Hindi

30 वर्ष की उम्र में मैंने प्यार के बारे में जाना….यह ओवर रेटेड है

पारोमिता बारडोलोई अपने जीवन के बीते हुए समय पर दृष्टि डालती है; उस समय जब वह बगैर किसी कारण के शहीद हो गई थी, से लेकर प्रेम में सुखी और परीपूर्ण होने तक
over-rated

मैं अपनी किशोरावस्था के पूर्वार्ध में थी और एक कविता क्लब में थी जब मैंने प्यार के बारे में एक कविता सुनाई थी। जहां तक मुझे याद है, वह प्यार और तड़प और अपने प्रेमी के जिए जीवन न्यौछावर करने के बारे में थी। सभी ने तालियां बजाई। मेरा दिन बन चुका था।

वापस आते समय, एक स्त्री जिसकी उम्र 40 वर्ष से कुछ अधिक थी, उसने मुझे अपनी कार में लिफ्ट दी। उसने प्यार के बारे में बात करना शुरू कर दिया। उस चर्चा के बारे में मुझे इतना ही याद है कि, आपके जीवन के हर दशक में प्रेम की पहचान या अर्थ बदलता है। मैंने इस बारे में बहुत अधिक नहीं सोचा। मैं 19 वर्ष की थी। मैं प्यार में थी। और मुझे लगता था कि जीवन इसे ही कहते हैं। प्यार, जैसा मैं उसे जानती थी।

ये भी पढ़े: जब मेरी पत्नी ने मुझे धोखा दिया, मैंने ज़्यादा प्यार जताने का फैसला किया

फिर जीवन आगे बढ़ा और उस चरण में, मैं अधिक समझदार बन गई।

हम प्यार में होने के लिए अनुकूलित किए गए हैं। हमें प्यार में होना कैसे सिखाया जाता है? वह प्यार बिना वापसी की उम्मीद के सिर्फ देने का नाम है। प्यार स्वयं को समर्पित कर देना है। और सच्चा प्यार आपको बचाएगा।
[restrict]

true-love
‘हम प्यार में होने के लिए अनुकूलित किए गए हैं’ Image Source

यदि हम सांस्कृतिक रूप से देखें, तो हमने पीड़ा भोगने को एक गुण बना दिया है। और कई सारी युवा लड़कियों की तरह, मैंने भी इस अवधारणा को पूरी तरह सही मान लिया। मैंने लोकप्रिय लेकिन दुर्भावनापूर्ण संदेश को दिल में उतार लिया कि प्यार का अर्थ है आपको बलिदान करना होगा। मैं बिना किसी कारण के शहीद हो गई थी। जिस दिन से मैं प्यार में पड़ी उसी दिन से मैंने तय किया कि मैं समर्पित स्त्री बनूंगी जो बिना किसी उम्मीद के प्रेम करती है। ज़ाहिर है यह एक अनर्थ था। बात यह है कि, कोई भी युवा लड़कियों को आत्म-प्रेम या अपनी सीमाओं को स्थापित करने के बारे में नहीं सिखाता। हम यह लड़कों को भी नहीं सिखाते हैं। प्यार या संबंधों की हमारी कथा बचाने वाले और जिसे बचाया गया है उसके बारे में होती है।

ये भी पढ़े: मेरी पत्नी ने मुझे 40 साल बाद छोड़ दिया और मैं उसके लिए खुश हूँ

पहला पुरूष, मुझे लगता था जिससे मैं प्यार करती थी, हर दिन रोता था क्योंकि उसकी गर्लफ्रैंड् ने उसे छोड़ दिया था। वह मुझसे प्यार नहीं करता था, उसे केवल रोने की आवश्यकता थी और मैंने उसे अपनी तवज्जो दी। मैंने लगभग बचावकर्ता की भूमिका निभाई थी। यह समझने के लिए मेरी उम्र बहुत कम थी कि किसी को भी बचावकर्ता की ज़रूरत नहीं होती। हम सभी वयस्क हैं जो निर्णय ले रहे हैं। यह सब तब समाप्त हो गया जब वह उसकी लंबे समय से बिछड़ी दोस्त से प्यार कर बैठा और इस तरह आगे बढ़ गया जैसे मैं अस्तित्व में ही नहीं थी।

लेकिन यह एक और रहस्य हैः मुझे पूर्णतः ज़रूरत थी कि किसी को मेरी ज़रूरत हो। यह बहुत कम आत्म-सम्मान वाली स्त्रियों के साथ होता है। मैंने सोचा कि जो लड़के मुझे पसंद थे वे मेरे स्तर से बाहर थे, इसलिए वे केवल इसलिए मुझसे बात करते थे या दोस्ती करते थे क्योंकि उन्हें किसी ना किसी तरह मेरी ज़रूरत थी। अपने मन में, मैं उन्हें हीरो बना देती थी, वे लोग जो हमेशा मुझसे बेहतर थे। इसलिए जब वह चला गया, मैं बहुत ज़्यादा अचंभित नहीं हुई क्योंकि मैंने किसी तरह स्वयं को विश्वास दिला दिया कि मैं कभी उसके योग्य थी ही नहीं। मुझे अन्य लड़का मिल गया, मुझे लगता था मैं उसे प्यार करती थी, और फिर वही कहानी दोहराई गई, हालांकि उसकी अवधि बहुत छोटी थी।

