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ससुराल वालों के हस्तक्षेप पर काबू पाना

जब आपके और आपके जीवनसाथी के बीच में परिवार आ जाता है, तो जीत प्रेम की होती है
Overcoming

जब मैं आठ वर्ष पीछे मुड़कर देखती हूँ, मैं सोचती हूँ कि मेरे लिए स्थितियां किस प्रकार बदली हैं। हम कई सारे उतार चढ़ाव से गुज़रे फिर भी अपने संबंध को बनाए रखने में सफल हुए।

28 अप्रेल 2008: मेरे विवाह का दिन। मैं घबराई हुई थी, मैं प्रसन्न थी, और मेरे अर्थपूर्ण चेहरे पर इन मिश्रित भावों का प्रभाव अंकित था। हाँ, मैं एक नए जीवन की शुरूआत करने वाली थी। एक जीवन जो बहुत से अवरोधों के साथ प्रांरभ हुआ। एक ऐसी घटना जिसकी चर्चा लोगों के साथ करने में मैं कभी सहज महसूस नहीं करती हूँ।

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मेरा विवाह मेरी मौसी की ननद के बेटे से हुआ है। मेरे ससुराल वालों ने विवाह के समारोह की भोजन व्यवस्थाओं के बारे में हंगामा मचाया था और मामले को खत्म करने की जगह उसे बढ़ा दिया था। उन्होंने मेरे साथ हमेशा एक बेटी जैसा व्यवहार किया है, लेकिन उन्होंने मेरे विवाह के दिन को नष्ट कर दिया। मैं अपने पिता के चेहरे पर पीड़ा देख सकती थी लेकिन कभी नहीं समझ सकी कि भोजन इतना महत्त्वपूर्ण क्यों था। मेरे पिता एक संत जैसे व्यक्ति थे जो लोगों के बारे में कभी बुरा नहीं कहते थे और कभी परवाह नहीं करते थे कि उन्हें कैसा भोजन दिया जा रहा है। मैं इस बात से कभी नहीं उबर पाऊंगी कि विवाह वाले दिन उन्हें इस तरह के अपमान का सामना करना पड़ा। यह केवल शुरूआत थी, और मुझे कई अन्य परीक्षाओं से गुज़रना बाकी था।

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