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आपका यौन व्यवहार किस प्रकार आपके बच्चे को प्रभावित करता है – यह उन्हें परेशानी में डाल सकता है!

माता-पिता अपने बच्चों के सामने एक दूसरे के साथ किस प्रकार कामुक या स्नेहपूर्ण बर्ताव करते हैं, इसका उनके विकसित होने पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ सकता है
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Dr.Rajan-Bhonsle-2प्रो. राजन भोंसले, एम.डी.

माननीय प्राध्यापक और यौन चिकित्सा विभाग के प्रमुख, केईएम अस्पताल और सेठ जीएस मेडिकल कॉलेज, मुंबई, डिप्लोमेट, अमेरिकन बोर्ड ऑफ सेक्सोलॉजी एंड अमेरिकन कॉलेज ऑफ सेक्सोलॉजिस्ट (इंडिया टीवी के अनुसार भारत के टॉप सेक्सोलॉजिस्ट, प्रोफेसर राजन भोंसले ने भारत के प्रमुख प्रकाशनों जैसे इंडिया टुडे, टाइम्स ऑफ इंडिया, डीएनए, हिन्दुस्तान टाइम्स, एशियन एज, मुंबई मिरर, मिड-डे, दी आफ्टरनून, फेमिना, कॉस्मोपॉलिटन, लाइफ पॉजिटिव, न्यू वुमन, सेवी, मेन्स वर्ड आदि के लिए 1200 से ज़्यादा आर्टिकल्स लिखे हैं)

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सुजीत कुमार के पिता हमेशा इस बारे में बात करते थे कि किस प्रकार कुमार परिवार के सारे मर्दों को एक इशारे पर महिलाएं उपलब्ध हो जाती थीं। उनके मज़ाक अश्लील होते थे और वे 9 वर्षीय सुजीत से स्पष्ट रूप से स्त्री की शारीरिक रचना के बारे में बात करते थे और सुजीत से कक्षा की हर लड़की के बारे में पुछते थे कि, ‘क्या वह तुम्हारी गर्लफ्रेंड है?’ एक दिन अतिसंवेदनशील सुजीत ने अपनी कक्षा की एक लड़की को अनुपयुक्त तरह से स्पर्श कर दिया, यह सोचकर कि ऐसा करने में कोई बुराई नहीं है, और उसे स्कूल के अधिकारियों द्वारा पकड़ लिया गया। ये मिश्र संकेत सुजीत के लिए एक झटका थे -जिसके लिए उसके पिता ने उसे प्रोत्साहित किया, उसके लिए उसके शिक्षकों ने शर्मिंदा किया। इस आंतरिक द्वंद्व के परिणाम के रूप में उसमें दुष्चिंता विकार विकसित हो गया और वह वर्षों तक अपर्याप्तता की भावनाओं से जूझता रहा। वह अपने पिता की बात, को सच करने के लिए इसमें अनिवार्य रूप से संलिप्त रहा कि कुमार पुरूषों को अपने यौन कार्यों के ईतिहास पर
गर्व है।

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कुछ बच्चे अपने माता-पिता के साथ सोते हैं। ऐसी परिस्थितियों में कामुक चर्चा या कार्यां में शामिल होने से पहले यह सुनिश्चित करना महत्त्वपूर्ण है कि बच्चा सोया है या नहीं।

करिश्मा के माता-पिता ने उसी बेडरूम में कामुक चर्चा या गतिविधी में शामिल होने ये पहले यह देखना कभी ज़रूरी नहीं समझा कि उनकी बेटी सो रही है या जाग रही है। उसकी माँ कई बार बगैर वस्त्रों के बाथरूम से बाहर निकलती थी और 6 वर्षीय करिश्मा ने कई बार अपने पिता को अपनी मनोहर माँ को प्यार करते, उसके वक्षों पर टिप्पणी करते हुए देखा जिसे देखकर वह चिंतित हो गई और उलझन में पड़ गई क्योंकि ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उसकी माँ दर्द में है लेकिन साथ ही वह रूक-रूक कर खिलखिला भी उठती थी।

