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अंतर्जातीय विवाह के बाद कपल्स के सामने आने वाली 15 वास्तविक समस्याएँ

21वीं शताब्दी में भी भारत में अंतर्जातीय विवाह अभी भी चुनौतीपूर्ण और अत्यधिक निंदित हैं।
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भारतीय समाज में जाति व्यवस्था और संबंधित मतभेद गहराई से समाए हुए हैं। जाति भारतीयों के जीवन के हर पहलू को प्रभावित करती है। ऐसा ही एक पहलू शादी है। आम तौर पर यह माना जाता है कि हर किसी को अपनी ही जाति के व्यक्ति से शादी करनी चाहिए, क्योंकि इस तरह से विवाह न केवल माता-पिता और परिवार द्वारा बल्कि बड़े स्तर पर समाज द्वारा भी स्वीकार किया जाएगा। दूसरी तरफ एक अंतर्जातीय विवाह को शर्मनाक कार्य माना जाता है जो पूरे परिवार को अपमानित करता है। लेकिन यह परिप्रेक्ष्य बदल रहा है और आजकल लोग अंतर्जातीय और अंतर-धार्मिक विवाह पसंद करने लगे हैं।

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अंतर्जातीय विवाह क्या हैं?

इस प्रकार का वैवाहिक मिलन तब होता है जब विभिन्न जातियों के दो लोग एक-दूसरे के साथ प्यार करते हैं और शादी करने का फैसला करते हैं। वे जाति व्यवस्था की बाधाओं को तोड़ते हैं और दुनिया को यह दिखाने के लिए एक साथ आते हैं कि प्यार कोई सीमा नहीं जानता है। भारतीय मानव विकास सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में केवल 5 प्रतिशत विवाह अंतर्जातीय विवाह हैं। इससे पता चलता है कि 21वीं शताब्दी के भारत में अंतर्जातीय विवाह अभी भी चुनौतीपूर्ण और अत्यधिक निंदनीय हैं।

यह मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों के लोग होते हैं जिन्हें जाति व्यवस्था के प्रहार का सामना करना पड़ता है। शिक्षा, सूचना और उचित ज्ञान तक पहुँच के कारण शहरी लोग अंतर्जातीय विवाह के विचार के प्रति ज़्यादा खुले हैं। हालांकि, सामान्य रूप से, प्यार को अभी भी जाति व्यवस्था से जुड़ी युगों-पुरानी परंपराओं और रीति-रिवाजों द्वारा डोमिनेट किया जाता है। यह वास्तव में निराशाजनक है और इसे बुद्धिमानी से और तेजी से निपटाया जाना चाहिए।

अंतर्जातीय विवाह क्यों स्वीकार नहीं किए जाते हैं?

दावों के बावजूद, हम यह कहते हैं कि हम आधुनिक हैं और जाति, धर्म, आर्थिक स्थिति आदि जैसी चीजें हमें परेशान नहीं करती हैं, लेकिन हमारे दिल की गहराई से हम जानते हैं कि इन चीजों को कभी भी अनदेखा नहीं किया जा सकता है। जब बात शादी की आती है, तो यह और भी ज़्यादा है। निम्नलिखित कारणों से भारतीय समाज में अंतर्जातीय विवाहों को स्वीकार नहीं किया जाता हैः

1. उस यातना का निरंतर डर जो जोड़े और उनके परिवार को झेलनी पड़ेगी

2. दृढ़ विश्वास कि जोड़े विवाह के बाद एक-दूसरे की संस्कृति में एडजेस्ट नहीं कर पाएँगे

3. स्वीकार किए गए सामाजिक मानदंडों और रीति-रिवाजों को जोड़े द्वारा तोड़ दिया जाएगा जो उन लोगों के लिए चुनौती बन सकते हैं जो नियंत्रित करना चाहते हैं

4. अंतर्जातीय विवाह होने पर पारिवारिक नाम, सम्मान और प्रतिष्ठा प्रभावित होगी

5. राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, आदि जैसे भारतीय राज्यों में ऑनर किलिंग एक व्यापक घटना है (https://www.oneindia.com/feature/in-pics-unknown-facts-about-inter-caste-marriages-in-india/articlecontent-pf4356-1311186.html) जो विभिन्न जातियों से संबंध रखने वाले जोड़ों को विवाह करने से हतोत्साहित करती है

