‘‘20 साल से हैप्पिली मैरिड जोड़े इन दिनों ‘‘तलाकशुदा” में क्यों बदल रहे हैं?

arjun and meher

हमारे दादा-दादी के ज़माने में, शादी के कई दशकों बाद जोड़े के अलग होने की इतनी कहानियां क्यों नहीं थीं? और अब ऐसा क्यों है कि जो जोड़े बहुत खुश दिखते हैं, वे अलगाव की घोषणा कर देते हैं? पिछले कुछ वर्षों में क्या बदल गया है?

हेडलाइन में लिखा था, ‘‘मेहर जैसिया और अर्जुन रामपाल अब एक जोड़ा नहीं रहे”। मेरी हमेशा उत्सुक रहने वाली 75 वर्षीय पड़ोसन, जो पार्क में मेरे पास बैठी थी, उन्होंने मुझसे पूछा कि मैं किस बात से परेशान हो रही थी। मैंने उनके सामने अलगाव वाला कथन पढ़ दिया। अब, आंह भरने की बारी उनकी थी। खासतौर पर जब मैंने ये पंक्तियां पढ़ीं, ‘‘हम हमेशा मजबूत रहे हैं, हम एक दूसरे के लिए मजबूत रहना जारी रखेंगे, क्योंकि हम अब एक नई यात्रा की शुरूआत कर रहे हैं”

उन्होंने कहा, ‘‘कौन सी नई यात्रा? ‘‘उन्हें लगता है कि 20 साल बाद वे फिर से शुरूआत कर सकते हैं” उन्होंने मुझसे पूछा। शायद मैं गलत हूँ लेकिन जब वे उनकी काल्पनिक नई यात्रा के बारे में कह रहीं थीं तो मुझे थोड़ी ईर्ष्या दिखाई दी।

ये भी पढ़े: क्या रविन्द्रनाथ टैगोर अपनी अर्जेंटिना की म्यूज़ से प्यार करते थे?

मुझे याद है कि उन्होंने एक बार मुझे बताया था कि शादी के दो हफ्ते बाद भी उनके पति ने उन्हें छूआ तक नहीं था, एक ही बिस्तर में सोना तो दूर की बात है। वे जड़वत् हो गई थीं और दिल्ली की लड़की होने के नाते उनके सभी रोमांटिक सपने चूर-चूर हो गए थे।

“और फिर एक दिन, बोरीयत और निराशा से भर कर, मैं हमारा कमरा साफ कर रही थी। उसके कपड़ों के पीछे मुझे सेक्स सीखने से संबंधित किताब मिली!” मुझे अब भी याद है कि जब वे लगभग 45 साल पहले घटी हुई एक घटना मुझे सुना रही थीं, तब उनके हाथों ने कोमलता के साथ मेरे हाथों को पकड़ लिया था।

“तो समस्या यह थी। वह सिर्फ शर्मीला नहीं था। उसे कुछ भी नहीं पता था और अब मुझे ही कुछ करना था। उस दिन मुझे अहसास हुआ कि इस विवाह को बचाने के जिए मुझे ही पहला कदम उठाना होगा। मुझे ही हर चीज़ की पहल करनी होगी।” उन्होंने थोड़े गर्व के साथ कहा था। फिर मैंने उन्हें चिढ़ाया और पूछा कि उन्होंने कितनी बार पहल की थी, यह ध्यान में रखते हुए कि अगले दस वर्षों में उनके छह बच्चे थे। वे हमेशा हंसती थीं और मुझे एक हल्का सा थप्पड़ लगाती थीं।

हमारी कई बातचीत के बाद, मुझे पता चल गया था कि वे एक सुखी विवाहित स्त्री नहीं थीं लेकिन वे और उनका पति 50 वर्षों से अधिक समय तक साथ में रहे। और फिर वृद्धावस्था की वजह से उनके पति का स्वर्गवास हो गया।

तो, आज जब उन्होंने अर्जुन और मेहर के अपने लिए नई अलग यात्रा के विचार को ज़ोरदार तरीके से अपमानित किया, मैंने उनसे पूछा, ‘‘आपने कभी इस बारे में क्यों नहीं सोचा नानी?’’

