आज की द्रौपदी… जिसने दो पुरुषों को एक साथ प्यार किया!

Saheli Mitra
Draupadi

महाभारत में मुझे हमेशा ही द्रौपदी सबसे प्रिय रही है. उसका उसके पतियों से अलग अलग समीकरण मुझे हमेशा प्रभावित करता रहा है.

अगर ये कानूनी तौर पर कबूल होता तो मैं एक से ज़्यादा पुरुषों से शादी कर लेती. मैं एक रोमांटिक हूँ और मैं प्यार को कभी ना नहीं कह सकती हूँ. हाँ मैं एक शादीशुदा महिला हूँ और समाज मुझसे ये अपेक्षा रखता है की मैं बहुत ही “चरित्रवान और सुशिल” हूँ मगर मैं ये नहीं मानती की एक स्त्री सिर्फ एक ही पुरुष से पूरी ज़िन्दगी प्यार नहीं कर सकती है. ये एक भ्रम है जो दुनिया भर के रोमांटिक कहानियों के चक्कर में हमारे दिमाग में भर गया है. ये बिलकुल नामुमकिन है की एक ही पुरुष सुन्दर, अमीर, ध्यान रखने वाला, समझदार और एक बहुत ही प्यार करने वाला परिवार का बेटा हो.

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ये भी मुश्किल है की एक भारतीय पति ये स्वीकार कर ले की उसकी पत्नी किसी और पुरुष को प्यार या महत्त्व दे रही है.

भारतीय समाज पुरुषों के विवाहेतर सम्बन्ध तो स्वीकार करता है मगर अगर एक स्त्री ये तय करती है की वो एक सामानांतर सम्बन्ध में रहेगी तो उसे तुरंत ही “बुरी या गिरी” हुई जैसी उपाधि दे दी जाती है. मैं दुसरे पुरुषों से अपने सम्बन्ध चाहे तो छुपा सकती थी मगर मैं अपने पति को धोखा देना नहीं चाहती। जब मैंने उसे बताया तो वो बहुत आहात हुआ क्योंकि उसे लगा की मुझे दुसरे पुरुष में दिलचस्पी इसलिए हुई क्योंकि वो मुझे संतुष्ट नहीं कर पा रहा है. उसने मुझसे ये तक पुछा की क्या मैं स्वीकार कर पाऊँगी अगर उसका कोई अफेयर हुआ तो.

वो बिलकुल अजनबियों की तरह बर्ताव करने लगा, मुझसे कुछ बातें नहीं करता, और बस हमारे बेटे के साथ ही समय बीतता. एक बार तो उसने मेरा ईमेल भी चेक किया। वो ये कर पाया क्योंकि मैं उसे अपने सारे पासवर्ड हमेशा बता देती हूँ और कुछ भी छुपाने की मुझे कभी कोई ज़रुरत नहीं महसूस हुई है. वो मेरे मेल की प्रिंटआउट ले कर मेरी माँ के पास भी गया. वो मेल मेरी कवितायेँ थीं जो मैंने उस दुसरे पुरुष को लिखी थीं. (माँ मेरी कविताओं को पढ़कर मेरी सृजनता से काफी प्रभावित भी हुई).

यूँ तो मेरे पति मुझसे काफी दुखी थे मगर वो कहीं न कहीं ये भी जानते थे की मेरा ये पुरुष मित्र मेरे मन के उस कोने की रिक्तता को भरने के लिए था जो मेरे पति ने कभी भरने की कोशिश भी नहीं की.

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मैंने अपने मन की उस रिक्तता की बातें अक्सर अपने पति से भी की थी और ये भी कहा था की काश वो उस खालीपन को भर पाते. मगर उसका काम, उसके परिवार के प्रति उसकी ज़िम्मेदारियाँ आदि उसे काफी व्यस्त रखती थीं और जो “हमारा” समय मैं तलाश करती थी, वो अक्सर बस फिल्में देखने, बाहर खाना खाने आदि जैसे कामों में ही निकल जाता था. तो मेरे अंतर्मन का वो रोमांस से भीगने को तत्पर कोना सूखा सा ही रह जाता था. जब मैंने उस दुसरे पुरुष से सम्बन्ध जोड़ा, मुझे एक पल को भी ऐसा नहीं लगा की मैं कुछ गलत कर रही हूँ. उस दुसरे पुरुष का भी एक परिवार था और उसे काम के सिलसिले में उनलोगों से अलग रहना पड़ता था. वो मेरे लिए पुरुषों का चरम था-हैंडसम, केयरिंग, एक अच्छा पिता और मुझे और मेरे परिवार को इज़्ज़त देने वाला.