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इसके कारण किशोरावस्था में पहुँचने पर करिश्मा में एक जटिल मानसिकता उत्पन्न हो गई। उसकी उम्र के कारण स्वाभाविक रूप से उसके वक्ष छोटे थे और इसलिए वह स्वयं के शरीर की अपनी माता के नग्न शरीर से निरंतर तुलना करते हुए अपने आप को कमतर महसूस करती थी और अपर्याप्त मानती थी। इसके अलावा, उसके माता-पिता के बीच यौन चर्चा के ऑडियो-वीडियो के प्रबल प्रभाव के कारण वह सेक्स में आनंद के तत्व के विषय में उलझन में पड़ गई थी, और उसे अपने यौन साथी के साथ पूरी तरह लिप्त होने मे कठिनाई महसूस हुई और इसलिए वह चरमोत्कर्ष (ऑर्गेज़म) तक नहीं पहुँच सकी।

इन दोनों मामलों में, हम देख सकते हैं कि किस प्रकार वयस्क यौन व्यवहार देखने के कारण उनके किशोर और वयस्क जीवन पर प्रतिकूल असर पड़ा जिसने उनके दृष्टिकोण और व्यवहार को प्रभावित किया। इस प्रभाव को युवा और अतिसंवेदनशील मनों पर अश्लील साहित्य के प्रभाव के बराबर माना जा सकता है। यह उन्हें भ्रमित कर देता है, क्योंकि उन्होंने जो देख और सुना, वे उसे समझ नहीं पाते जिसके फलस्वरूप विकृत धारणाएं, असंतुलित मूल्य, अस्वस्थ धारणाएं, हानिकारक रूख और विकृत व्यवहार उत्पन्न होते हैं।

यह यौन शोषण का मामला है

जब वयस्क लोग किशोर मन के सामने कामुक व्यवहार का प्रदर्शन करते हैं, तो वे यौन शोषण में संलगन हैं। बच्चे के दिमाग के इस संवेदी यौन शोषण को आम तौर पर यौन शोषण के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जाता है, लेकिन यह नुकसान उतना ही गंभीर है जितना कि बच्चे को शारीरिक रूप से यौन शोषण करने पर हुआ हो और प्रभाव उतने ही विनाशकारी और लंबे समय तक टिकने वाले होते हैं।

वयस्क यौन व्यवहार को देखना बच्चे में एक उत्तेजना उत्पन्न कर सकता है, इससे पहले कि वह स्वस्थ रूप से ऐसी भावनाओं को समझने के लिए तैयार हो। इसलिए यह प्रकृति के समय के साथ छेड़छाड़ है और प्राकृतिक रूप से बढ़ती प्रक्रिया के साथ हस्तक्षेप है।

एक युवा वयस्क के लिए, वयस्क यौन व्यवहार को देखना उनके बढ़ने में हस्तक्षेप नहीं कर सकता लेकिन उत्तेजन के परिणामस्वरूप वे उत्तेजना के एक असहनीय स्तर तक पहुँच सकते हैं, जिससे उनकी यौन गतिविधियाँ जल्दी उत्पन्न हो सकती हैं। इसकी अपनी ही समस्याएं हैं जैसे कि किशोरावस्था में गर्भधारण और यौन संचारित रोग, साथ ही यह युवा अनुभवहीन किशोर को मनोवैज्ञानिक रूप से अस्थिर कर सकता है।

मौखिक रूप से भी, बच्चों के सामने बातचीत के दौरान यौन अभिरूचि का प्रयोग, कामुक चुटकुले, और यौन व्यवहार के विवरण से बचना चाहिए। साथ ही, कामुक आवाज़ों वाले स्पर्श को बच्चों की नज़रों से दूर, केवल बेडरूम या अधिक निजी जगह तक सीमित रखा जाना चाहिए।

स्थायी प्रभाव

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अपने साथी से अंतरंग होने से पहले देखिए कि कमरे में और कौन मौजूद है।

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अरमान की बड़ी बहन की सगाई हो चुकी थी, और युवा जोड़ा अक्सर एक दूसरे को चुंबन और आलिंगन दिया करते थे, और एक दूसरे को अंतरंगता के साथ स्पर्श करते थे। अरमान की उपस्थिति में। अरमान, जो 16 साल का था, उत्तेजित हो जाया करता था, और वह हस्तमैथुन से संतुष्ट नहीं था। वह एक स्त्री के स्पर्श के लिए तरसने लगा था, तो एक बार जब वह साप्ताहंत के लिए घर पर अकेला था, तब उसने एक कॉल गर्ल को घर पर बुला लिया और उन्होंने असुरक्षित सेक्स किया। वह
एचआईवी + थी, जो उसे एक साल बाद पता चला जब उसे रोग प्रतिरोधक क्षमता से संबंधित विकार उत्पन्न हो गए। कुछ वर्षों बाद उसे पूर्ण विकसित एड्स हो गया और अपने 20वें दशक में उसकी मृत्यू हो गई।