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अंतर्जातीय विवाह को खारिज करके, जाति व्यवस्था की बुराइयों को अभी भी बरकरार रखा जा रहा है। समाज में विभिन्न समूहों के बीच दरारें और विभाजन बढ़ रहे हैं। अंततः, अंतर्जातीय और अंतर-धार्मिक विवाह को मंजूरी न देना राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा है।

अंतर्जातीय विवाह के बाद 15 वास्तविक समस्याएँ

हमने विकास दर के उच्च स्तरों को हासिल किया है और हम समाज में असमानताओं के कुछ रूपों को हटाने में भी सफल रहे हैं। हमने तकनीकी क्षेत्रों में अग्रणीय विकास किए हैं और सभी के लिए शिक्षा के रूप में समानता प्राप्त करने में मदद की है। लेकिन इन उपलब्धियों का कोई फायदा नहीं है, जब तक जातियों और धर्मों से जुड़ी दरारें अभी भी हमारे समाज का आधार बनाती हैं।

जब एक-दूसरे के साथ प्यार करने वाले दो लोगों को एक साथ रहने की इजाज़त प्रगतिशील और आधुनिक देश कैसे कह सकते हैं? सबसे ज़्यादा आवश्यकता देश में अंतर्जातीय विवाहों द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों से इस तरह निपटने की है ताकि जाति व्यवस्था की बुराइयों पर प्यार की जीत हो। अंतर्जातीय जोड़ों द्वारा सामना की जाने वाली समस्याओं को जानना इस दिशा में एक कदम है।

अंतर्जातीय जोड़े के सामने आने वाली 15 आम समस्याएं ये हैं:

1. जोड़ा परिवारों द्वारा अस्वीकृत किया जाता है

जो जोड़े अपने परिवारों की अस्वीकृति के बावजूद एक-दूसरे से शादी करने का साहस दिखाते हैं, उन्हें हमेशा के लिए अपने परिवारों को अलविदा कहना पड़ता है। उन्हें अपने संबंधित परिवारों द्वारा अस्वीकृत कर दिया जाता है, जो जोड़े के साथ सभी संबंध तोड़ देते हैं। परिवारों के लिए रूढ़िवादी मूल्य और सिद्धांत उनके बेटे या बेटी से ज़्यादा महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

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2. जोड़ा समुदाय द्वारा बहिष्कृत कर दिया जाता है

न केवल जोड़े के परिवार जोड़े के साथ संबंधों को अस्वीकार करते हैं और तोड़ देते हैं, बल्कि समुदाय भी बड़े स्तर पर जोड़े को बाहर कर देता है और जोड़े के जीवन में समस्याएँ पैदा करता है। समुदाय के लोग जोड़े के साथ बातचीत नहीं करते हैं और जोड़े के अस्तित्व को अनदेखा करते हैं। ग्रामीण इलाकों में, उन्हें अपने गाँव में रहने भी नहीं दिया जाता है।

3. सामाजिक दबाव जोड़े के लिए जीवन को तनावपूर्ण बनाता है

चूंकि अंतर्जातीय विवाह भारतीय समाज में अच्छी तरह से स्वीकार नहीं किया जाता है, इसलिए जोड़े को बहुत से सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ता है। कोई भी जोड़े का समर्थन नहीं करेगा, खासकर अगर उन्होंने माता-पिता की मंजूरी के बिना शादी की है। अपार्टमेंट किराए पर लेते समय, मकान मालिक अंतर्जातीय विवाह को एक मुद्दा बना सकते हैं। जोड़े के पास कोई दोस्त नहीं हो सकता है और कोई भी रिश्तेदार किसी भी मदद की पेशकश करने के लिए आगे नहीं आ सकता है।

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4. जीवन शैली के अंतरों का सामना करना मुश्किल है

जाहिर है, साथियों की अलग-अलग जीवनशैलियाँ और संस्कृतियाँ होंगी क्योंकि वे विभिन्न जातियों से संबंध रखते हैं। इसका मतलब है कि उन्हें इन अंतरों को समायोजित और अनुकूल करना होगा। जोड़ों में से अधिकांश ऐसा करने में असफल होते हैं, क्योंकि तर्क और झगड़े जोड़ों के बीच एक आम घटना बन जाते हैं।

