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अभी जब मैं माँ को खोने के गम से उबर रही हूँ, तुम क्या मेरा इंतज़ार करोगे?

अपनी माँ की मौत के बाद, जब शहनाज़ खान अवसाद में डूबी है, तब वो अपने प्रेमी को ये पत्र लिखती हैंऔर उनसे खुद को समेटने के लिए समय मांगती है.

प्रिय,

कल मैंने अपनी माँ को खो दिया. उन्होंने कैंसर से एक लम्बी दर्दनाक लड़ाई लड़ी मगर फिर कल वो चल बसीं और पीछे रह गई उनकी चार बेटियां। मगर वो हारी नहीं थी. वो लड़ते हुए ही गई. और उनकी इस निरंतर चलती लड़ाई में मैं उनके साथ ही थी. हॉस्पिटल के अनगिनत चक्कर और हर बार और मुश्किल हालात. मैंने पढ़ाई और काम दोनों ही छोड़ दिया इस आस में की एक दिन सब ठीक हो जाएगा. मेरे इन सभी मुश्किल पलों में तुम हमेशा मेरे साथ थे. जब मैंने शहर बदले, तुम मेरे साथ थे, जब मैं अपनी बहनों का ध्यान नहीं रख सकती थी, तब भी तुमने उन्हें सहारा दिया, तुम अक्सर सब कुछ छोड़ कर हमारे साथ वक़्त बेवक़्त हॉस्पिटल जायाकरते थे. तुमने अब तक जो कुछ किया, उसके लिए मेरे पास पर्याप्त शब्द नहीं आभार प्रकट करने के लिए.

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हम दस सालों से एक दुसरे को जानते हैं और उन दस सालों में आठ साल तो मेरी ज़िन्दगी बहुत ही मुश्किल ही गुज़री है. मगर फिर भी तुमने सब कुछ जितना हो सका, सहज करने की भरकस कोशिश ही की है. कभी एक सिंपल सा ” आई लव यू” कह कर या फिर “मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ” जताकर. कभी अचानक से एक मील साथ कर के या हॉस्पिटल की कैंटीन से एक फ़ोन कॉल कर के. तुमने मुझे हमेशा डूबने से बचाया है. नहीं, नहीं, तुम कोई पतवार,तुम तो एक शांत किनारा जैसे हो, जो एक थके तैराक को स्वर्ग सा लगता हो. जहाँ एक तरफ हमारे आस पास सभी शादी कर अपनी ज़िंदगियाँ बसाने में लगे थे, तुमने मेरे साथ मेरी जीवन की नाव को डूबने से बचने में लग्न रहे. हमेशा तुमने कहे अनकहे ये वादा निभाया की किसी भी तूफ़ान में मुझे अकेला नहीं छोड़ोगे. हम दोनों ने अपने सपनो को कहीं ताक पर रख दिया और इंतज़ार करते रहे की यह तूफ़ान थमे तो आगे बढ़ें.

और अब माँ चली गई हैं. वो एक कारण जिसके लिए मैं एक बेहतर इंसान बनना चाहती थी, अब वो नहीं हैं. मुझे पता है की वो अब किसी दर्द में नहीं हैं. मगर मैं उन्हें मिस करती हूँ और मुझे पता है की मैं उन्हें मिस करती रहूंगी. इस समय ऐसा लगता है मानो मेरी पूरी दुनिया बिखर कर मेरे पैरों में पड़ी है और किसी चीज़ का कोई महत्त्व नहीं नहीं. मैं जानती हूँ की तुम मेरे पास रहना चाहते हो. तुम मेरा हाथ पकड़ मुझे अपने कंधे पर रोने देना चाहते हो. शायद मैं ऐसा करूँ भी. मगर अभी नहीं.

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क्योंकि इस समय मुझे खुद को समेटना है और जो टूटा है उसे जोड़ना है. और मुझे ये सब अकेले ही करना है. शायद मैं तुमसे कई दिनों तक बातें न करूँ. मैं शायद तुम्हारे चुटकुलों पर न हँसूँ और न ही तुम्हारी मुश्किलों के बारे में तुमसे कुछ पूछों. शायद तुम चाहोगे की मैं तुमसे बातें करूँ और अपना मन हल्का करूँ मगर हो सकता है की मैं कमरे में खुद को बंद कर घंटो रोना पसंद करूँ. शुरू शुरू में तुम मेरी मनःस्तिथि समझोगे. मैं तुम्हे कोई टाइम और दिन नहीं बता सकती जब मैं अपने इस दुःख औरअवसाद से बाहर निकलूंगी. तो हो सकता है की धीरे धीरे तुम भी अपना संयम खोने लगो. पहले मेरे साथ और फिर धीरे धीरे खुद से भी नाराज़ हो जाओ क्योंकि तुम मेरी मदद नहीं कर पा रहे हो. शायद तुम्हे बहुत बुरा लगे की इस हालात से तुम मुझे उबार नहीं पा रहे हो.

