अगर एक पत्नी चाहे तो अपने पति की ज़िंदगी बर्बाद कर सकती है

(जैसा अक्षता राम को बताया गया)

कम उम्र में ही अपने पिता को खोने का मतलब था कि मेरे भाई बहनों की पढ़ाई, नौकरी और शादी की ज़िम्मेदारी मुझ पर थी। एक दिन मुझे अहसास हुआ कि मैं 35 वर्ष का हो चुका हूँ और अभी तक मुझे मेरा जीवनसाथी नहीं मिला है।

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यह एक परिकथा जैसा था

मैं एक विवाह ब्यूरो के माध्यम से संजना से मिला। वह मेरी उम्र की तलाकशुदा स्त्री थी और एक प्राइवेट कंपनी में काम करती थी। वह साधारण दिखती थी, कम बात करती थी और उसकी बातचीत का तरीका आमतौर पर उसकी मुस्कान था। हमने अपने परिवारों के आशीर्वाद के साथ शादी कर ली और अपना नया जीवन शुरू किया।

शुरूआत में चीज़ें अच्छी थीं। मैं आदर्श पति बनने के लिए उत्सुक था और उसके साथ ज़्यादा समय बिताता था, उसे बाहर ले जाता था और घर के कामों में उसकी मदद करता था। मैं एक अनंत बंधन बनाना चाहता था, जहां हम जीवनसाथी के रूप में एक दूसरे के साथ खुले हों, पहले अच्छे दोस्त हों और अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में संकोच ना करते हों। हालांकि, ऐसा लग रहा था कि वह खुलने में थोड़ा समय ले रही थी। मुझे लगा कि यह उसके दुःखद अतीत के कारण था। उसका पूर्व पति उसे धोखा दे रहा था, उसकी आय पर पल रहा था, बेरोज़गार था और उसका शोषण भी करता था।

हमें जल्द ही एक सुंदर बेटी मिल गई। हमारा जीवन पूर्ण हो गया था, या शायद मुझे ऐसा लग रहा था।

एक ज़िम्मेदार पति और पिता के रूप में मैंने इक्विटी शेयरों में निवेश किया था और एक फ्लैट खरीदा था। जब मेरी पत्नी गर्भवती थी तो मैंने एक कार खरीद ली और एक ड्राइवर रख लिया ताकि वह आराम से और सुरक्षित रूप से नौकरी पर जा सके।

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दुःस्वप्न शुरू हुआ

चीज़ें धीरे-धीरे बदतर होती गईं और यह इतना धीरे हुआ कि मुझे पता ही नहीं चला कि अब यह एक परिकथा नहीं रही थी। मेरी पत्नी ने अचानक से मेरे परिवार के सदस्यों को परेशान करना शुरू कर दिया। मेरी बहन के साथ एक सामान्य सा मनमुटाव भी एक बुरे विवाद में बदल गया। फिर वह आरोप लगाने लगी कि मेरी कलीग के साथ मेरा विवाहेतर संबंध है। इससे मैं चकित रह गया क्योंकि मुझे ऐसा एक भी उदाहरण याद नहीं आया जिसकी वजह से वह मुझ पर शक कर सके। मैं महिलाओं से यदा-कदा ही बात करता था और वह भी तब जब मुझे उनसे काम के बारे में बात करनी होती थी। विपरीत सेक्स से मेरे कोई दोस्त नहीं थे।

जैसे-जैसे समय बीतता गया, मुझे अहसास हुआ कि मुझे बदनाम करने की बस यह उसकी रणनीति थी, खुद को निर्दोष असहाय पत्नी साबित करते हुए जिसका पति दूसरी औरतों के साथ संबंध रखता है। उसने खर्च में हाथ बंटाना बंद कर दिया और मांग की कि मैं ही सब संभालूं। मेरी बच्ची ने मुझे अनदेखा करना शुरू कर दिया। मेरी पत्नी उसके दिमाग में मेरे खिलाफ ज़हर भरती थी।

