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७ महिलाएं हमसे साझा करती हैं ससुराल की कुछ मीठी बातें

अक्सर फिल्में और धारावाहिक ससुराल की भयावह तस्वीर दर्शाते हैं मगर कुछ असली कहानियां उन तस्वीरों से कहीं अलग हैं. क्या सचमुच सास ससुर इतने खतरनाक होते हैं?
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अपने सास ससुर के साथ रहना पड़े तो कैसा होगा?

जब एक लड़की की शादी होती है और वो अपने पति के घर जाती है, वो न सिर्फ अपना घर छोड़ती है बल्कि अपनी ज़िन्दगी का एक बहुत बड़ा हिस्स्सा भी छोड़ कर आती है. यही कारण है की शादी से लड़कियां उत्साहित कम, और डरी और सहमी हुई ज़्यादा होती हैं. जब लड़की की शादी होती है तो उस एक पल में हज़ारों प्रश्न उसे घेर लेते हैं. क्या होगा अगर उनलोगों को मैं पसंद नहीं आई? क्या मुझे रोज़ साड़ी पहननी पड़ेगी? क्या मुझे वो नौकरी पर जाने देंगे? क्या मुझे रोज़ सबके लिए खाना बनाना होगा? कहीं मेरी सास और ननद मुझे कामवाली बाई की तरह तो नहीं समझेंगी? और ऐसी ही कई बातें उनके मन को घेर लेती हैं.

असल में हमारे टीवी पर आने वाले धारावाहिकों से सबके मन में ये बात घर कर चुकी है की जो भी लड़की शादी के बाद अपने सास ससुर के साथ रहती है, उसकी ज़िन्दगी प्रताड़ना से भरी होती है. मगर क्या सचमुच असल ज़िन्दगी में भी इतनी ही कड़वाहट है जितनी इन धारावाहिकों में दर्शाई जाती हैं. क्या दुनिया की सारी सासें अपनी बहुओं के साथ बदसलूकी ही करती हैं? क्या सच में ससुराल के सभी लोग इतने ख़राब होते हैं? सच पूछा जाये तो अगर आप बहुत ही बदकिस्मत नहीं हैं, तो ऐसा असली ज़िन्दगी में नहीं होता है. आप जिस इंसान से प्यार करते हैं और जिसेअपना जीवन साथी चुनते हैं, उसका घर आपके लिए नर्क का ही दूसरा रूप हो, ऐसा नहीं होता है.

ये परिवार वाले वही लोग हैं जिन्होंने तुम्हारे उस परफेक्ट जीवनसाथी की परवरिश कर उसे इतना “परफेक्ट” बनने में योगदान दिया है.

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आपको मेरी बातों पर विश्वास नहीं हो रहा? तो पढ़िए ये सात लड़कियों की सच्ची कहानियां जिनके ससुराल वालों ने आगे बढ़चढ़ कर अपनी नयी नवेली बहु की ज़िन्दगी आसान करने की हर मुमकिन कोशिश की.

1.   दिव्या की कहानी: उसकी ननद ने उससे टीशर्ट शेयर की.

“मेरी कहानी आपको शायद कोई ख़ास न लगे, मगर मेरे लिए वो बहुत ही ख़ास है. हम दोनों करीब पांच सालों से प्रेम करते थे और शादी की बात भर ही हमें उत्साह से भर देती थी. मगर मैं बुरी तरह से डरी हुई भी थी. जब तक हमने अपने परिवार वालों को इस बारे में नहीं बताया था, उन्हें तो भनक भी नहीं थी हमारे रिश्ते की. हमने उन्हें बताया की हम दोनों शादी करना चाहते है और फिर शुरू हुआ महीनो तक शादी की तैयारी का सिलसिला. खरीदारी, तैयारी, आदि में दौड़ते भागते ज़्यादा समय नहीं मिला शादी से डरने का. डर तो यक़ीनन था मगर रात को बस सोते समय मेरी नींद ख़राब करता था.अजीब अजीब ख्याल आते थे. क्या वो लोग मुझे पसंद करेंगे? अगर मैं उन्हें पसंद नहीं आई तो? क्या मैं उनके परिवार का हिस्सा बन पाऊँगी? वगैरह वगैरह.

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मगर बाद में समझ आया की मेरा सारा डर बेमानी था मैंने जब अपने ससुराल में पहला कदम रखा, तभी से सभी ने कोशिश शुरू कर दी मुझे हर तरह का आराम देने की. मैंने भारी भरकम साड़ी और गहने पहने थे. मेरी ननद अपनी टीशर्ट ले कर आई और मुझे पहनने को दे दी. फिर हम सब डिनर करने बैठ गए और सभी परिवारवालों ने पूरी कोशिश की मैं सहज हो जाऊ. वो बहुत ही प्यारी और सुनहरी याद है मेरे लिए.”

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2. रिद्धि की कहानी: मुझे घर सा खाना खिलाया

“मुझे शादी के बाद सिर्फ शहर ही नहीं बल्कि एक प्रदेश छोड़ना था. मेरे लिए सब कुछ बदल गया था और मुझे खुश करने के लिए सबने एक प्लानिंग की. मुझे ले कर एक ऐसे होटल गए जहाँ मेरे प्रदेश का पारम्परिक खाना मिलता था. मैंने बहुत ही मज़े से उस दिन डिनर किया. माँ के हाथ का खाना तो नहीं था मगर उनका ये रवैया दिल को छू गया.”