लेकिन सबक सीखे बिना आप आगे नहीं बढ़ सकते हैं।

मैं तब 23 वर्ष की थी। मैं टूट चुकी थी। मुझे अब भी याद है कि मैं किस तरह दूसरी लड़कियों को देखती थी और खुद को कोसती थी कि मैं उनकी जगह क्यों नहीं हूँ। मैं उन लड़को की गर्लफ्रैंड्स को देखती थी (मुझे लगता था जिनसे मैं प्यार करती थी) और स्वयं से कहती थी, मैं कितनी बेकार हूँ। मैं लगभग तब तक आत्म-अस्वीकृति की कला में माहिर हो चुकी थी।

उस समय मैंने आत्म -प्रेम की ओर पहला कदम उठाया। मैंने बाज़ी पलटने के लिए सबकुछ किया। मैं जोश से भरी एक स्त्री थी, जो इस पैटर्न और आत्म निंदा को तोड़ना चाहती थी। मैंने यूट्यूब पर वे सभी वीडियो देख डाले जो सुख के बारे में बात करते थे। मुझे याद है कि मैं सुबह जल्दी जाग जाया करती थी और वे सभी पुष्टिकरण करती थी जो लुइस हे की हर पुस्तक के साथ आते थेः काम पर जाना, वापस लौटना और पुनः दाहराना। जैसा कि कहा जाता है, जो आप चाहते हैं, ब्रह्माण्ड आपको वही प्रदान करता है।

self-love
‘मैंने आत्म प्रेम की ओर कदम बढ़ाया’ Image Source

मैंने स्वयं को स्वीकार करना सीखा। मैंने स्वयं से प्यार करना सीखा और सबसे महत्त्वपूर्ण बाद, मैंने सीखा की प्यार मुझसे शहीद होने के लिए नहीं बल्कि खुश होने के लिए कहता है। प्यार पाने के लिए, मझे कुछ भी होने की ज़रूरत नहीं है; मुझे सिर्फ स्वयं होना चाहिए। जैसा कि ओपरा विन्फ्रे कहती हैं, ‘संबंध अनुपूरक नहीं पूरक हैं।’ जब आप किसी द्वारा बचाए जाने के लिए संबंध में जाते हैं, आप दूसरे व्यक्ति के प्रति अन्यायपूर्ण हो रहे हैं। क्योंकि कोई भी आपका उद्धारकर्ता नहीं है। आप स्वयं को बचाते हैं। जब हम हमेशा किसी को नायक होने के लिए कहते हैं, हम उनसे उनके मानव होने का अधिकार छीन लेते हैं। यह एक सामाजिक समस्या है जो लड़कों को नायक या बचावकर्ता होना सिखाती है।

ये भी पढ़े: मैं उसका गुप्त रहस्य नहीं बनना चाहती थी

समय आ गया है कि हम इस बयान को बदलें। प्यार को ज़्यादा ही तवज्जो दी जाती है। एक लड़का या लड़की यहां इसलिए नहीं हैं कि वे आपको राजकुमार या राजकुमारी महसूस करवाएं। अस्वीकार किया जाना ठीक है, और गलतियां करना भी। संबंध बचाने या देने के लिए नहीं है। यह साथ होने के बारे में है। यह दोनों साथियों द्वारा स्वयं के लिए जिम्मेदार होने के बारे में है।

सबसे अहम बात, अगर आप स्वयं से प्यार नहीं कर सकते, तो आप कभी किसी से प्यार नहीं कर सकते। आप स्वीकृति और प्यार की तलाश में मृगतष्णा के पीछे भागते रहेंगे। संबंध देने और लेने का संतुलन है। अगर आप हमेशा देते रहते हैं और बदले में आपको कुछ प्राप्त नहीं होता, तो आप कटु हो जाएंगे। यहां तक की, संपूर्ण ब्रह्माण्ड देने और लेने की प्रक्रिया पर चलता है। आप ब्रह्माण्ड से अधिक बुद्धिमान नहीं हैं, है ना?
अब जब मैंने स्वयं से प्यार करना सीख लिया है, तो मुझे लगता है कि इतने सारे लोग मेरे साथ होना चाहते हैं।

प्यार दुख नहीं देता है, यह अच्छा महसूस होता है। बाकी केवल गुमराह प्रेमियों का अत्यधिक तूल दिया जाने वाला संस्करण है! प्यार आपसे शहीद होने के लिए नहीं बल्कि सुखी और परिपूर्ण होने के लिए कहता है। किसी भी संबंध का यही उद्देश्य है।

मैं यह यकीनन जानती हूँ।
[/restrict]

मैं अकेली हूँ और 35 तक इंतज़ार करने के लिए तत्पर हूँ

10 बातें जिससे केवल अविवाहित लोग इत्तेफाक रखेंगे!

Facebook Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also enjoy:

Yes No