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मैं अपनी पत्नी से प्रेम करता हूँ क्योंकि वह भिन्न है

एक पति ऐसी महिला से विवाह करने की उसकी कहानी साझा कर रहा है जो गहने और कपड़ों पर पैसे उड़ाने की जगह प्रकृति का आनंद लेना पसंद करेगी

यदि हमारे समाज द्वारा प्रस्तावित आर्दश विवाह की धारणा के अनुसार देखें तो मेरी पत्नी कुछ हद तक विलक्षण है। यहां तक कि जिस दिन हमारा विवाह हुआ, उसने सिंदुर, मंगलसूत्र या संखा सहित विवाह की कोई भी निशानी पहनने से इनकार कर दिया। उसने विवाह से पहले मुझे कहा था कि वह कभी भी अपना सरनेम (उपनाम) नहीं बदलेगी। खैर उससे मुझे कोई समस्या नहीं थी। मैंने सोचा एक नाम में वैसे भी होता क्या है? लेकिन एक बड़े परिवार में चाचा-चाची और माता-पिता के साथ रहने और तीन भाई बहनों में सबसे छोटा होने के कारण; मुझे सबको यह समझाने में बहुत कठिनाई आई कि मैं एक ऐसी लड़की से विवाह कर रहा था जो वास्तव में ‘‘भिन्न” थी।

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कई बार उसके ‘‘भिन्न” तरीके मुझे शर्मिंदा करते थे। कई लोग समझ नहीं पाते थे कि वह पारिवारिक और सामाजिक समारोहों के स्थान पर पुस्तक के विमोचन को क्यों चुनती थी। शुरूआत में, मैं कई बार गुस्सा हो जाया करता था और दूर हो जाता था। लेकिन इन वर्षों में, मैंने इस ‘‘भिन्नता” का आनंद लेना सीख लिया है।

मैं आपको बताता हूँ कि क्यों!

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