5 बॉलिवुड फिल्में जो अरैंज मैरिज में प्यार दर्शाती हैं

Sohini Sengupta
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हाल ही में 2017 में मुक्त महिलाएं और उनकी अनियंत्रित कामुकता दिखाने के लिए सेंसर की गई लिपस्टिक अंडर माय बुर्का में, मुंबई स्थित भारतीय सिनेमा संस्कार के अधीन था। उद्योग को बनाए रखने के लिए काफी हद तक सुरक्षित खेलते हुए, बॉलिवुड को प्यार में पड़ने और उसके लिए शादी करने के अपमानजनक विचार को लोगों के मन में डालने के लिए भी ज़िम्मेदार ठहराया जाता है! एक तथाकथित विक्टोरियन देश जो अब भी पोस्टकोलोनियल हैंगओवर से गुज़र रहा है, उसमें इस तरह के घृणित विचारों के साथ, यह स्वाभाविक है कि बुराई को संतुलित करने के लिए कुछ अच्छी फिल्में भी बनाई जाएं। हम आपके हैं कौन, धड़कन, नमस्ते लंडन, जस्ट मैरिड और ऐसी कई फिल्में हैं जिन्होंने आकस्मिक और रैंडम रोमांस के साथ अरेंज मैरिज की दुनिया को रहस्यमय बनाने की कोशिश की है। ऐसी कुछ फिल्में हैं जिन्होंने खतरनाक काम अर्थात प्यार को ईमानदारी के साथ चित्रित किया है और ऐसे विवाहों की कहानियाँ बताईं हैं जिसमें अरेंज मैरिज में प्यार विकसित हो जाता है। प्रचलित ढर्रे से कुछ अलग करने वाली ऐसी फिल्में हैं जिन्हें मैंने व्यक्तिगत रूप से रोमांटिक फिल्मों के रूप में पसंद किया है। और यह बात इतना महत्त्व नहीं रखती कि ये अरेंज मैरिज सेटअप में थीं। आईये देखते हैं कि क्या मेरी 5 फिल्मों की सूची आपकी सूची से मिलती है। बॉलिवुड फिल्मों की यह मेरी सूची है जो अरेंज मैरिज रोमांस का गुणगान करती है।

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  1. सोचा ना था

यह जब वी मेट से पहले की इम्तियाज़ अली द्वारा बनाई गई कम ज्ञात लेकिन बहुत पसंद की जाने वाली फिल्म है। यह एक युवा लड़के और लड़की की कहानी है जो परिवारों की बदौलत शादी करने के लिए मिलते हैं। इस व्यवस्था में रूचि ना रखते हुए, दोनों इस बात को खत्म करने का फैसला करते हैं। अभय देओल के परिवार की तरफ से रिश्ता अस्वीकार कर दिया जाता है जो आयशा टाकिया के परिवार को पसंद नहीं आता। इस जोड़े के दोस्त बनने की आकर्षक केमिस्ट्री बहुत रिफ्रेशिंग है। लड़के को उसकी गर्लफ्रैंड से शादी करने में मदद करने की कोशिश में लड़की को प्यार हो जाता है। बाद में लड़के को भी प्यार का अहसास होता है। इसके बाद दोनों परिवारों में विद्वेश हो जाता है, जो कभी उन दोनों की अरेंज मैरिज के लिए तैयार थे। टीवी धारावाहिक जैसी नाटकीयता इम्तियाज़ अली के कौशल में परिवर्तित हो गई है जो चरित्रों को सरल, मासूम और वास्तविक रखते हैं।

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  1. हम दिल दे चुके सनम

भंसाली का विशाल सेट इस बार विशालकाय नाटकीयता के सामने फीका पड़ गया, जो इस फिल्म की पटकथा है। नंदिनी, जो परंपरा और रीतिरिवाज़ों की पथप्रदर्शक है, एक क्रेज़ी छात्र समीर से प्यार कर बैठती है जो भारतीय शास्त्रीय संगीत की जटिलताओं को सीखने के लिए नंदिनी के पिता के पास आता है। प्यार ही सारी मुसीबतों की जड़ बनता है और उसकी वजह से समीर को हवेली से बाहर निकाल दिया जाता है। झूले वाला वह नाटकीय दृश्य, जिसमें नंदिनी द्वारा उनके रिश्ते के सभी कामुक विवरण बता दिए जाते हैं, उसके बाद उसकी अरेंज मैरिज की कहानी आती है। एक बार, उसे निंबुड़ा निंबुड़ा पर नृत्य करते हुए देखकर वनराज को उससे प्यार हो गया था। बैंक वकील वनराज नंदिनी के जीवन में अवांछित पति के रूप में आता है। फिर वनराज समीर को ढूंढने के लिए और उसका प्यार दिलवाने के लिए नंदिनी को इटली ले जाकर अपने पति होने का फर्ज निभाता है। उसके बाद काफी सस्पेंशन ऑफ डिसबिलीफ होता है और अंततः हम उस स्थान पर पहुंचते हैं जहां नदिनी को दो प्रेम कहानियों में से एक को चुनना होता है और वह वनराज को चुनती है। इतनी सारी नाटकीयता के बाद मैं थक चुकी थी, लेकिन कुछ लोग कहते हैं कि यह अरेंज मैरिज के सफल होने की कहानी थी। लेकिन मैं कुछ कह नहीं सकती।