5. विवाहित जीवन में परिवार के सदस्यों का निरंतर हस्तक्षेप

यहाँ तक कि अगर परिवार अंतर्जातीय विवाह को मंजूरी दे देते हैं, तब भी हम देख सकते हैं कि विवाहित जोड़े के जीवन में पारिवारिक सदस्यों का लगातार हस्तक्षेप होता है। वे हर समय जोड़े पर अपने परिवार और जाति के मानदंडों को लागू करने का प्रयास करते हैं। इस तरह के दबावों के तहत, प्यार आमतौर पर एक बैकसीट लेता है और जोड़े खुद जातिगत राजनीति में उलझ जाते हैं।

6. श्रेष्ठता की भावना रिश्ते को नुकसान पहुँचा सकती है

साथियों में से एक यह सोच सकता है कि उसकी जाति उसके साथी की जाति की तुलना में कहीं अधिक श्रेष्ठ और बेहतर है। यह व्यक्ति में श्रेष्ठता की भावना बनाएगा और वह साथी के साथ अपमानजनक तरीके से व्यवहार करना शुरू कर सकता/ सकती है। कुछ समय बाद, इससे असंतोष उत्पन्न हो सकता है और अंततः शादी टूट सकती है।

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7. जोड़े के लिए सर्वाइवल वास्तव में मुश्किल हो जाता है

देश में ऑनर किलिंग्स बेहद प्रचलित हो गई हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े 2015 में इस श्रेणी में मारे गए लोगों की संख्या 2015 में 251 बताते हैं। ध्यान दीजिए, ये केवल रिपोर्ट किए गए मामले हैं।

इसलिए, यह स्पष्ट है कि जोड़े लगातार डर में रहेंगे, क्योंकि उनका जीवित रहना वास्तव में कठिन हो जाएगा।

8. जोड़े द्वारा वित्तीय मुद्दों का सामना करना पड़ता है

जोड़े को खुद अपना जुगाड़ करने के लिए छोड़ दिया जाया है। उन्हें अपने परिवारों या दोस्तों से कोई समर्थन नहीं मिलता है। जब जोड़ा आजीविका कमाने और अपने दम पर जीवन जीने की कोशिश करता है तब कुछ रिश्तेदार भी बाधा उत्पन्न करते हैं। इन सबके कारण, जोड़े द्वारा वित्तीय समस्याओं का सामना किया जाता है, जो गठबंधन पर और ज़्यादा भावनात्मक दबाव पैदा करता है।

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9. जोड़े को प्रोफेशनली भी पीड़ा झेलनी पड़ती है

कई बार, जोड़े को प्रोफेशनली भी पीड़ा झेलनी पड़ती है। अंतर्जातीय विवाह दोनों साथियों के कार्यालयों द्वारा स्वीकार नहीं किया जा सकता है, और कार्यस्थल के लोग उनके साथ नफरत भरा व्यवहार कर सकते हैं। किसी को काम करने की जगह पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है और उसे अनैतिक आधार पर छोड़ना भी पड़ सकता है।

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10. जोड़े को नियमित आधार पर ताने सुनने पड़ते हैं

विवाह के बाद, जोड़े को नियमित आधार पर ताने सुनने पड़ते हैं। विवाह को स्वीकार करने के बजाय, रिश्तेदार और दोस्त जोड़े का अपमान करने और नीचा दिखाने के तरीके ढूंढते रहते हैं। उदाहरण के तौर पर, पत्नी की सास, दादी सास और परिवार की चाचियों द्वारा उसके ड्रैसिंग सैंस, उसके लुक्स आदि की हमेशा आलोचना की जाती है।

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11. बच्चों को पालने की बात आने पर जोड़े में असहमति हो सकती है

अपने बच्चों को पालने के मामले पर जोड़े के बीच असहमति हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, इस बात में राय का अंतर होगा कि बच्चों को किस धर्म या जाति का पालन करना चाहिए और इसी तरह कौन-से त्यौहार मनाए जाने चाहिए, कौन-से भगवान की पूजा की जानी चाहिए, कौन-सी सांस्कृतिक नैतिकता प्रदान की जानी चाहिए – और यह संबंध को परेशानी में डाल सकता है।

