एक हमेशा खुश रहने वाला विवाहेतर संबंध?

क्या हो, यदि आप अपने जीवनसाथी के बजाए किसी अन्य व्यक्ति के प्रेम में हों ?

Akhila Vijaykumar | Posted on 29 Mar 2017
एक हमेशा खुश रहने वाला विवाहेतर संबंध?

यह केवल एक परिकथा है जिसे सुनते और मानते हुए हम बड़े होते हैं। हम हमारे राजकुमार या राजकुमारी से मिलते हैं, प्रेम करते हैं, विवाह करते हैं और फिर हमेशा खुश रहते हैं। लेकिन क्या होता है जब ऐसा नहीं होता? क्या होता है जब क्रम बिगड़ जाता है?

सार्थक और अदिति 15 वर्ष पहले मिले। तब वे दोनों 20 वर्षीय युवा थे, हैदराबाद के एक संस्थान में व्यावसायिक कम्प्यूटर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे थे। सार्थक के मन में शुरूआत से ही अदिति के लिए स्नेह था, उसने नए शहर में बसने में, उसके लिए घर ढूंढने में, उसके लिए आसपास के गुंडो से निपटते हुए और उसका प्रयोगशाला साथी बनते हुए उसकी सहायता की। पाठ्यक्रम चार महीनों में खत्म हो गया लेकिन उनकी दोस्ती जारी रही।

सार्थक कहता है, ‘‘उस समय हमारे पास मोबाईल फोन नहीं थे। लेकिन पीसीओ बूथ और खडूस होस्टल वार्डन के होते हुए भी प्रतिदिन संपर्क में रहते थे। हमारा संबंध बहुत गहरा था और हमने कई बार विवाह करने के बारे में चर्चा की।”

लेकिन कई बाधाएं थीं- उसे (अदिति को) उसके परिवार को सहारा देने की आवश्यकता थी, उसे (सार्थक को) नौकरी नहीं मिल पा रही थी और आईटी बबल बर्स्ट के दौरान आर्थव्यवस्था खराब थी। अंत में, सार्थक को आगे की पढ़ाई और उसके विकल्पों का पता लगाने के लिए विदेश जाना पड़ा, और पीछे रह गई व्याकुल अदिति जो नहीं जानती थी कि क्या उनके संबंध का कोई भविष्य था। पारिवारिक दबाव और सार्थक के साथ घनिष्ठ संपर्क टूटने की वजह से उसने विनोद से विवाह कर लिया, जिसके माता-पिता उसके पारिवारिक मित्र थे। सार्थक भी स्तब्ध रह गया था, लेकिन उसने उसके फैसले को स्वीकार करने का और मित्र बने रहने का निर्णय लिया। जब वह वापस आया, वह विनोद से मिला और जान गया कि अदिति का निर्णय गलत था। कुछ दिनों बाद, अदिति ने उसे बता दिया कि वह सही था।

अदिति कहती है, ‘‘विनोद बुरा पति नहीं है लेकिन वह बेलगाव है। वह मानता है कि उसे अपना जीवन जीना चाहिए और मुझे अपना। हमारी समस्याएं भिन्न हैं, हमारे वित्तिय मामले भिन्न हैं और हम एक दूसरे को भावनात्मक सहारा भी नहीं देते हैं। मैं जानती हूँ कि उसने मुझसे समाज और परिवार के दबाव के कारण विवाह किया है।”

उसके लौटने के बाद, सार्थक परिवार में बिमारी से निपटने में और साथ ही अपरिहार्य के आगे झुकते हुए ललिता के साथ विवाह करने में व्यस्त था। लगभग दो वर्षों के लिए, सार्थक और अदिति नियमित संपर्क में नहीं थे। सार्थक के पिता के निधन के बाद, वे पुनः संपर्क में आ गए और उनका संबंध फिर से जीवित हो उठा, जहां अदिति सलाह और सहयोग के लिए सार्थक पर निर्भर थी जो उसे स्वयं के विवाह में नहीं मिल पा रहा था।

इसी बीच, सार्थक ने अदिति को एक कामुक स्वप्न के बारे में बताया जो उसने उसके बारे में देखा था। अगले दिन, वह लगभग अवाक रह गया था जब अदिति ने चिढ़ाते हुए पूछा कि क्या वह उस सपने को सच करना चाहता है। एक सुनसान पार्किंग स्थल पर दोनों भावनात्मक से लेकर शारीरिक सीमा तक एक हो गए- और यह अब तक समाप्त नहीं हुआ है। एक दूसरे के साथ समय बिताने के तरीके और जगह ढूंढते हुए और प्यार के सार्वजनिक प्रदर्शन में लिप्त होते हुए, वे हर सप्ताह मिलते हैं।

दोनों दम्पति मित्रवत हैं और यहां तक कि वे चारों हर थोड़े दिनों में मिलते हैं।

क्या उन्हें अपराध बोध होता है? अदिति कहती है, ‘‘नहीं, क्योंकि मैं कभी अपने पति से जुड़ी हुई नहीं थी। यहां तक कि अगर मैं उसे मेरे प्रेम संबंध के बारे में भी बता दूँ, तो मुझे यकीन है कि उसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।” हालांकि साथर्क कहता है कि कभी-कभी वह अपराध बोध महसूस करता है, ‘‘क्योंकि शायद बहुविवाही होना मानवीय स्वभाव है- मैं अपनी पत्नी और अदिति को समान रूप से प्रेम करता हूँ। मुझे यकीन है कि यदि मेरी पत्नी को पता चलेगा तो उसे ठेस पहुंचेगी और बात शायद तलाक के साथ ही खत्म होगी। मुझे इस बात का डर लगता है।”

भविष्य धुंधला है। सार्थक कहता है, ‘‘हमने पहले कभी एक दूसरे पर अधिकार की चाह महसूस नहीं की, तब भी जब हमने कुछ समय तक बात नहीं की। अब यह अधिक माँगों वाला संबंध है। हम दोनों अपेक्षा करते हैं कि सामने वाला उपलब्ध रहे जब हमें उसकी आवश्यकता हो।”

वे दोनों भविष्य को लेकर अनिश्चित हैं - लेकिन वे दोनों स्पष्ट हैं कि नए संबंध बनाने के लिए वे मौजूदा संबंध नहीं तोड़ेंगे। दोनों के बच्चे हैं और वे दृढ़ता से उनकी रक्षा करना चाहेंगे। सार्थक स्वीकार करता है, ‘‘मैं बाद के भावनात्मक आघात से बचने के लिए हमारे शारीरिक संपर्क को सीमित करना चाहता हूँ”

लेकिन फिलहाल, वे स्पष्ट हैं कि वे एक दूसरे से मिलना बंद नहीं कर सकते। वे एक-दूसरे से प्रेम करते हैं, उन्होंने दशकों से एक-दूसरे से प्रेम किया है, और वे नहीं जानते कि इसके अलावा क्या करें। यह देखते हुए कि हम सभी इस प्रकार के संबंध की चाह रखते हैं, क्या आलोचना और नैतिक रूख का यहां कोई स्थान है? सार्थक और अदिति ना यह जानते हैं और ना इसकी परवाह करते हैं।

(जैसा कि अखिला विजयकुमार को बताया गया)

 

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