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  1. तनु वेड्स मनु

यह मज़ेदार फिल्म है। कंगना रनौत की सशक्त तनु भारतीय सिनेमा की दुल्हनों की भीड़ में गुम होने वाला किरदार नहीं है। जब लड़के वाले देखने आ रहे थे, उस दिन तनु को हैंगओवर था, और इस फिल्म में रनौत हास्यास्पद रूप से उपद्रवी है। मासूम माधवन, रहना है तेरे दिल में वाला हमारा लवर बॉय, दूल्हा बन कर आता है। ज़ाहिर है तनु लंदन वाले उबाऊ डॉक्टर से शादी करने से इनकार कर देती है। अपने बॉयफ्रैंड के साथ उसकी बड़ी योजनाएं है जिसने दूल्हे के परिवार को पिटवा दिया था जब वे शुरू में कानपुर पहुंचे थे। तनु से प्यार करने के बावजूद मनु पीछे हट जाता है। वे दोनों एक दोस्त की शादी में दुबारा मिलते हैं और रोमांस खिलने लगता है। यह कोई घिसा पिटा रोमांस नहीं है बल्कि भावनाओं का एक अजीब और बेढंगा समूह है और यही चीज़ इन चरित्रों को बेहद वास्तविक बनाती है। मनु को तनु के क्रोधित एक्स बॉयफ्रैंड द्वारा मंडप में डराया जाता है, फिर भी वह बहादुरी के साथ तनु से शादी करने में कामयाब हो जाता है। मज़बूत पटकथा और कास्टिंग के अलावा, तनुजा त्रिवेदी उर्फ तनु की अद्वितीय और तीव्र स्पिरिट इस फिल्म को अतिरिक्त धार देती है।

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  1. रोजा

सबसे शुरूआती किशोरावस्था की यादों में से एक है टीवी से ‘‘दिल है छोटा सा…’’ सुनना और अगले कुछ घंटों के लिए टीवी से चिपक जाना। रहमान के संगीत से सजाई गई रोजा, मणिरत्नम के जादू से बनी है। ऋषि रोजा की बहन से शादी करने गांव जाता है जो उससे शादी करने से इन्कार कर देती है। पारंपरिक दबाव की वजह से, शादी तोड़ने के लिए पुरूष को ही इन्कार करना होता है। ऋषि इस बहाने के साथ इन्कार कर देता है कि वह रोजा से शादी करना चाहता है। मासूम लड़की बिना चेतावनी के एक पूरी तरह अनजान व्यक्ति से शादी कर लेती है। भद्दा गाना ‘‘शादी की रात क्या क्या हुआ” भारत के उच्च नैतिक मानकों को ध्यान में रखते हुए हमेशा से जिज्ञासा की चीज़ रहा है। शुरूआत में घबराई हुई रोजा को जल्द ही ऋषि से लगाव हो जाता है। खूबसूरत हिमालय की बांहों में जोड़े को एक दूसरे से प्यार हो जाता है। आतंकवाद और कश्मीर का संघर्ष जल्द ही इस रोमांस को उखाड़ फैंकता है। फिर रोजा अपने पति की तलाश करके विजय प्राप्त करती है। लेकिन रोजा के रोमांटिक गीत अमर हैं और हमें यदा कदा ही याद आता है कि यह एक अरेंज मैरिज की कहानी थी जो इन गीतों द्वारा सजाई गई थी।

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  1. शुभ मंगल सावधान

हाल ही की मेरी पसंदीदा फिल्म अरेंज विवाह के बारे में है। इस फिल्म की पटकथा में कोई बड़ी साजिश या बड़ी घटना नहीं है, बल्कि फिल्म सिर्फ अरैंज मैरिज के इर्द गिर्द घूमती है। तो इसमें नया क्या है? यह एक अरैंज मैरिज और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के बारे में है और इन सभी उथल पुथल के बीच में प्यार पनपता है। हाँ, ज़ाहिर है कि यह भी एक बड़ी परेशानी है। आयुष्मान खुराना और भूमि पेढ़नेकर दुल्हा और दुल्हन हैं जो दिल और जननांगों की जद्दोजहद से गुज़र रहे हैं। क्या यौन आनंद और जन्म देना प्यार से बढ़ कर है? जब जोड़े को प्यार होता है और वे अपनी यौन समस्याओं का हल ढूंढने का प्रयास करते हैं, तभी इसमें परिवार शामिल हो जाते हैं और कहर टूट पड़ता है। एक अज्ञात कॉलर दृश्य में प्रवेश करता है, बाद में पता चलता है कि वह दुल्हन का पिता है जो इस मामले से बहुत ज्यादा व्यथित हो गया है। सीमा भार्गव; जो बॉलीवुड की नई माँ हैं, दुल्हन की माँ के रूप में श्रेष्ठ प्रदर्शन करती हैं। पारिवारिक अहं के टकराव, यौन तनाव, तीक्ष्ण हास्य के बीच, अरेंज मैरिज में प्यार की कहानी स्वाभाविकता और अनौपचारिकता के साथ बताई गई है। फिल्म का सारांश बताने के लिए -‘‘इस दिल के लड्डू बंट गए”

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