वो आहत करने वाली बातें जो हम प्यार में बोलते हैं

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जब हम प्यार में मतलबी होते हैं

प्रेम, सुनने में जितना मीठा लगता है, असल में बहुत सारे मीठे और खट्टेअनुभवों का मिश्रण होता है. जिस इंसान को आप सबसे ज़्यादा प्यार करते हैं, और जिसके पास आपको ख़ुशी देने की सबसे ज़्यादा शक्ति होती है, उसी इंसान के पास आपको दुनिया में सबसे ज़्यादा दुःख और तकलीफ देने की शक्ति होतीहै. दो लोग, जिनमे आपस में कोई प्यार न हो, एक दुसरे को बुरी और दुखदायी बातें कर सकते हैं, मगर जब एक प्रेमी दम्पति ऐसी हरकतें करते है तो आश्चर्य होता है.

1. मैं तुम्हे जैसे प्यार करती हूँ, वैसे ही नफरत भी

“अगर तुम हर महीने दो लाख रुपए नहीं कमा सकते, तो मुझसे तलाक के कागज़ात लेने के लिए तैयार हो जाओ,” जब सुशांत का बिज़नेस पूरी तरह से चौपट हो गया और वो आर्थिक तौर पर बिलकुल बेहाल हो गए, उसकी पत्नी ने कहा. सुशांत की पत्नी एक गृहणी थी और एक बहुत ही संपन्न परिवार की बेटी थी. आज सुशांत ने अपने नए बिज़नेस में अपने पैर अच्छे से जमा लिए है और दो लाख तो नहीं मगर उसका आधा तो ज़रूर पत्नी को देने में सक्षम है. जब मैंने सुशांत की पत्नी से पूछा की उसने इतनी कठोर धमकी क्यों दी थी और क्या वो सचमुच सुशांत की असफलता पर उसे छोड़ देती, तो उसने कहा, “वो मेरा प्यार है और इसलिए मुझे ये सब कहना पड़ा. अगर मैंने उसे इतनी बड़ी बात नहीं कही होती तो शायद वो कभी भी इतनी मेहनत नहीं करता. अपने मन में मुझे पता है की वो बहुत ही क्रूर बात थी मगर मैं उसे हमेशा ही कहती हूँ की मैं उससे उतनी ही नफरत करती हूँ जितना उससे प्यार.”

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मैं तुम्हे जैसे प्यार करती हूँ, वैसे ही नफरत भी

2. मैं अपनी पसंदीदा डिश बनाती हूँ और उसे पौष्टिक बताती हूँ

मेरे साथी को खाना बहुत पसंद है मगर उनकी अधिकांश पसंदीदा चीज़ें बहुत ही अपौष्टिक होती हैं. अब मैं जो करती हूँ उसे आप बहुत बुरा भी नहीं बोल सकते हैं. जब भी मैं घर पर अंकुरित करती हूँ , वो उसे खाने से साफ़ मन कर देता है. मगर जिस दिन मैं अंकुरित बनाती हूँ, उस दिन न तो उसे कुछ बाहर से आर्डर करने देती हूँ, और न ही कुछ और बनाती हूँ. एक और बात आपसे शेयर करना चाहती हूँ. मुझे उबले हुए अंकुरित दही के साथ बहुत पसंद है. कभी कभी सोचती हूँ की सच में ये मेरा प्यार ही है जिसके कारण मैं ऐसा करती हूँ या फिर मैं बस क्रूर हो रही हूँ और उसे भूखा रखती हूँ. शायद पाठक ही मुझे इस दुविधा से निकाल सकते हैं.

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3. उसके साथ समय बिताने के लिए उसे गहरी नींद से उठा देती हूँ

सोना किसे पसंद नहीं होता है? औसतन हम अपनी ज़िन्दगी का ३४ प्रतिशत समय सोते हुए ही निकाल देते हैं. अब मैं और मेरे पति भी इससे अलग नहीं हैं. वो UK की शिफ्ट पर काम करता है और मेरी ९ से ५ की नौकरी है. तो मेरे लिए तो सोना जल्दी और उठना जल्दी ही मेरी दिनचर्या है. मगर दुःख की बात तो ये है की मेरा साथी लेट से सोता है और देर तक सोता है. ये बात और है की मैं उसे सुबह ही उठा देती हूँ क्योंकि मुझे सुबह की पहली कॉफ़ी उसके साथ पीने की इच्छा होती है. अगर वो मेरे उठाने से नहीं उठता तो मैं घर में वैक्यूम क्लीनरका शोर कर करके उसे उठा देती हूँ. मुझे उसके लिए बुरा ज़रूर लगता है मगर मेरी भी तो मजबूरी है. पूरे दिन में सुबह के कुछ घंटे ही तो होते हैं जब हम बातें कर सकते हैं. अब वैक्यूम क्लीनर की आवाज़ से मेरे पति की नींद उड़ ही जाती है और उसकी अब जल्दी उठने की आदत भी होने लगी है. तो दुसरे दम्पतियों, ध्यान दें.

4. मैं उसका फ़ोन चेक करती हूँ

चाहे हम कितने भी करीबी रिश्ते में क्यों न हों, कुछ चीज़ें हमारी ज़िन्दगी में बहुत ही निजी होती हैं. जैसे जब आप वाशरूम में बैठ कर अपना फ़ोन चेक करते हो, वो पूरी तरह से आपका अपना समय है. आप इस समय किसी भी तरह या किसी की भी वजह से डिस्टर्ब नहीं होना चाहते हैं. हैं न? मैं अपने साथी को इतना प्यार करती हूँ की मुझे उसके बारे में सब कुछ जानने की उत्सुकता होती है. मुझे हमेशा जानना होता है की उसने किससे बातें करि, इंटरनेट पर क्या देखा या पढ़ा. कई बार ऐसा करते हुए मैंने उसे बहुत बुरा भी लगवाया है. उसे लगता है की मैं उस पर विश्वास नहीं करती मगर मुझे तो इस बात की लत है. पुरुष और स्त्री दोनों ही को एक दुसरे को प्यार के साथ साथ उनकी इज़्ज़त और विश्वास भी करना चाहिए. आप इस अनुभव से सीख ले सकते हैं और अपने साथी को दुःख देने से बचा सकते हैं.

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मैं उसका फ़ोन चेक करती हूँ

5.ज़िन्दगी बर्बाद होने के लिए उसे जिम्मेदार ठहराया

जब भी हम दोनों की लड़ाई होती है, वो मुझे हमेशा यही कहता है की “मेरी ज़िन्दगी बर्बाद कर दी तुमने”. शुरू में तो ये सुन कर मैं बहुत आहत हो जाती थी अगर अब पांच सालों के रिश्ते के बाद मुझे इसमें छुपा असली अर्थ समझ आ गया है. जब भी वो ये शिकायत करता है, असल में उसका मतलब होता है की मेरा साथी मेरे बिना अपनी ज़िन्दगी की कल्पना भी नहीं कर सकता. और जब भी हम दोनों की लड़ाई होती है, उसे लगता है की अब उसे ये सब पूरी ज़िन्दगी ऐसे ही झेलना पड़ेगा और वो मुझे ऐसे उलाहने देता है. पहले कुछ साल तो उसकी ये बात सुन कर मैं रोने लगती थी क्योंकि उसकी ज़िन्दगी बर्बाद करने का तो मैं सोच भी नहीं सकती थी. मगर अब मैं उसके पीछे के तात्पर्य को समझने लगी हूँ. मगर फिर भी कुछ लोगों के लिए ये एक बहुत ही आहत करने वाली बात हो सकती है.

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