मगर इस खुलासे के बाद मेरी सेक्स लाइफ अचानक से बिलकुल जी उठी. नहीं नहीं वो दुसरे पुरुष के साथ नहीं. वो दुसरे शहर में रहता था और इसलिए हमारा शारीरिक मिलाप होना काफी कम था. मेरे पति के साथ मेरे सेक्स के पल अचानक बहुत गर्म हो गए थे. मैं समझ गई की वो मुझे यहाँ जीतने की कोशिश में लगे हैं. हो सकता है की वो असुरक्षित महसूस कर रहे हो और डर रहे हों की शायद मैं उन्हें छोड़ दूँगी इसलिए वो यहाँ सब कुछ कर रहे थे. मैं समझ रही थी की वो क्या सोच रहा है. आखिर हम दोनों स्कूल के दिनों से ही तो साथ बड़े हुए हैं. वो बिलकुल ही नार्मल था की मेरा पति सेक्स को मेरी रिक्तता का कारण समझ रहा था और गहराई में बातें समझने की चेष्टा ही नहीं कर रहा था. वो नहीं समझ पा रहा था की मैं औरों से अलग थी और मैं सेक्स, धन, ज़ेवर जैसी चीज़ों से असंतुष्ट नहीं थी. मुझे एक ऐसी जगह की तलाश थी जहाँ मैं अपने भावनाओं को व्यक्त कर सकूं वो भावनाएं जो मैं अपने पति के साथ कभी साझा नहीं कर पाती.

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तो मैंने ये तय किया की इन दोनों पुरुषों को एक दुसरे से मिलना होगा. आखिर क्यों नहीं, दोनों ही तो एक ही स्त्री से प्रेम करते थे. मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की दोनों को एक दुसरे का साथ इतना पसंद आएगा. मेरे पति उस दुसरे पुरुष से मिल कर इतने खुश और संतुष्ट दिखे. धीरे धीरे बात समझ आने लगी की प्यार एक ही दिशा में चले ये ज़रूरी नहीं होता है. मेरे लिए ये एक बहुत ही सहज और प्राकृतिक अभिव्यक्ति है. मेरे जीवन के दोनों ही पुरुष आज सबसे अच्छे दोस्त हैं और एक दुसरे के लिए दोनों ही के मन में अथाह आदरभाव है.

मेरे कई महिला मित्रों को लगा था की मुझे ओपन सेक्स में दिलचस्पी है और पुरुषों ने ये मान लिया था की मैं अब अवेलेबल हूँ.

जब भी हम दोस्तों की मंडली जमती है और बात प्यार और शादी की होती है, मैंने हमेशा ये सच सबको बताया है की अपने पति के अलावा मुझे कम से कम एक और पुरुष से प्यार हुआ है. अगर ज़रुरत हुई तो शायद किसी और से भी प्रेम कर बैठूंगी. मुझे मालूम है की मेरी कुछ मित्रों के विवाहेतर सम्बन्ध रहे हैं और उन्होंने उसके बारे में अपने पतियों को कुछ नहीं बताया है. या तो भी मेरा मैं पागल हूँ या फिर मेरे पति बहुत ही सीधे साधे है जिसने मुझे दुसरे पुरुष से प्यार करने की इजाज़त दे दी. मुझे कुछ लोगों ने पुछा है की क्या में एक ओपन रिलेशन में हूँ और कुछ ने तो मुझे प्रोपोज़ भी किया है.

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मैं “कभी अलविदा न कहना” जैसा अलगाव में विश्वास नहीं रखती और न ही सेक्स और प्यार को मिक्स करना चाहती हूँ. जब सोचती हूँ तो समझ आता है की हमारा समाज प्रेम के पीछे नहीं, बल्कि सेक्स के पीछे भाग रहा है. मैं खुशकिस्मत हूँ की मेरे पति और दूसरे पुरुष, दोनों ही मुझे प्यार करते हैं और मेरे लिए सबसे अच्छा ही सोचते हैं. शायद यही वजह है की आज तक दोनों ही रिश्ते अब तक बरकरार हैं. मगर क्या हो अगर उस फिल्म की तरह मुझे अपने पति और बच्चे को छोड़ कर उस दुसरे पुरुष के पास जाने की इच्छा होने लगे? मेरे ख्याल से वो ज़रूरी नहीं होगा क्योंकि एक इंसान एक रिश्ते में रहते हुए भी किसी और से प्रेम कर सकता है. हाँ मगर वो प्रेम होना चाहिए, ज़रुरत नहीं.

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