हालांकि, यहाँ यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि यदि कोई बच्चा विपरीत लिंग के दो वयस्कों को स्नेही और देखभाल की भावनाएं जैसे की प्रशंसा, आभार, सराहना, प्रोत्साहन की अभीव्यक्ति, और अन्य प्रकार के आरामदायक शब्द व्यक्त करते हुए देखता है, चाहे वे उसके माता-पिता हों या कोई और, वह भावनात्मक घनिष्ठता भी सीखता है। इसके अलावा, बच्चे के लिए यह भी उतना ही फायदेमंद होगा अगर वह माफी मांगना, माफ करना देखे क्योंकि यह संबंधों में प्यार और नम्रता निर्मित करता है। इसके अलावा, हाथ थामना, साथी के कंधे पर सर रखना, कंधे पर हाथ रखना, एक हल्के से स्नेह भरे आलिंगन जैसे गैर कामुक स्पर्श ना केवल हानिरहित हैं बल्कि एक स्वस्थ और भावनात्मक रूप से घनिष्ठ स्त्री-पुरूष संबंधों का एक आदर्श भी बनते हैं। जब बच्चे अपने माता-पिता को इस तरह प्रेम करते हुए देखते हैं, तो उन्हें पता चलता है कि उनके बीच सब ठीक चल रहा है और वे सुरक्षित महसूस करते हैं।

अपने ही हाथों में

सात वर्षीय स्वाति अपने माता-पिता के बीच हुए झगड़े को देखने के बाद उन्हें साथ बैठकर हाथ पकड़ने पर मजबूर कर देती थी। कुछ समय बाद, माता-पिता को एहसास हुआ कि उनकी बहस स्वाति को परिवार के मध्य सब ठीक होने के बारे में असुरक्षित महसूस करवा रही थी यही कारण था कि वह उन्हें साथ बैठने के लिए ज़बरदस्ती करती थी। यदि बच्चों के सामने मतभेद व्यक्त किए जाते हैं, जो बहस के रूप में उनके सामने आते हैं, तो यह अभिभावकों की महत्त्वपूर्ण ज़िम्मेदारी है कि बच्चों के सामने पुनः शांति कायम करें, और शब्दों तथा एक दूसरे के मध्य गैर कामुक कृत्यों के माध्यम से यह अभिव्यक्त करें, उन्हें यह बताने के लिए कि सब ठीक है।

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बारह वर्षीय जेसन अपने माता-पिता के बीच स्थिति के विषय में चिंतित था, क्योंकि तेज़ आवाज़ों के बीच उसने अपनी माँ को ‘वह स्त्री’ कहते हुए और अपने पिता को ‘मैं तुम्हारी चिड़चिड़ से परेशान हो चुका हूँ’ कहते सुना था। वह हमेशा तिरछी नज़रों से देखता रहता था कि वे एक-दूसरे से कितनी पास या दूर बैठे हैं, या उसके पिता बेडरूम में सो रहे हैं या सोफे पर और जब वे हाथ पकड़ते थे तब वह राहत की सांस लेता था। छुट्टियों में उसने पारिवारिक फोटोग्राफर बनने का फैसला किया और अपने
माता-पिता को कैमरे के लिए पोज़ करने को कहा, वह उन्हें कई स्नेहमय पोज़ करने का निर्देश दे रहा था जैसे कि माता के कंधे पर पिता का हाथ, वह उन्हें एक दूसरे से सटकर बैठने और मुस्कुराहट के साथ एक दूसरे को देखने का निर्देश दे रहा था और यहाँ तक कि उसने फोटो के लिए अपने पिता को अपनी माँ के गाल पर चुंबन देने का भी कहा।

सतर्क रहें, जागरूक रहें

कामुक और गैर-कामुक किंतु स्नेही व्यवहार के बीच एक स्पष्ट सीमा है जहाँ पहले वाली हानिकारक है, वहीं दूसरी वाली उपयोगी है। इसलिए, वयस्कों को सचेत होना चाहिए और दोनों के प्रभावों से अवगत होना चाहिए और बच्चों के सामने एक दूसरे के साथ बात करते समय ज़िम्मेदार व्यवहार करना चाहिए।

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