मैं अकेली हूँ और 35 तक इंतज़ार करने के लिए तत्पर हूँ

वह कई बार प्रेम में पड़ी है लेकिन अब तक उस पुरूष से नहीं मिली है जिससे वह विवाह करना चाहती है।

Supreeta Singh | Posted on 27 Apr 2017
मैं अकेली हूँ और 35 तक इंतज़ार करने के लिए तत्पर हूँ

मैं एक 35 वर्षीय महिला हूँ जो उसका स्वयं का व्यवसाय संभालती है, जो एक सहयोगी परिवार द्वारा संरक्षित है, मित्रों के एक मिश्रित समूह द्वारा घिरी हुई है, शुभचिंतकों द्वारा सराही जाती है, बाधाओं और अवरोधों द्वारा सुदृढ़ होती है और पढ़ते, लिखते और पढ़ाते समय सबसे अधिक प्रसन्न होती है। मुझे सपनों के पीछे भागना और उन्हें पूरा करना बहुत पसंद है, सांसारिक महत्वाकांक्षा के लिए नहीं बल्कि स्वयं की क्षमताओं और जीवन में विश्वास का परीक्षण करने के लिए और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए। मैं अकेली रहती हूँ और मेरे जीवन में किसी कमी के हल्के से भी अहसास के बगैर, अपनी खुशी से अविवाहित हूँ।

मैं ऐसी व्यक्ति नहीं हूँ जो संबंधों की समस्याओं के बारे में निंदा करता है। मेरा कोई प्रेम संबंध नहीं है। मैं बहुत खुश हूँ। मुझे अपना स्वयं का साथ बहुत पसंद है। मुझे मेरे घर में अपने साथ समय बिताना बहुत पसंद है जहां मुझे वह होने, वह करने और वह सोचने की स्वतंत्रता है जैसा मैं चाहती हूँ। ऐसा इसलिए नहीं है क्योंकि मुझे कोई सामाजिक भय है - बल्कि मेरा काम मुझे सामाजिक तौर पर अत्यंत सक्रिय बनाता है- लेकिन मैं स्वयं का और अपने जीवन का पूरी तरह सम्मान करती हूँ। हालांकि, जैसे जैसे मेरी उम्र बढ़ रही है, लोगों को लगता है कि अकेले रहना एक संकटपूर्ण समस्या है जो समय के साथ बदतर होती जाएगी! मुझे यह बिल्कुल हास्यपद और पूरी तरह बकवास लगता है।

मैं अकेली हूँ क्योंकि मैंने किसी को भी उस हद तक प्यार नहीं किया कि मैं उससे विवाह कर सकूँ।

मैं प्यार में रही हूँ। और मैं उससे बाहर भी आई हूँ। मैंने मेरे प्रत्येक प्रेमी के साथ अद्भुद यादें बनाई हैं और कुछ सपनो को तोड़ा है। मैंने चोट दी है और स्वयं भी चोट खाई है। मैंने स्वयं पर दया करने का आनंद उठाया है और अपने प्रेमियों को दयनीय बनाया है। मैंने दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय लिए हैं और मन ही मन हसीं हूँ। मैंने प्रेम किया है और बदले में प्रेम भी पाया है। मैंने कई पुरूषों के साथ संबंध बनाए हैं और उनमें से कुछ के साथ विवाह का विचार भी किया है। अधिकतर, मैं अपने अपेक्षाकृत कम अवधि के प्रेम प्रसंगों में खुश हूँ। लेकिन किसी ने भी मेरा मन आकांक्षाओं से नहीं भरा है। अब तक।

