अपने विवाह में परास्त की गई

(पहचान सुरक्षित रखने के लिए नाम बदल दिए गए हैं)

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मैं दिव्या हूँ, एक सफल एचआर (मानव संसाधन) व्यवसायिक जो अब गृहणी बन गई है। कॉलेज के दिनों में आलोक नाम के आकर्षक युवा पुरूष के प्यार में पड़ना ज़ाहिर और प्राकृतिक था। उससे विवाह करना उस इच्छित नौकरी से भी अधिक रोमांचक था जो मैं एक शीर्ष की टेलिकॉम कंपनी में करती थी। विवाह के पहले कुछ महीनों तक मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मैं एक रानी हूँ और 10 महीनों के भीतर हम एक बेटी के जन्म द्वारा समृद्ध हुए।

उससे विवाह करना उस इच्छित नौकरी से भी अधिक रोमांचक था जो मैं एक शीर्ष की टेलिकॉम कंपनी में करती थी।
विवाह के पहले कुछ महीनों तक मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मैं एक रानी हूँ

मैं बहुत अधिक खुश थी कि मैं ना केवल अपनी बेटी की देखभाल कर पा रही थी बल्कि अपनी नौकरी में भी तेज़ी से प्रगति कर रही थी। जब कार्य में मेरी दिन प्रतिदिन की उपलब्धियां बताने पर आलोक मुझे डांट देता था, मैं समझ नहीं पाती थी कि वास्तव में उसे ईर्ष्या होती थी। उसके बाद उसने सुझाव दिया कि मुझे नौकरी छोड़ देनी चाहिए और अपने परिवार के स्वास्थ्य और खुशी पर ध्यान देना चाहिए। प्रारंभ में, मैं अनिच्छुक थी, लेकिन उसके प्रति मेरे प्यार के कारण मैंने बलिदान दे दिया। अपनी बेटी की देखभाल करना नुकसान की भावना की क्षतिपूर्ति कर देता था। मैंने सोचा कि हमारे लिए यही उचित होगा कि मैं बगैर किसी पूर्व शर्त के अपनी तरफ से सर्वश्रेष्ठ प्रयास करूं।

यह गलतियां ढूंढने और आलोचना करने से शुरू हुआ और मुझे लगने लगा कि मैं कुछ नहीं जानती। कुशल गृहणी और प्रभावी व्यवसायिक अतीत का व्यक्ति था और मुझे यह संदेह होने लगा कि क्या मैं एक अच्छी पत्नी और देखभाल करने वाली माँ हूँ भी या नहीं। मैं अपने आप को आश्वस्त करती थी कि मैं अच्छी तरह से संभाल रही थी लेकिन आलोक की आलोचना और अभिमान मेरी तर्कसंगत सोच को कमज़ोर कर देते थे।

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चूंकि मैं अपनी हर ज़रूरत के लिए उस पर निर्भर थी, जब मैं असहमत होना चाहती थी, मैं चुप रहती थी। मेरी विनम्रता को कायरता के रूप में देखा जाता था और उसका आक्रामक व्यवहार बढ़ता जाता था। यदि मेरा सिर दर्द होता था तो मुझसे अपेक्षा की जाती थी कि मैं बालकनी में खड़ी हो जाऊं बजाए उसे अपनी ‘रोती शक्ल’ दिखाकर ‘परेशान’ करने के, जब वह फोन पर बात कर रहा हो या टीवी देख रहा हो। उसके खाना खा लेने के बाद मुझसे यह अपेक्षित था कि मैं मुस्कुराते हुए उसके लिए उपलब्ध हो जाऊं और ‘मेरी तबीयत ठीक नहीं’ जैसी भावनाएं उसके लिए असहनीय होती थीं। हालांकि उस कार्य में मैं भागीदार नहीं होती थी, केवल एक मूक सुविधा प्रदाता होती थी।

यदि मेरा सिर दर्द होता था तो मुझसे अपेक्षा की जाती थी कि मैं बालकनी में खड़ी हो जाऊं बजाए उसे अपनी ‘रोती शक्ल’ दिखाकर ‘परेशान’ करने के,
मैं अपनी हर ज़रूरत के लिए उस पर निर्भर थी

मुझे अहसास हुआ कि मेरे पंख काटने और मुझे पूरी तरह से उस पर निर्भर करने के लिए ही मुझे मेरा समृद्ध कैरीयर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था। मेरे माता-पिता समझते थे कि वह श्रेष्ठ पारस्परिक कौशल के साथ बहुत हंसमुख स्वभाव का व्यक्ति है। वे मुझे उसके बारे में अपनी राय भी व्यक्त नहीं करने देते थे। उसका परिवार, संबंधी और मित्र सब उसके कहे अनुसार ही कार्य करते थे और वे यह मानते थे कि वह दुनिया का सबसे श्रेष्ठ पति है।

एक प्रतिभाशाली और सुंदर लड़की अब एक गुलाम बनकर रह गई थी। मुझे तीन बार गर्भपात करवाना पडा़ क्योंकि आलोक सुरक्षा उपाय का उपयोग करने में सहज नहीं था। एक टूटे हुए उत्साह के साथ मेरा थका हुआ शरीर उसके लिए नींद की गोली से अधिक कुछ नहीं था। भावनात्मक पीड़ा जल्द ही माइग्रेन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में परिवर्तित हो गई। मनोचिकित्सक ने मुझे दवाईयां दी जिसने हार्मोनल असंतुलन सहित अधिक जटिलताएं उत्पन्न कर दीं।