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‘मैं समय लूंगी. ‘ Image Source

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मैं तुमसे भी बहुत नाराज़ होऊँगी. शायद हमारे रिश्ते को और भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़े. शायद हमारे रिश्ते तक पर मैं प्रश्नचिन्ह लगा दू. क्या ये सब सही होगा? बिलकुल नहीं है. मगर क्या सही और क्या गलत जब ज़िन्दगी आपको ऐसे अवसाद से घेर ले. मेरा विश्वास मुझ पर से खुद ही उठ गया है और शायद इसलिए मैं अब रिश्ते को अविश्वास से देखूं. शायद कभी कभी तुम्हे देखकर मुझे वो बातें याद आ जाएँ जिनसे मैं भागना चाह रही हूँ. उस समय तुम्हारा मदद के लिए बढ़ाया हाथ भी मुझे गलत लग सकता है.

दिन हफ़्तों में, और हफ्ते महीने में बदल सकते हैं. हो सकता है की ये हमारी दोस्ती बस परछाई रह जाए दो लोगों की जो कभी बहुत करीब थे. फिर क्या हम अपने प्यार को खोने दें? क्या हमने अपने परिवारों से इसलिए संघर्ष किया था ताकि आगे जाकर हम अपनी एक अंदरूनी लड़ाई के कारण सब कुछ खो दें. नहीं प्रिय, ये हमारा द्वन्द है. किसी फिल्म का क्लाइमेक्स नहीं जिसमे हम एक साथ दुनिया से लड़ते हैं. ये तो पिघलता माँ सा है, जो आंसुओं सा आँखों से निकल रहा है.

मगर मुझे उम्मीद है की ये हमारे लिए अंत नहीं बल्कि नई शुरुवात हैं. मगर अभी तो मैं खुद ही मोमबत्ती की इस लॉ को पकड़ने की कोशिश में लगी हूँ. मुझे पता है की मैं तुमसे बहुत ज़्यादा मांग रही हूँ. कोई भी इंसान किसी भी रिश्ते में एक सीमा तक ही तो दे सकता है. कुछ वर्ष बीतते बीतते शायद सब ठीक हो जायेगा और हमारा प्यार इन सब मुश्किलों को पार कर फिर से गहरा हो जायेगा. वैसे भी प्यार को किसी अग्निपरीक्षा की ज़रुरत नहीं होनी चाहिए.

तुमने तो यूँ भी इस रिश्ते में बहुत कुछ दिया है, बिना किसी मांग या उम्मीद के. फिर भी मैं तुमसे और मांग रही हूँ. मैं तुमसे मांग रही हूँ की तुम मुझे सुकून देने वाले सहारे नहीं बनो बल्कि एक मज़बूत दीवार बन जाओ |

मैं शायद हमेशा तुम्हे मदद के लिए नहीं ढूंढूंगी. कई बार तो शायद तुम्हारी उपस्तिथि भी नज़रअंदाज़ कर दूँ. मगर मुझे पता होगा की तुम वहीं कहीं हो हमेशा मुझे गिरने से बचने के लिए. और तुम मुझे अकेले इस दुनिया का सामना करने के लिए नहीं छोड़ोगे.

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तुम सक्रिय तौर पर मेरी मदद करना चाहते हो. तुम चाहते हो की तुम मेरी मदद करो जब मैं अपनी ज़िन्दगी के बिखरे टुकड़े समेत रही हूँ. मगर मैं चाहती हूँ की तुम बस रहो और तुम्हारी उपस्थिति बिलकुल धुंधली सी कही दूर हो. इस समय मुझे अकेले ही रोने दो, समझने दो की मैं कौन हूँ और क्या बनना चाहती हूँ. इसका ये मतलब बिलकुल नहीं की तुम मेरी ज़िन्दगी का हिस्सा नहीं हो या मैं हमारे इस रिश्ते के बारे में कुछ नहीं सोच रही। तूफ़ान एक झटके में सब अस्त व्यस्त कर के चला गया मगर मुझे अब सब वापस खड़ा करना है.

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तुमने मुझे तूफ़ान में अकेला नहीं छोड़ा तो अब उम्मीद मत ख़त्म करो. हम अलग अलग समय पर अलग अलग चीज़ें चाह सकते हैं. हो सकता है जब मुझे अकेले समय चाहिए तभी तुम्हे हम दोनों का साथ चाहिए. मैं शायद मूडी और चिड़चिड़ी हो जाऊं. या फिर बातबेबात गुस्सा ही रहूँ. मगर ये सब गुज़र जाएगा. शायद जितनी जल्दी हम चाहते हैं, उतनी जल्दी नहीं मगर गुज़र तो जायेगा. हम छोटे छोटे कदम बढ़ाएंगे, एक खुशहाल अंत के लिए नहीं बल्कि खूबसूरत हर दिन की तरफ. मेरे साथ रहना चाहे कोई और हो न हो और मैं जो तुमसे, खुद से, या हम दोनों से उम्मीद कर रही हूँ वो कोई सरल आसान तरीका नहीं है मगर हमने कब आसान रास्ते चुने हैं.

 

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