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11 संकेत की आपका साथी गलत तरह से ईर्ष्यावान है

ईष्यालु होना अक्सर एक चेतावनी होती है कि आपके रिश्ते में भरोसा कम हो रहा है।
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जब ईर्ष्या रूपी राक्षस बाहर निकल आता है

हमने संबंधों को एक ऐसे लबादे में ढंक रखा है जहां पहुंचना इतना मुश्किल है, कि कभी-कभी हम भूल जाते हैं कि जो दो लोग शामिल हैं वे भी ईंसान ही हैं। हम अजीब और जटिल लोग हैं जिनका हमेशा अपनी भानाओं पर नियंत्रण नहीं रहता। यह कभी-कभी चीज़ों को अजीब बना देता है, खास कर के तब जब असुरक्षाएं उत्पन्न होने लगती हैं।

ईर्ष्या विनाशकारी हो सकती है

इस बारे में ज़्यादा सदाचारी नहीं बनते हुए स्वीकार कर लेते हैं कि प्यार में हम सभी ईर्ष्यालू हो जाते हैं। कभी-कभार यह प्यारा भी लग सकता है। पज़ेसिवनेस के इस छोटे से काम की वजह से लोगों को लव्ड महसूस हो सकता है। लेकिन जब यह जुनून में बदल जाता है, तब यह मुश्किल क्षेत्र में आने लगता है। प्रकट रूप से ईर्ष्यालू होना एक संबंध के लिए विषैला है। असुरक्षित होते हुए, हम अक्सर रिश्ते को बर्बाद कर देते हैं, जो हम बिल्कुल नहीं चाहते।

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सब उस संदेह से शुरू होता है

जब एक साथी पूरे समय अपने रिश्ते पर संदेह करने लगता है तो आप जान जाते हैं कि आपके खुशहाल जीवन में कुछ संकट है। पल दो पल के लिए ईर्ष्या होना ईंसानों के लिए आम है, लेकिन जब आप इस बारे में साचेने लगते हैं कि आपका साथी वफादार है या नहीं, तो इसका मतलब है कि आपकी ईर्ष्या एक अस्वस्थ स्तर तक पहुंच चुकी है और अब इसकी जांच करने का समय है।

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चिपकू व्यवहार

किसी को चिपकू कहना कठोर लग सकता है, लेकिन यह ऐसा ही महसूस होता है। जब एक साथी उनका सारा समय एक साथ बिताना चाहता है। जब वे हर पल अपने साथी के साथ होना चाहते हैं, यह थोड़े समय के लिए क्यूट लग सकता है। थोड़े समय बाद, इससे घुटन होने लगती है।

निगरानी रखने वाला संबंध

बचपन में हम सब इस से गुज़रे हैं। हमारे माता-पिता हमेशा जानना चाहते थे कि हम कहां हैं और क्या कर रहे हैं। जब हम बड़े हो जाते हैं और माता-पिता बन जाते हैं तब हम समझते हैं कि उनके लिए यह इतना महत्त्वपूर्ण क्यों था। लेकिन अगर एक साथी ऐसा करने लगे तो इसमें एक अंतर होता है। वे आपके माता-पिता नहीं हैं। उन्हें हमेशा हर डीटेल पता होने की ज़रूरत नहीं है। अगर आपमें से एक लगातार दूसरे की जांच करता है तो यह भरोसा पहले ही टूट चुका है कि दो लोग हमेशा एक दूसरे के प्रति वफादार रहेंगे। सेलफोन अब निगरानी रखने के नए उपकरण बन गए हैं और एक दूसरे पर नज़र रखना अब पहले से कहीं ज़्यादा सरल हो गया है। हालांकि, अगर आपको एक दूसरे पर नज़र रखनी पड़ती है, तो शायद खुद के भीतर झांकने का समय आ गया है।

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वे नहीं चाहते कि आप एक स्वतंत्र जीवन जीएं

यह हमेशा सचेत नहीं होता है, लेकिन अगर आपके साथी को यह पसंद नहीं आता कि आप अपने दोस्तों के साथ बाहर जाएं या उनकी गैरमौजूदगी में भी खुश रहें, या फिर ऐसा शौक या रूचि विकसित कर लें जिसमें उनके शामिल होने की ज़रूरत नहीं है, तो यह अस्वस्थ ईर्ष्या का संकेत है। वे आप दोनों के एक टीम होने के विचार पर कुछ ज़्यादा ही निर्भर हैं और आपको उसके बाहर कुछ भी नहीं करने दे सकते। यह मानवीय कनेक्शन को देखने का एक बहुत ही पुराना तरीका है और वह आपको अकेले चीज़ें करने के लिए शर्मिंदा महसूस करवाएगा।

चरम स्टॉकिंग का मामला

यह तब होता है जब बात हद से ज़्यादा बढ़ जाती है। अगर आपका साथी आपका पीछा करना शुरू कर दे, पूरी तरह से छुप कर नहीं लेकिन सावधानी से, तो आपके संबंध में भरोसा संकट में है। अगर वे आपके ऑफिस में बार-बार बिना बताए आने लगें। अगर आपके कहे बिना ही वे आपको हर जगह छोड़ने लगें, तो उन्हें इस हद तक ईर्ष्या और असुरक्षा महसूस हो रही है कि वे खुद को आपके साथ बांध लेना चाहते हैं। यह इस हद तक अस्वस्थ और विषाक्त है कि उस स्थिति से आप वापस नहीं लौट सकते। एक साथी द्वारा इस तरह से आपको स्टॉक किया जाना भी प्रतिकूल है और इसे दुर्व्यवहार समझा जा सकता है।

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वे एक कंट्रोल फ्रीक की तरह बर्ताव करने लगते हैं

यह अच्छी तरह से ज्ञात हो चुका है कि कंट्रोल फ्रीक एक साथी के रूप में बहुत बुरे होते हैं। कभी-कभी वे परिस्थिति के शिकार होते हैं और आप उनकी समस्याओं पर एक साथ काम कर सकते हैं। जब ईर्ष्या को नियंत्रित करने की बात आती है, तो उसका समाधान आसान नहीं होता है। आपका साथी आपके व्यवहार को, आप किस से बात करते हैं, आप काम पर कब जाते हैं और कब लौटते हैं को नियंत्रित करने की कोशिश करता है, और यह आपके रिश्ते को एक पिंजरे में बदल देता है। आपको रिश्ते में अब और ब्रीदिंग स्पेस नहीं मिलती है और अक्सर इसका मतलब है कि रिश्ते को मदद की सख्त ज़रूरत है।

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कड़वा घूंट

हर प्रकार की ईर्ष्या को सहन करना यह पूरी भावना इसी तथ्य से संबंधित है कि आप दोनों पूरी तरह एक दूसरे पर भरोसा नहीं करते। जहां आपके साथी पर आँख मूंद कर विश्वास करने की सलाह नहीं दी जाती है, वहीं अगर आप सोचते हैं कि वह काम पर जाने की बजाए किसी के साथ सो रहा है, तो आप उनपर इतना भरोसा कैसे कर सकते हैं कि वे अपना शेष जीवन आपके साथ बिताएंगे? आत्म-संदेह और ईर्ष्या से पैदा होने वाली असुरक्षा अक्सर दो लोगों के नज़दीक होने में मदद करने की बजाए रिश्ते में बाधा डालती है।

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