“क्योंकि….’’ वे मुस्कुराई और उत्तर दिया।

ये भी पढ़े: कर्ज़दार मुझे धमकी भरे फ़ोन करते है क्योंकि पति का कुछ पता नहीं
“क्योंकि”। इस अधूरे सर्वव्यापी उत्तर ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। इस क्योंकि के बाद क्या आना चाहिए? शादी के कई दशकों तक साथ रहने के बाद जोड़ों के अलग होने की इतनी कहानियां क्यों नहीं थीं? और अब ऐसा क्यों है कि जो जोड़े खुश प्रतीत होते हैं वे विलगाव की घोषणा कर देते हैं? पिछले कुछ वर्षों में क्या बदल गया है? पसंद, पसंद और ज़्यादा पसंद।

जब मैं पसंद कहती हूँ तो मेरा मतलब एक अलग जीवनसाथी को पसंद करना ही नहीं है। पहले, हमारे सामाजिक सिस्टम में ‘‘हैप्पिली एवर आफ्टर का विचार इतना ज़्यादा अंतःस्थापित था कि कोई भी स्पर्शरेखा एक अपवित्रीकरण थी। लेकिन आर्थिक आत्मनिर्भरता और जागरूकता के साथ, लोग प्यार खत्म हो जाने और साथ के समाप्त हो जाने के बाद साथ में रहने में विश्वास नहीं रखते।

हम सभी विदाई के दृश्य के बाद का डायलॉग सुन कर बड़े हुए हैं जिसमें माँ अपनी बेटी से कहती है, ‘‘हम तुम्हारी शादी कर रहे हैं और अब वही तुम्हारा इकलौता घर है” या फिर ‘‘अब उस घर से तुम्हारी सिर्फ अर्थी वापस आएगी। ये डायलॉग लड़कियों पर सामाजिक दबाव को दर्शाते हैं जब उनकी शादी होती है। उनसे कभी वापस लौटने की उपेक्षा नहीं रखी जाती, सिवाए छुट्टियों में और वह भी वापसी के टिकट के साथ। वे मूल रूप से अपने पतियों को इसलिए नहीं छोड़ सकती क्योंकि उनके पास हमेशा जाने के लिए जगह नहीं होती।

लेकिन समय बदल रहा है। लड़कियां बेहतर शिक्षित हैं, उनके पास नौकरियां हैं और वे खुद से प्यार करना जानती हैं। आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ आत्मविश्वास भी आता है जिससे वे वैवाहिक वचनों को तोड़ सकती हैं इससे पहले की वे श्राप बन जाएं। अब, मैं यहां यह जोड़ना चाहूंगी कि पुरूषों के लिए भी यह कुछ कम कठिन नहीं था। ‘‘पुरूष” होने का दबाव सहना बहुत मुश्किल था, जो बीवी बच्चों की देखभाल करेगा। एक समाज जो अपने पुरूषों को रोने की इजाज़त नहीं देता, वह उस व्यक्ति के प्रति इतना दयालु नहीं होता जिसने अपनी बरसों पुरानी पत्नी को त्याग दिया हो।

ये भी पढ़े: महाभारत के भीम ने शायद दुनिया की सबसे आधुनिक स्त्री से शादी की थी। जानते हैं वह कौन थी!

माता-पिता से सीख

भारतीय माता-पिता के बच्चों को पालने के कुछ अजीब तरीके हैं। वे सार्वजनिक रूप से या बच्चों के सामने एक दूसरे के लिए प्यार नहीं दिखाते हैं लेकिन बच्चों के सामने चीखने-चिल्लाने का एक भी मौका नहीं छोड़ते। हममें से कितनों ने अपने माता-पिता को एक दूसरे को गले लगाते हुए देखा है और उनके एक दूसरे के साथ झगड़ने की हमारी याददाश्त कितनी ज्वलंत है?