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मैं एक आउट स्टेशन की ट्रिप के बाद एक रात घर लौटा और उसने मेरे लिए दरवाज़ा खोलने से इनकार कर दिया। उसने उसे भीतर से बंद कर रखा था। मैं दरवाज़ा खटखटाता रहा। पहले ही आधी रात हो चुकी थी और मैं अपनी माँ या भाई बहनों को परेशान नहीं करना चाहता था। पड़ोसी इकट्ठा हो गए और मेरी पत्नी ने दरवाज़ा खोला और रोने लगी। उसने मुझ पर आरोप लगाया कि मैं पिछले कुछ दिनों से अपनी रखैल के घर पर रह रहा था और मुझे गालियां बकने लगी। तब तक बिल्डिंग के चेयरमेन सहित लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई थी।

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अंतिम दुर्घटना

मैं इस यातना से थक चुका था। वह मुझपर ताना मारने का कोई अवसर नहीं गंवाती थी। वह दोस्तों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों के बीच मेरे बारे में कहानियां फैलाने लगी थी। ज़्यादातर लोग उसका विश्वास कर लेते थे, क्योंकि वह एक औरत थी और उन्होंने मेरे अनैतिक कार्यों के लिए मेरा तिरस्कार करना शुरू कर दिया। मानसिक आघात इतना ज़्यादा बढ़ गया कि मैंने एक वकील से परामर्श लेने का फैसला किया। मैंने तलाक दायर कर दिया।

अब तक मैंने जिस चीज़ का सामना किया था वह तो कुछ भी नहीं था। मेरा असली संघर्ष तो अब शुरू हो रहा था। मेरी पत्नी मुझे खुशी-खुशी तलाक देने को तैयार थी बशर्ते मैं उसके और बच्चे के रखरखाव के लिए 60,000 रूपये दूं। यह मेरे सामर्थ्य से बाहर था। मैं एक प्राइवेट फर्म में काम करता था और मेरी आय औसत थी। मेरी पत्नी ने दावा किया कि मेरे पास अन्य स्त्रोतों से आय थी जिसकी वजह से मैं आसानी से मैंटेनैंस का भुगतान कर सकता था।

भले ही मैं घर का हर खर्च चला रहा था, लेकिन मुझे किचन का उपयोग करने की अनुमति नहीं थी। मेरी पत्नी गैस सिलेंडर डिस्कनेक्ट कर देती थी और पाइप छुपा देती थी। मुझे भोजन नहीं दिया जाता था। मैं मेरे ही घर में खाना नहीं पका पाता था और ना ही एक कप चाय बना पाता था। यह एक शीत युद्ध था। मेरी बेटी को होस्टल में रहने के लिए भेज दिया गया था। जो लोग मेरे साथ मित्रवत थे और हर दिन मुझे मुस्कान दिया करते थे अब मुझे अवहेलना की दृष्टि से देखने लगे और मुझे अनदेखा करने लगे क्योंकि मेरी पत्नी ने मेरी छवि खलनायक की बना दी थी।

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रिश्ते बनाना मुश्किल है, उन्हें बनाए रखना और भी मुश्किल

यह कब खत्म होगा?

मैं जल्द से जल्द ये शादी तोड़ देना चाहता था। फिर मेरी पत्नी एक नई मांग ले आई। वह मेरे फ्लैट पर पूर्ण स्वामित्व चाहती थी। यह शहर के पॉश इलाकों में से एक है। मैंने इसे 90 के दशक में अपनी मेहनत की कमाई से खरीदा था जब कीमतें बहुत कम थीं। अब यह बहुत महंगा है। कौन सा समझदार व्यक्ति होगा जो खून पसीने से बनाई हुई संपत्ति को छोड़ देना चाहेगा वह भी ऐसे व्यक्ति के लिए जिसने उसे हमेशा दुख ही दिया है?

लड़ाई जारी है। अब कुछ साल हो चुके हैं। अब मेरी दिनचर्या में वकील के ऑफिस जाना, उसकी भारी फीस चुकाना और अदालत की सुनवाई में जाना शामिल है जहां मेरी पत्नी हर बार नए आरोपों या मांग के साथ आ जाती है। मैं रात को एक खाली घर में लौटता हूँ जहां मेरी पत्नी और मैं अजनबी हैं और चुप्पी हर दिन मेरे दिल को रौंधती है। मुझे मुक्ती कब मिलेगी? मैं उस दिन का इंतज़ार कर रहा हूँ।

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