12. अंतर्जातीय विवाह में अस्थिरता

एक अंतर्जातीय विवाह टूटने की संभावना बहुत अधिक है क्योंकि जोड़े के बीच निरंतर रवैये और रुचि का अंतर बना रहता है। इसके साथ सामाजिक दबाव भी हैं जो प्यार को खत्म कर सकते हैं। इसलिए, अंतर्जातीय जोड़े के विवाहित और पारिवारिक जीवन को आमतौर पर बहुत अस्थिर माना जाता है।

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13. मनोवैज्ञानिक रूप से अंतर्जातीय विवाह थकाऊ है

यदि अंतर्जातीय जोड़ा एक-दूसरे की अपेक्षाओं पर खरा उतरने में असमर्थ हैं तो जोड़ा अपने फैसले पर अफसोस करता है और एक-दूसरे को दोष देता है। नतीजतन, जोड़ा निराश हो जाएगा और एक-दूसरे से नाखुश रहेगा।

14. अंतर्जातीय जोड़े के बच्चों के भी भेदभाव का सामना करना पड़ता है

अंतर्जातीय जोड़े के बच्चे हमेशा दुविधा में रहते हैं कि वे किस जाति या धर्म से संबंधित हैं। यहाँ तक कि जब उनसे पूछा जाता है, वे इसके बारे में एक स्पष्ट जवाब देने में विफल रहते हैं, जिसके कारण अन्य लोगों द्वारा उनसे अलग व्यवहार किया जाता है।

15. अंतर्जातीय विवाह में विरासत संबंधी समस्याएं आम हैं

आम तौर पर, दोनों परिवार अंतर्जातीय जोड़े को स्वीकार करने में विफल रहते हैं, जिसके कारण विरासत से संबंधित समस्याएं आम हो जाती हैं। अंतर्जातीय जोड़े को अपने हक का हिस्सा प्राप्त करने के लिए संपत्ति और धन विवादों से निपटना पड़ सकता है।

जैसा कि आप देख सकते हैं, अंतर्जातीय जोड़े को साथ रहने और एक सुखी शादीशुदा जीवन के लिए कई पारिवारिक समस्याओं और परेशानियों से गुज़रना पड़ता है। इन समस्याओं का सामना करके और हर समय एक-दूसरे का समर्थन करने के लिए तैयार होकर, एक अंतर्जातीय जोड़ा समृद्ध विवाहित जीवन प्राप्त करने में सफल हो सकता है।

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जब आप अंतर्जातीय विवाह करते हैं तो सामना करने की युक्तियाँ

अंतर्जातीय विवाह में अच्छा संचार, समझ और प्यार जोड़े के बीच एक मजबूत और लंबे समय तक स्थायी संबंध बनाने में मदद कर सकता है। अंतर्जातीय विवाह को सच्चे प्यार, सम्मान, सच्चाई, विश्वास और ईमानदारी की नींव पर बनाया जाता है। जोड़े के परिवारों को शांत होने के लिए पर्याप्त समय और स्पेस दिया जाना चाहिए। सफल अंतर्जातीय विवाह के लिए माता-पिता और परिवारों के दृष्टिकोण को समझना वास्तव में आवश्यक है।

नए विचारों को स्वीकार करने और नई आदतों को अपनाने के मामले में जोड़े को उदार होना चाहिए। घर में अपने संबंधित अनुष्ठानों और परंपराओं को निष्पादित करें और अपने बच्चों को स्वतंत्रता दें कि वे कौन से धर्म या जाति का पालन करना चाहते हैं। अपने बच्चों को इस तरह से पालें कि जाति, धर्म इत्यादि जैसी चीजें उनकी वृद्धि और विकास में बाधा न डालें।

हमें उम्मीद है कि एक दिन अंतर्जातीय विवाह भारतीय समाज द्वारा स्वीकार किए जाऐंगे और देश के राष्ट्रीय एकीकरण के लिए मार्ग प्रशस्त करेंगे। समय आ गया है कि हम अपनी संकीर्ण मानसिकता और पूर्वाग्रहों को पीछे छोड़ दें और इस शब्द के वास्तविक अर्थ में, हमारे देश की प्रगति में मदद करें।

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