3.स्निग्धा की कहानी: मुझे सेटल होने के लिए समय दिया

“सुना है की आप किसी एक व्यक्ति से विवाह नहीं करते बल्कि उसके पूरे परिवार से करते हैं. अगर ये सच है तो मैं खुश हूँ की मैंने इस परिवार में शादी की, किसी दुसरे में नहीं. शादी के पहले मेरे पति ने कई बार मुझे कहा था की उसके परिवारवाले बहुत “कूल” हैं मगर कितने “कूल” हैं, इसका अंदाज़ा मुझे शादी के बाद ही हुआ. हमारी शादी के बाद, मुझे और मेरे पति को छोड़कर, सभी परिवार वालेएक छोटे से ट्रिप पर घर से दूर चले गए ताकि मैं इस नए घर में सेटल हो जाऊं. ये एक ऐसी बात है जो जब तक आपके साथ हो न, आप शायद उसकी अहमियत नहीं समझेंगे. उनके इस कदम का नतीजा ये था की छुट्टियां से जब परिवार वाले वापस आये, तो मैं पूरे घर से अच्छी तरह वाकिफ हो गयी थी और एक नए आत्मविश्वास के साथ उनका स्वागत करने को तैयार थी. वो अद्भुत था.”

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4. रुथ की कहानी: मेरे लिए माँ की दाल बनाई

“ये यूँ तो बहुत छोटी सी बात लगेगी मगर मेरे लिए इसका बहुत महत्त्व था. शादी की भागदौड़ और चिंता के कारण मैं जैसे ही ससुराल पहुंची, मेरी तबियत अचानक काफी ख़राब हो गई. मैं कुछ खा ही नहीं पा रही थी. तब मेरी सास ने मेरी माँ को फ़ोन कर मेरी सारीपसंदीदा व्यंजनों की विधि ली और वो मेरे लिए वो सब बनाने लगी. मैंने अब पहली बार दाल चखी तो मेरी आंखों में ऑंसू आ गए. वो दाल बिलकुल माँ के हाथ की दाल जैसी ही थी.”

5.मारिया की कहानी: मुझे मेरे सामानों के लिए जगह दी

“उन्होंने एक पूरी अलमारी मेरे लिए खाली कर के रखी थी ताकि मैं आराम से अपनी सारी चीज़ें उसमे रख सकूं. मैं ज़्यादा कुछ नहीं लाईथी इसलिए मुझे ज़्यादा जगह की ज़रुरत नहीं थी मगर उनके इस व्यवहार ने मुझे ख़ुशी से ओतप्रोत कर दिया.”

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6.निधि का कहानी: मेरे परिवार से मुझे मिलवाया

“मुझे शादी के बाद मुंबई से दिल्ली शिफ्ट होना पड़ा. मैं इससे पहले कभी अपने परिवार से इतनी दूर और इतने समय अलग नहीं रही थी और मैं उन्हें बहुत ज़्यादा मिस कर रही थी. तो मेरे ससुराल वालों में मुझे सरप्राइज दिया और मेरे माता पिता और बहन को दिल्ली से अचानक बुला लिया ताकि मैं उनसे मिल सकूं. मुझे खुश करने के लिए उनका ये कदम मैं कभी नहीं भूल सकती.”

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7.हीना की कहानी: मुझे उड़ने के लिए पंख दे दिए

” मेरे ससुरालवाले मुझे लगातार प्रोत्साहित करते थे की मैं अपने करियर पर ध्यान दूँ. शादी के कुछ दिनों पहले ही मैंने मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की थी और आगे क्या करना है, इस बारे में सोचने का मौका ही नहीं मिला था मुझे. वैसे भी मुझे लगा था की शादी हो जाने पर मुझे सब कुछ छोड़ कर घर परिवार ही देखना होगा. मगर शादी के बाद मेरे साथ ठीक इसकी विपरीत स्तिथि थी. मेरे ससुरालवाले मुझे बार बार प्रोत्साहित करते की मै अपने जीवन को व्यवस्थित करूँ और सोचूँ की मुझे क्या करना है. न सिर्फ ये, जब मैंने उन्हें बताया की शायद मुझे पीएचडी करने के लिए दुसरे शहर में जाना होगा, तब भी उन्होंने मेरा भरपूर साथ दिया. आज मेरे पास एक नौकरी है जो मुझे बहुत पसंद है और मेरा करियर एक अच्छी राह पर चल रहा है. मैं आज भी नहीं समझ पाती की किस तरह मैं उन लोगों का शुक्रिया  अदा करूँ। ”

अक्सर फिल्मों और टीवी पर शादी और ससुराल को लेकर जो दर्शाया जाता है वो बहुत खुशनुमा नहीं होता है. उसे देखकर तो लगता है की ससुराल पक्ष युद्ध में खड़ा आपका दुश्मन है और शा
दी एक लड़ाई है जो ज़िन्दगी भर चलती है. मगर असलियत ऐसी नहीं है. परिवार सिर्फ खून के रिश्ते से नहीं बनता, वो प्यार से बनता है और सींचा जाता है. और यकीन मानिये कई परिवार ऐसे है जहाँ न कहकहों की कमी है न प्यार की कंजूसी.

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