वास्तव में, मैं प्रेम में विश्वास करती हूँ। मेरा मानना है कि वह समय, आयू और प्रतिष्ठा के विचारों से बढ़ कर है। मैं मानती हूँ कि प्रेम को हमारे लिए साथ का आनन्द लाना चाहिए ना कि समझौता। मैं जानती हूँ कि प्यार गुरूत्वाकर्षण द्वारा बाध्य नहीं है बल्कि यह भावनाओं द्वारा बहता है। प्रेम स्वाभाविक है और रास्ता ढूँढने का इसका स्वयं का तरीका है। प्रेम सम्मान है और व्यक्तिगत विकास के लिए एवं एक दंपत्ति के रूप में भावनात्मक रूप से, आत्मिक और भौतिक तौर पर साझे लक्ष्यों का अनुपालन है। प्रेम एक दूसरे को दिए गए वचन को निभाने के लिए दो भिन्न व्यक्तियों के एक साथ आने के विषय में है।

अपने सपनों के राजकुमार को ढूँढते हुए मैं खुद ही वह बन गई। मैं अपनी जीविका कमाती हूँ, मैं अपने निर्णय स्वयं लेती हूँ और मैं सभी उतार-चढाव के साथ काफी संतुष्ट हूँ। जहां प्रत्येक व्यक्ति को अपनी राय बनाने का अधिकार है, ‘‘स्थिरता” और ‘‘घर बसाने” के लिए प्रेम किए जाने के विचार ने हमेशा मुझे भयभीत किया है! मैं ऐसा करने से इनकार करती हूँ। मेरे लिए, किसी से विवाह करने के लिए ये कारण नहीं हो सकते हैं।

मैं एक गलत व्यक्ति की बाहों के बजाय एक पुस्तक के साथ रहना पसंद करूंगी। मैं एक अनजान व्यक्ति के पास सोने के स्थान पर प्रेम की आशा के साथ सितारों जड़े आकाश को देखूंगी।

ऐसे व्यक्ति से कुछ भी स्वीकार करने की बजाए, जिसे मैं जानना भी नहीं चाहती, मैं लगातार काम करूंगी तब भी जब मैं आराम करना चाहती हूँ। मैं टूटे हुए दिल के साथ अकेला रहना पसंद करूंगी बजाय उस व्यक्ति द्वारा बार बार अपना दिल तोड़ने के जिससे मेरा विवाह हुआ हो। मैं सामाजिक मानदंडों का पालन कर बाद में पछताने के स्थान पर स्वयं के सहजबोध का पालन कर अकेली रहूँगी।

खैर, कुछ बातें स्पष्ट कर देती हूँ। मैं विवाह के विरूद्ध नहीं हूँ, भले ही वह एक वैवाहिक वेबसाइट के ज़रिए क्यों ना हो! ऐसे कई दंपत्तियों को मैं जानती हूँ जो एक दूसरे के साथ खुश और सुरक्षित हैं। मैं विवाह करना ज़रूर चाहूँगी। मैं एक ऐसे पुरूष के साथ रहना पसंद करूंगी जिसके साथ मैं अपने विचार, धन और शरीर साझा कर सकूं। मैं एक पत्नी और एक माँ होने के आनन्द का अनुभव करना पसंद करूंगी। लेकिन यदि यह नहीं हो रहा है, तो हमें जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए!

दूसरी बात, मैं एक आदर्शवादी नहीं हूँ। मैं एक प्राकृतवादी हूँ। जिन पुरूषों के साथ मेरे संबंध रहे वे अद्भुद थे लेकिन दोषरहित नहीं। उनमें कुछ दोष थे लेकिन इस कारण से मेरा प्रेम उनके प्रति कम नहीं हुआ। इस तथ्य ने उन्हें और अधिक आकर्षक बना दिया था की उनके पास कहने के लिए एक कथा थी और स्वयं की विशेषताएं थीं। और मैं दूसरों पर राय बनाने वाली कौन होती हूँ, जब मेरे पास निपटने के लिए स्वयं के दोष हैं? लेकिन अंत में मुझे यह अहसास हुआ है किः यह सही व्यक्ति के बारे में है ना कि आदर्श व्यक्ति के!

और मैं इंतज़ार करने के लिए तत्पर हूँ।

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