाथी आपका परम मित्र ना हो

वह अचानक से बदल गया है और कहता है कि चला जाएगा

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