मैंने एक अपमानजनक विवाह को त्याग दिया लेकिन फिर भी मुझे मेरे पति की याद क्यों आती है?

by Deepak Kashyap
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नमस्ते, मेरा विवाह पिछले वर्ष 14 फरवरी को हुआ। वह माता-पिता की सहमति से हुआ विवाह (अरेंज मैरिज) था और लगभग 10 महीनों तक चला। उसमें बहुत सारा भावनात्मक शोषण था, साथ ही शारीरिक शोषण और मानसिक यातना भी शामिल थी। असल में, वह मुझे हर तरह से नियंत्रित करना चाहता था और उसे प्यार का नाम देता था। अब समस्या यह है कि मैं अब भी उसे भूल नहीं पा रही हूँ। काफी समय तक, मैं उसे छोड़ने के लिए खुद को दोषी मानती रही। मैं वह अच्छा समय याद करती रहती हूँ जो हमने बिताया। मैं दिसम्बर से आपने माता-पिता के घर पर वापस आ गई हूँ और अब अपने जीवन के साथ आगे नहीं बढ़ पा रही हूँ। साथ ही, क्योंकि यह मेरा पहला संबंध था, मेरा कभी भी कोई अनौपचारिक संबंध या प्रेम प्रसंग नहीं रहा, इसलिए मैंने इस रिश्ते के लिए सब कुछ किया। मैं अपना विवाह बचाने की कोशिश कर रही थी लेकिन अंततः उससे दूर हो गई। उसका नाम भी दीपक है। अब, लगता नहीं है कि मैं भविष्य के प्रति सकारात्मक हो सकती हूँ या फिर ऐसा कह सकते हैं कि मुझे पुरूषों से ही घृणा हो गई है। इसके अलावा मुझे यह बताने में बहुत बुरा लग रहा है कि मैं परिवार के प्रति कुछ हद तक भावशून्य हो गई हूँ जो कि मैं नहीं करना चाहती। मैं जीवन के प्रति अपना नज़रिया किस प्रकार बदल सकती हूँ?

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उत्तरः आपको स्वयं को थोड़ा समय देने की आवश्यकता है। यह मानते हुए कि किसी भी लंबी अवधि के संबंध में यह आपका पहला अनुभव था, यह स्वाभाविक है कि आप पर इसका काफी असर रहेगा। दुःखी महसूस करना और छोड़कर जाने के आपके निर्णय पर दुबारा विचार करना सामान्य है। हम हमारे निर्णयों के बारे में बार-बार पुनर्विचार करते हैं खास तौर पर तब जब [restrict]उनका हमारे जीवन पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ने वाला हो, चाहे यह हमारी पूंजी के एक बड़ा हिस्से को किसी बांड में निवेश करने, कैरियर में कोई अगला कदम उठाने, किसी से विवाह करने के बारे में हो या फिर तलाक लेने के बारे में।

जब हम एक मतभेद से हट जाते हैं, तो उस पर दृष्टिकोण रखना आसान होता है बजाए उस समय के जब हम उसमें फंसे हुए होते हैं। हालांकि, किसी को याद करने के अनवांछित परिणामों के बारे में हमें पता होना चाहिए जो बीते हुए कल की वास्तविक समस्याओं को हल्का कर रहे हैं और उन वस्तुओं को क्षमा कर रहे हैं जिन्हें क्षमा अथवा प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए। हम यह सब अवचेतन मन द्वारा हमारे जीवन की एक सकारात्मक ऐतीहासिक पृष्टभूमि प्राप्त करने के लिए करते हैं। यह एक संपूर्ण सकारात्मक पहचान पैटर्न बनाने में हमारी सहायता करता है।

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उदाहरण के लिए, मेरे अनुसार किसी भी परिस्थिति में, एक समस्या को सुलझाने या बीच-बचाव के लिए शारीरिक बल का उपयोग अस्वीकार्य है, चाहे साथियों के बीच कितना भी प्रेम महसूस किया जाए या जताया जाए। मैं यह नहीं कह रहा कि आप अपने पति को उससे अधिक बुरा समझें जितना वह वास्तव में था, मैं यह कह रहा हूँ कि अलग होने के दर्द को अपनाइये और उस वास्तविक कारण को ध्यान में रखिए जिसकी वजह से आपने विवाह तोड़ा था। भले ही यह टुकड़ों में बहुत अच्छा रहा हो, लेकिन इसने दो स्वतंत्र व्यक्तियों के बीच समझौते की बुनियादी मनाही का उल्लंघन किया है।

आपको सबसे महत्त्वपूर्ण रूप से स्वयं को याद दिलाना होगा कि आप स्वयं में एक पूर्ण मनुष्य हैं। शायद आपको उसके बगैर अपने स्वयं की पहचान बनाने के लिए संघर्ष करना पड़े, तो कीजिए। आपको आपकी स्वयं की पहचान बनाने के लिए केवल धैर्य रखना होगा और स्वयं के प्रति स्नेही रहना होगा।

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