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पति और ससुरालपक्ष मेरा और मेरे पिता का आर्थिक उत्पीड़न कर रहे हैं. क्या बिना कानूनी हस्तक्षेप के मैं यह समस्या का समाधान ढूंढ सकती हूँ?

पति "केयरिंग" हैं मगर अपने परिवारवालों के कहने पर घर में किसी तरह की आर्थिक मदद नहीं करता. पत्नी दुखी है, मगर पति के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं लेना चाहती.
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मैं एक २१ वर्षीया विवाहित स्त्री हूँ. छह महीने पहले मेरे माँ बाप ने मेरी शादी एक २९ वर्षीया पशु चिकित्सक से करवाई थी. हमारे दाम्पत्य जीवन में सबसे बड़ी फास मेरी सास और नन्द हैं, जो मेरे पति की नज़रो में सर्वोपरि हैं. शादी के बाद से अब तक मैं अपने पिता जी के पैसों पर ही रहती हूँ क्योंकि मेरे पति, अपनी माँ और बहिन के कहने पर, घर खर्च की कोई ज़िम्मेदारी नहीं उठाते. मेरे पिता ने मेरी रोज़मर्रा की ज़रूरतों का भी अब तक ध्यान रखा है, मगर शादी के बाद भी उनसे यूँ मदद लेना कचोटता है. मेरे पिता ने उनके सारे क़र्ज़ भी खुद ही चूका दिए हैं.

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दूसरी तरफ मेरे पति, जो आर्थिक सहायता तो करते नहीं, अपनी फरमाइशों की लिस्ट ज़रूर देते रहते हैं. जैसे उन्हें खाने में हर बार ताज़ी सब्ज़ियां ही चाहिए. जब मैं पैसों की किल्लत की बात करती हूँ तो मुझे ६० रुपया सब्ज़ी के देते है और फिर उसका हिसाब भी लेते हैं. हार कर मैंने उनसे पैसे लेना भी छोड़ दिया है.

मैं यह भी कहना चाहूंगी की मेरे पति यूं एक अच्छे इंसान है और मेरा ध्यान भी रखते हैं, मगर आर्थिक ज़रूरतों में हाथ खींच लेते हैं.

मेरे पति सांभर में कम नमक जैसी छोटी सी बात भी अपने परिवार को सूचित करते हैं.

एक दिन जब सब असहनीय लगने लगा तो मैंने अपनी सास और नन्द से बात की जो एक बड़ी लड़ाई में बदल गई. उन दोनों ने मेरे मुँह पर दरवाज़ा बंद करते हुए कहा की अब वह मेरी शक्ल भी नहीं देखना चाहते. मैं अपने पति से अलग नहीं होना चाहती. इस बात को २६ दिन हो गए हैं.मेरा बैंगलोर का घर उन्होंने बंद कर दिया है और मेरे पति अब मेरी ननदऔर उसके पति के साथ रह रहे हैं.

कई बार मैंने उन्हें फ़ोन करने की कोशिश भी की मगर मेरे पति मुझसे बात ही नहीं कर रहे हैं. मैं कोई कानूनी हस्तक्षेप नहीं चाहती क्योंकि ऐसा करने से मेरे पति और उनका परिवार दहेज़ के जुर्म मैं कैद हो सकते हैं. क्योंकि वह एक सरकारी कर्मचारी हैं, ऐसा केस उनकी नौकरी के लिए भी हानिकारक हो जायेगा. मैं उन्हें ऐसी मुसीबत में बिलकुल नहीं डालना चाहती. मैं बस अपने पति के साथ एक खुशहाल ज़िन्दगी जीना चाहती हूँ, कृपया मदद करें और मुझे सही राह बताएं.


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उत्तर:

आपकी आपबीती सुन बहुत दुःख हुआ मगर आपकी कहानी में विरोधाभास भी महसूस हुआ. एक तरफ आप कह रही है की आपके पति एक अच्छे इंसान हैं और आपका पूरा ध्यान भी रखते हैं, बस आर्थिक ज़िम्मेदारी नहीं उठाते. इस बात में विरोध इसलिए है

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