हम दम्पति तो नहीं है, मगर माता पिता अब भी हैं

Janani Rajagopalan
Parenting after divorce is not easy. Couples have to put up an united front.

(जैसा जननी राजगोपालन को बताया गया)

कोई भी ये सोच कर शादी नहीं करता की एक समय आएगा जब उनका तलाक हो जायेगा. मगर फिर भी तलाक होते हैं और ये एक बहुत ही दुखपूर्ण अनुभव होता है. और अगर ऐसे टूटते रिश्ते में बच्चे भी सम्मलित होते हैं, तो हालात और बदतर हो जाते हैं क्योंकि वो आपके टूटते रिश्ते से बाहर होते हैं और उन्हें समझ नहीं आता की आखिर ये सब क्यों हो रहा है. बच्चे अक्सर ऐसे मौकों पर दिशाहीन हो जाते हैं क्योंकि उनकी खुशहाल ज़िन्दगी एक पल में बिखर जाती है.

मैं स्मिता हूँ, एक तलाकशुदा स्त्री और दो बच्चों की माँ. मेरी माँ हमेशा कहती हैं की एक चोर भी अपने बच्चों के लिए भला ही चाहता है. मैं कोई चोर नहीं हूँ, और मैं अलग भी नहीं हूँ. जब मेरी शादी विफल होने लगी, तो मैं भी टूटने लगी. मगर मुझे काफी पहले से अंदेशा था की ये होने वाला है. तलाक जैसी घटना आपकी ज़िन्दगी में रातोरात नहीं घटती है. आप कुछ हानि को बचाना चाहते हो। मैंने भी कोशिश की मगर नाकाम रही.

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सिर्फ इसलिए क्योंकि हमदोनो का तलाक हो गया, मैं ऐसा नहीं कह सकती की वो अच्छे इंसान या अच्छे पिता नहीं हैं. मैं ये बात अपने बच्चों को भी समझाना चाहती थी. जब तलाक की लम्बी कार्यवाही चल रही थी, मैंने अपने पति से इस बारे में बात की और हमने तय किया की जहाँ तक हो सकेगा हम बच्चों को तलाक के दुष्परिणाम से बचाएंगे. वो भी तो पिता हैं और वो भी इस कर्त्तव्य का पालन करना चाहते हैं. उन्होंने भी तुरंत इसकी हामी दे दी.

मैंने इस बात का ध्यान रखा की बच्चों के सामने मैं कभी उनके पिता के लिए कोई अपशब्द न कहूँ और न ही कोई शिकायत करूँ. जब भी हम मिलते हैं और बच्चे अपने पिता के साथ समय बिताते हैं, हम पूरी कोशिश करते हैं की हम शालीन और एक दुसरे के प्रति स्नेहपूर्ण रहे. बच्चे स्पंज की तरह होते हैं और अपने आस पास के वातावरण को अपने अंदर सोखते जाते हैं.

हाँ कभी कभी वो ऐसे मुश्किल सवाल भी पूछ लेते हैं, जिनका जवाब मुझे नहीं मालूम होता है. जैसे मेरी बेटी अक्सर पूछती है, “क्या वो हमें अब प्यार नहीं करते?” या फिर “क्या मैंने कुछ गलत किया?” या फिर “हम सब एक साथ क्यों नहीं रह सकते?”. उनके माता पिता होने के नाते हम हर मौके पर उन्हें बताते हैं की हम दोनों ही उनसे कितना प्यार करते हैं और उनकी हमारी ज़िंदगिओं में कितनी महत्ता है. हम उनसे लगभग हर विषय पर लम्बी बातें करते हैं

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मगर सब कुछ हर बार इतना सहज नहीं होता है. कई बार घर में विद्रोह भी होने लगा है और वो सिर्फ इसलिए नहीं क्योंकि घर में वो टीनएजर्स हैं, बल्कि इसलिए क्योंकि उनके माता पिता तलाकशुदा हैं. कभी कभी तो मुझे शक होता है की कहीं वो इस व्यथा को अपने हित में इस्तेमाल तो नहीं कर रहे. सच में उनके मन की वेदना ही है. मेरे मित्र मुझे अक्सर कहते हैं की इस उम्र में उनका ये बर्ताव एक आम बात है और मुझे अधिक परेशां नहीं होना चाहिए. बस अंतर इतना ही है की मेरे जीवन में साथी की कमी है जो मुझे सहारा दे और सही रास्ता बताये बच्चों को सही तरीके से समझने और समझाने का.

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मैं हालाँकि एक बात का हमेशा ख्याल रखती हूँ. जब भी घर में विद्रोह किसी गंभीर विषय पर होता है, मैं हमेशा बच्चों के पिता को सारी घटना से अवगत करा देती हूँ. हम दोनों सलाह मशवरा करते हैं और फिर एक फैसले पर पहुंचते हैं, फिर चाहे वो बच्चों के पक्ष में हो या नहीं.

जब दोनों अभिवावक अलग अलग बातें कहते हैं,बच्चे अक्सर कंफ्यूज हो जाते हैं और उस स्तिथि तो तोड़मरोड़ कर अपने हित में घुमा लेते हैं, फिर चाहे उनके माता पिता साथ रहते हों या फिर अलग.

मेरे रिश्ते में इनके ठोकर खा कर भी मैं नाउम्मीद नहीं हूँ. मुझे पूरा विश्वास है की मेरी ज़िन्दगी में भी कोई तो ऐसा आएगा जो मुझे ऐसे ही स्वीकार करेगा और मुझे समझेगा. कोई होगा जो मेरे साथ साथ मेरे बच्चों को भी प्यार करेगा, मैं ये नहीं अपेक्षा करती हूँ की वो उन्हें अपने बच्चों की तरह ही प्यार करे, मगर हाँ उन्हें उनकी अच्छी के लिए माने और प्यार करे.

(जैसा जननी राजगोपालन को बताया गया)

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