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२० साल लगे, मगर आखिर मैंने उसे ब्लॉक कर ही दिया

उनके रिश्ते को टूटे बीस साल हो गए थे. वो अब भी मन के किसी कोने में रहता था और फिर एक दिन उसे फेसबुक पर उसका "हाय" देखा...
Lady blocking fb

अब आप मेरे बारे में झटपट कोई राय मत बना लीजियेगा. हम सबने अपनी युवावस्था में ऐसा एक रिश्ता तो ज़रूर बनाया होता है जिसे सालों बाद भी जब याद करो तो बिलकुल ताज़ी ताज़ी याद सा ही लगता है. हमें उस पहले प्यार के बाद हमारा सच्चा प्यार मिल चूका होता है, कई बार तो हमारी शादी भी हो जाती है, मगर वो पहला प्यार भूत सा पीछा ही नहीं छोड़ता.

जब ऐसे रिश्ते टूटते है तो हमारे मन में जो पहला विचार होता है, वो है, “उसके बिना मैं ज़िंदा तक कैसे रहूंगी?”. फिर वो बदल कर हो जाता है, “बाद में उसे पछतावा होगा की उसने क्या खो दिया?” और फिर धीरे धीरे मन समझ जाता है और एक दिन झटके से कहता है, “भाड़ में जाए वो और उसकी यादें”. मगर इस एक सोच से दूसरी और फिर तीसरी और आखिरी सोच आने में दिन, महीने, साल और पता नहीं कितने आंसूं निकल जाते हैं. मगर ज़िन्दगी रूकती कहाँ है. तो इसलिए धीरे धीरे वो सबसे गहरी याद फीकी होने लगती है और जीवन में नए लोग और नयी बातें अधिकतर समय और महत्व लेने लगती हैं. तो यूँ ही मैं अब उसे रोज़ याद नहीं करती थी और ऐसा नहीं था की रातों को उसके बारे में सोचे बिना नींद न आये. मगर एक सच ये भी है की उसकी याद अब भी किसी कोने में तह करी रखी थी और बीच बीच में उसकी याद से सिलवटें भी हटा देती थी.
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समय सब खुश धूमिल कर देता है

आपको पता है न? दिमाग का वो कोने वाला हिस्सा ऐसी यादों को इतना संजो कर रखता है और आप लाख भुलाने की कोशिश करो, वो कोना इन यादों को संभाल कर रख लेता है. ये यादें असल में भूली भी नहीं जानी चाहिए क्योंकि इन यादों ने आपको इतना कुछ सिखाया है, आपको आपके आज के रूप में बनाने में भी इन यादों का बड़ा हाथ होता है. शायद आपका स्वाभिमान इन यादों को हवा देता है न की आपकी तकलीफ. क्या पता, वो भी मेरे मन के किसी कोने में जल रहा होगा. मगर मुझे उसका अंदाजा नहीं था. और फिर आया सोशल मीडिया का दौर. जी हाँ, मेरा ब्रेक अप उस चिरकाल में हुआ था जब ऑरकुट भी हमें ठीक से न बोलना आता था न इस्तेमाल करना. और इस सोशल मीडिया ने इतने सालों बाद उस याद को यूँ मेरे सामने खड़ा कर दिया. ठीक मेरे सामने!

और फिर शुरू हुआ उसे फिर से चुपके चुपके देखने का सिलसिला. फेसबुक पर चुपके से उसकी मुस्कुराती शक्ल देख कर मैं तिलमिला जाती थी. मुझे कोई ज़रुरत नहीं थी अपने अतीत के किसी बॉयफ्रेंड की खुद को दुखी करने के लिए. मगर मैं ऐसा कर रही थी. मैं क्यों एक फोटो को मुझपर इतना असर करने दे रही थी?मगर मैं ऐसी नहीं थी. मैंने तो सोचा था की इतने सालों में मैं उसे भूल गई होंगी मगर कुछ तो अब भी बाकी है उन यादों का. इसका मतलब इतने सालों से मैं जो भूल जाना समझ रही थी वो असल में बस ब्लॉक करना था. समय आ गया था की मैं अब कुछ अपने अंदर झाँकूँ और समझूँ.

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शुरुआत अच्छी थी

जब हम पहली बार डेट पर गए तो आम युगल प्रेमियों की तरह हमने भी रंगीन चश्मे पहने थे जिससे सब कुछ अच्छा और सुहाना दीखता है. मगर कुछ महीने बीतते बीतते हमदोनो के बीच झगडे शुरू हो गए. हम पढ़ाई के कारण ज़्यादा मिल नहीं पाते, तुम्हारी बहुत सारी लड़कियां दोस्त क्यों है और वो तुमसे क्या बातें करते रहती है, मैं अभी भविष्य के बारे में कैसे सोचूँ– ये ऐसे विषय थे जिनपर हम खुद को संभाल नहीं पा रहे थे. शायद हम तब तक ही खुश थे जब तक सब हंसी ठिठोली में चल रहा था. मगर जैसे ही मोमो खाना, निक्को पार्क और म्यूजियम जाना बोरिंग लगने लगा, हमारा मन भी वापस वो पुरानी ज़िन्दगी ढूंढ़ने लगा जिसमे स्कूल जाना, स्कूल से वापस घर माँ के पास, माछ -भात खाना, शाम को खेलने जाना, वापस आ कर पढ़ना और फिर सो जाना ही था.