ऐसे माहौल में बड़े होने वाले बच्चे खुद से वादा करते हैं कि चाहे जो भी हो जाए, वे अपने साथी को खुद को दुख नहीं पहुंचाने देंगे और ना ही कभी अपना जीवन दयनीय बनाने देंगे। अध्ययनों से पता चलता है कि जो बच्चे अपने माता-पिता को अक्सर लड़ता हुआ देखते हैं, वे बड़े होने पर विवाह की संस्था में बहुत कम विश्वास करते हैं और इसलिए उनके धैर्य और सहनशीलता की सीमा उनके माता-पिता से बहुत कम होती है।

बच्चों को बड़ा होने दो

‘मैं उसे छोड़ना चाहता था लेकिन ऐसा कर ना सका। मैं नहीं चाहता था कि बच्चे पीड़ा भोगें इसलिए मैंने इंतज़ार किया’ यह कथन मैंने कई लोगों से सुना है जो दशकों तक एक दूसरे के साथ रहने के बाद अलग हो गए।

N Banner

“जोड़ियां स्वर्ग में नहीं बनती हैं। ये दो लोगों या शायद दो परिवार बनाते हैं। और लोग अपने फैसलों में बहुत गलत हो सकते हैं। बहुत सी शादियाँ गलत निर्णय का परिणाम होती हैं। तो आप क्या करेंगे? विवाहित रहकर नाखुश रहेंगे या फिर बाहर निकल जाएंगे। मैं कहूंगी कि बाहर निकल जाएं लेकिन सुनिश्चित कीजिए कि आपके बच्चे अच्छी तरह से सैटल्ड हों और इतने परिपक्व हों कि अलगाव को समझ सकें,’’ मेरी करीबी सहेली अंजू कहती है जो अपने 15 वर्ष पुराने पति को छोड़ चुकी है और जीवन में आगे बढ़ चुकी है।

ये भी पढ़े: बारह संकेत की आप एक सुखी, स्वस्थ रिश्ते में हैं

भावनात्मक शोषण और वैवाहिक बलात्कार के बारे में जागरूकता

हाँ, यह अजीब लगता है लेकिन पुराने समय में बहुत से जोड़ों को यह पता भी नहीं होता था कि वे भावनात्मक शोषण या वैवाहिक बलात्कार के पीड़ित थे। यद्यपि इन दो शब्दों को आज भी काफी असहज रूप से देखा जाता है और बात की जाती है, लेकिन यह तथ्य की उनपर बात की जा रही है, उनके बारे में जागरूकता फैला रहा है। हमें दोनों विषयों पर परामर्श प्रश्न मिलते हैं और जैसा कि आपने अनुमान लगाया होगा, उनकी पीड़ित अधिकतर महिला पाठक होती हैं।

अधिक जागरूकता और सत्यापन की वे जिस भी चीज़ से गुज़र रहे हैं वह ना तो सामान्य है और ना ही स्वीकार्य है, उन्हें छोड़ने की ताकत देते हैं।

हम यहां इस बात पर टिप्पणी करने के लिए नहीं हैं कि यह एक स्वागत योग्य बदलाव है या नहीं, लेकिन यह तथ्य कि जब इस दुनिया में साथी एक मैन्यू पर फैसला नहीं कर सकते हैं, यदि वे जोड़े साथ बैठ कर गरिमा और शांति के साथ संबंध समाप्त करने का फैसला करते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि कोई बदनामी ना हो, तो मुझे लगता है कि यह काबिलेतारीफ है।

मेहर जैसिया और अर्जुन रामपाल ने जिस भी वजह से अपनी 20 वर्ष पुरानी शादी खत्म की हो, वह हम नहीं जानते। बल्कि, हमें जानने की ज़रूरत भी क्या है? जब वे साथ थे, तब वे खुश और सुंदर दिखते थे, और वे अपने अलगाव की घोषणा करने वाला बयान जारी करते समय भी खुश और सुंदर दिख रहे थे। हमें यह प्रार्थना करनी चाहिए कि वे कभी भी अकेला या ग्लानी महसूस ना करें।

(संपादक की डेस्क से)
स्वाती प्रकाश

Tags:

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

This website uses cookies to ensure you get the best experience on our website.