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एक अन्यथा सक्षम और सुंदर शरीर में एक मानसिक मलबा होने के बावजूद, जब एक पार्टी में मैं शशांक से मिली, मैंने उसकी आँखों में आशा की एक किरण देखी। वह आलोक की कंपनी का एक आधिकारिक समारोह था और मैं उलझी हुई भी थी और डरी हुई भी। जब अगले दिन मैंने अपने मोबाईल पर शशांक का मैसेज देखा तो मैं आश्चर्यचकित रह गई। हिम्मत जुटाकर उस औपचारिक मैसेज का उत्तर देने में मुझे तीन दिन लग गए। तब से ही हम दोनों बहुत सावधानीपूर्वक संपर्क में हैं और वह मेरी पीड़ा के बारे में सब कुछ जानता है। शशांक उम्र में मुझसे छोटा है, अब भी अविवाहित है और मुझे पागलों की तरह प्रेम करता है। वह मुझे आलोक से बिल्कुल विपरीत लगता है। मैं अपने आप को अपनी वैवाहिक स्थिति एवं जिम्मेदारियों और एक देखभाल करने वाले, सौम्य और प्यारे व्यक्ति के साथ जीवन जीने की संभावना के बीच बंटा हुआ पाती हूँ।

अगले दिन मैंने अपने मोबाईल पर शशांक का मैसेज देखा तो मैं आश्चर्यचकित रह गई।
ऐसा महसूस करती हूँ कि मेरा इस्तेमाल किया जा रहा है।

आलोक से तलाक लेने में मेरे परिवार में से कोई भी मेरा साथ दे, इसकी संभावना शून्य के बराबर है। मैं उसकी मांगों के सामने अब भी झुकती हूँ और ऐसा महसूस करती हूँ कि मेरा इस्तेमाल किया जा रहा है। वैवाहिक परामर्शदाता के पास जाने से भी कोई समाधान नहीं निकला बल्कि आलोक और अधिक आक्रामक हो गया। मैं यह आशा लिए आगे बढती हूँ कि एक जादू होगा जिससे मेरी सुरक्षा सुनिश्चित हो जाएगी और वह मुझे ऐसी परिस्थिति में ले जाएगा जहां जो प्यार और स्नेह मेरा इंतज़ार कर रहे हैं, वे मुझपर और मेरी बेटी पर बरस जाएंगे।

रिश्ते बनाना मुश्किल है, उन्हें बनाए रखना और भी मुश्किल

(जैसा संजीव त्रिवेदी को बताया गया)

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गौरव देका कहते हैं:

वह कारण जिसकी वजह से हम एक कड़वाहट भरे संबंध में बने रहना स्वीकार करते हैं, वह है डरः ‘‘क्या होगा यदि मैं यह संबंध तोड़ दूं और स्थिति और अधिक खराब हो जाए?’’ हम अपने आपके साथ दुर्व्यवहार होने देते हैं क्योंकि हम ‘परिवर्तन’ से लगातार डरते रहते हैं। हम एक अन्यायपूर्ण माहौल में रहते हैं जहां हम हर रोज अपमानित होते हैं, दुर्व्यवहार प्राप्त करते हैं और धिक्षित होते हैं -यह आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की एक निश्चित कमी का कारण बनता है। अधिकांश बार, बार-बार दुर्व्यवहार होने के कारण हम यह मान लेते हैं कि कोई हमसे प्यार नहीं करेगा।

एक भावनात्मक रूप से अपमानजनक संबंध में फँसे हुए किसी व्यक्ति के लिए सबसे आम विचार हो सकता है, ‘‘यह व्यक्ति मुझे कष्ट देता है लेकिन कम से कम इतना सुविधाजनक बना देता है कि मैं यहीं रहूँ। भले ही वह मेरे साथ दुर्व्यवहार करता है फिर भी मुझे यह घर जैसा महसूस होता है। अगर मैंने इसे छोड़ दिया और किसी और ने मुझसे प्यार नहीं किया तो? तब क्या होगा?’’

मेरी एक नौकरानी थी जो मुझे आकर बताया करती थी कि उसका पति उसे मारता है। मैं उसे कहता रहा कि उसे छोड़ दे लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। एक दिन वह आई और उसने मुझे बताया कि अब उसका मारना बंद हो गया है। मैंने उसे बधाई दी, लेकिन वह रोने लगी और कहा कि अब वह बहुत भयभीत है कि उसका पति अब उसे नहीं मारता; इससे साफ ज़ाहिर होता है (उसके लिए) कि उसका संबंध शायद अन्य महिला के साथ है। इस प्रकार के संबंध में हमारे आत्म-सम्मान का ऐसा हाल होता है और इसिलिए हम बंधा हुआ महसूस करते हैं।

याद रखो, जिस क्षण तुमने मानव के रूप में जन्म लिया, तुम्हें ‘मुक्त इच्छा’ का उपहार प्राप्त हुआ था। और मुक्त इच्छा का अर्थ ‘निर्णय’ है। उस ‘निर्णय’ का उपयोग करो और आगे बढ़ो। यह तथ्य कि वह व्यक्ति आपका शोषण करता है, इसमें आपका कोई दोष नहीं है। दोष उसका ‘स्वयं का’ और शक्ति और अहंकार के उसके कट्टर विचारों का है। बाहर आओ और किसी ऐसे व्यक्ति के साथ जीवन को गले लगाओ जो ना केवल तुम्हें प्यार करता हो बल्कि तुम्हें स्वयं के निर्णय भी लेने देता हो!

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