शायद हमने एक दुसरे के साथ दोस्तों की तरह इतना अधिक समय कई बिता दिया था की अब जब अपने रिश्ते को अगले पड़ाव पर ले जाने की बात थी तो हम बुरी तरह से बिफल हो गए. बिलकुल चारों खाने चित हो गए थे. कई बार लोगों से सुना है की अपने सबसे अच्छे दोस्त से शादी करना एक बहुत ही अच्छा फैसला होता है. बिलकुल नहीं!हमारे मामले में तो हमने अपने सबसे दोस्त को प्रेमी बन कर खो दिया और प्रेमी भी नहीं बन पाए. दोस्त तो बिलकुल नहीं रह पाए क्योंकि जब हम दोनों अलग हुए, हमारे बीच इतनी कड़वाहट थी की दोस्ती का कोई आसार नहीं था. ये तो अच्छी बात थी की हम दोनों में किसी तरह की कोई शारीरिक समिनपता नहीं पनपी थी, गाल पर एक छोटी सी किस भी नहीं, वरना और भी अपराधबोध लगता.

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और जब वो फिर से आ गया

मन में जैसे यादों का भूचाल आ गया जैसे ही मैंने उसकी तस्वीर देखि. बार बार उसे देख कर बहुत कड़वी बातें मन में याद आ रही थी. मैं खुद हैरान थी की मेरा दिमाग मुझे क्या और कितना कुछ याद दिला रहा था. अब तक जो एक धुँधली सी तस्वीर लगती थी, आज बिलकुल मल्टीप्लेक्स पर चल रही एक रंगीन पिक्चर की तरह सामने आ गयी. आप विश्वास नहीं करेंगे कैसे मैं रोज़ की आम दिनचर्या निभाते हुए २० साल पहले हुई उन घटनाओं को भी याद करती जा रही थी. और अंत में मैंने अपने आपको झिड़का। वैसे इस पूरे परिवर्तन में सिर्फ मेरी ही गलती हो, ऐसा नहीं था. असल में उस लड़के ने मुझे मेस्सेंजर पर एक “हाय ” भेजा और उसके बाद जो हुआ, वो आपके सामने है.

कभी कभी एक बिलकुल छोटी सी चीज़ ही इतने बड़े बड़े बदलाव ला देती है की आप विश्वास नहीं कर पाते. बीस साल बाद एक भूले से नाम ने आपको बस एक हाय कहा और आपकी ज़िन्दगी में जैसे सुनामी ही आ गई.

हमारे बीच ब्रेअकप क्यों हुआ है

मेरे दिमाग में रह रह कर वो हम दोनों के बीच की आखिरी लड़ाई आ रही थी जब वो यूँ ही बहाने बना रहा था क्योंकि उसे समय मेरे साथ नहीं, अपने किसी दोस्त के साथ बिताना था. मुझे इस बारे में हमारे एक कॉमन दोस्त से पता चला और मैं आपे से बाहर हो गई. उसके बाद हम दोनों की बहुत लड़ाई हुई, और चूँकि लड़ाई कलकत्ता के एक सार्वजनिक स्थान पर हो रही थी, हमें कई बड़े बुज़ुर्गों की निराशा वाली नज़रों को भी झेलना पड़ा. कई लोग हमें देख रहे थे और मुझे पता है, उनके मन में बस यही आ रहा होगा, “कितने अभद्र लड़के लड़की हैं ये दोनों”.

खैर, मैंने एक बार फिर से उस “हाय ” को देखा और मेरे मन में छोटे छोटे कई कोनों से अलग अलग आवाज़ें आने लगीं. एक आवाज़ ने कहा, “अरे वो सोलह साल का लड़का था और नादाँ था. इसलिए उसने ऐसा व्यवहार किया.” दूसरी आवाज़ ने कहा की उसने यूँ प्रत्रिक्रिया दिखाई थी क्योंकि वो मुझे लेकर बहुत एकाधिकार महसूस करता था. एक तीसरी आवाज़ ने काफी सख्ती से कहा की मुझे अब उन बातों को भूल जाना चाहिए और उससे अब किसी भी तरह की दोस्ती करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. मेरे मन की चौथी आवाज़ सबसे तार्किक और समझदार लगी. उसने मुझे समझाया की “मुझे ब्लॉक का बटन दबा देना चाहिए और उसे हमेशा के लिए अलविदा कर देना चाहिए.”

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और मैंने वो कर ही दिया

इतने साल हम दोनों ने एक दुसरे से अलग अपनी दुनिया बना ली थी और हम एक दुसरे से कभी नहीं टकराये थे. अब बीस साल बाद जो हम अचानक से टकराये थे, वो शायद मौका था सब कुछ हमेशा के लिए ख़त्म करने का. मैंने अपनी उंगलियन माउस पर चलायी और कर्सर को ब्लॉक बटन पर रख दिया. और फिर मैंने क्लिक कर दिया!

प्यार की कहानियां जो आपका मैं मोह ले

इस बात को महीनो बीत चुके हैं. जब मैंने ये सब लिखना शुरू किया था, सोच रही थी की शायद मेरे मन में बहुत उथल पुथल होगी. मगर विश्वास कीजिये, मुझे ऐसा कुछ महसूस नहीं हुआ. आज मेरे लिए ये बस एक कहानी है जो मैंने बहुत ही सहजता से लिखी है. आप कह सकते हैं की शायद मुझे अपने अतीत को भूलने और माफ़ करने में काफी ज़्यादा समय लग गया मगर मैं खुश हूँ, की चाहे बीस साल बाद ही सही, मैंने उस पन्ने को यादों से ब्लॉक कर तो दिया. मुझे लगता है की प्यार में बड़ी ताकत होती है. अगर आपके वर्तमान में आपके पास बेशुमार प्यार है तो अतीत के दर्द अपने आप हीकम होने लगते हैं, और फिर समय के साथ पूरी तरह गायब भी हो जाते हैं.
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