Hindi

अपने पति की ज़िन्दगी सवांरते मेरी अपनी पहचान खो गई

आपका आस्तित्व मिटने के लिए ज़रूरी नहीं की आपके पति को आपको मारना पड़े, या आपकी बेइज़्ज़ती करनी पड़े. कई बार बस आपके होने को भी अनदेखा कर देना भर वो काम कर सकता है.
identity

मैं नलिनी हूँ, एक बेटी, एक पत्नी और एक माँ. मैं अच्छी खासी पढ़ी लिखी भी हूँ, अगर पढ़े लिखे होने से आपका मतलब कहाँ और कितनी पढ़ाई से है तो. एक समय था जब मेरी राय होती थी, एक करियर भी था, हाँ थोड़ा सा घुमावदार सा था मेरे करियर का ग्राफ। मैं अपने पति के ऑफिस जाना ही हमेशा पसंद करती थी. तो मैं हमेशा वही जाती थी जहाँ वो जाते थे. हमेशा पूँछ की तरह उन पीछे पीछे चलती थी. और न सिर्फ ये, मैं ऐसा करना बहुत पसंद भी करती थी. मैं वहां रहती थी, जहां रहने की मुझसे उम्मीद की जाती थी. कभी हमारा घर छोटा सा बैरक जैसा क्वाटर होता था कभी बदहवास हालत में कोई अपार्टमेंट. मैं नए नए पकवान बनती, लोगों को अपने घर आमंत्रित करती और हर वो काम कर के खुश होती जो मुझे एक “अच्छी पत्नी” की परिभाषा में फिट करता. कभी कभी तो खुद अपनी ही इच्छा और प्रवृति के विपरीत जा कर अपने सास ससुर को खुश करने की चेष्टा करती थी. ये बात और है की मेरी ये कोशिश तो हमेशा ही नाकाम ही होती थी. और आपको एक राज़ की बात बताओं. मुझे ये सब करने को कभी किसी ने कुछ नहीं कहा था, मेरे पति ने भी नहीं.

ये भी पढ़े: मेरे पति मेरी कामयाबी से जलते हैं

हाँ शुरू शुरू के दिनों में उन्हें मुझपर बहुत गर्व था. और फिर जैसे जैसे वर्ष बीतते गए, मैंने मानो अपना खुद का रास्ता खो दिया. मुझे गलत मत समझियेगा। मैं अब भी अपनी राय प्रकट करती थी और अक्सर पुरुष और महिलाएं मेरी बातें भी ध्यान से सुनते थे, मगर मुझसे एक गलती हो गई. मैंने अपनी पूरी ज़िन्दगी अपने पति के इर्द गिर्द ही बन ली. मुझे पता ही नहीं चला की मैं कब एक चिड़चिड़ी, पति को हर बात पर ताना देने वाली पत्नी बन गई थी जो मेहमानो के आने पर अक्सर किचन में ही रहती थी, और पति बाहर लिविंग रूम में उनसे गप्पे लड़ा रहे होते थे.

मुझे एहसास ही नहीं हुआ की कब मेरे पति ने मेरे साथ समय बिताना बंद कर दिया और मेरे कमरे में आते ही वो कमरे से निकल जाते. पार्टियों में अक्सर वो मेरी बात बीच में काट कर एक नए विषय पर बातें शुरू कर देते. जब उन्हें फ़ोन करती, अक्सर मेरी कॉल को होल्ड पर रखकर किसी और से गपियाने लगते. और अगर कभी  मुझसे बात करते किसी और का फ़ोन आता तो मेरे फ़ोन को काट वो दूसरा कॉल ले लेते. जब कोई मुझे उनके सामने आहात या अपमानित करता तो वो शांत रहते. बेटा अगर कभी मेरे साथ बदतमीज़ी करता था तो वो न उसे डांटते न फटकारते, बस थोड़ी देर बात सुन, दरवाज़ा मेरे मुँह पर बंद कर चले जाते.

अब जब मैंने अपने पति केफ़ोन पर महिलाओं के रसीले मैसेज देखने शुरू किये तो मुझे ये खटकने लगा. मुझे तो पता भी नहीं था की जब मैं उनके कपडे धो रही थी, या उनके लिए खाना बना रही थी, मेरे पति दूसरी स्त्रियों के जीवन की समस्याओं का समाधान कर रहे थे. मुझे ये भी एहसास नहीं हुआ था की गत कई वर्षों से मेरे पति मुझसे सिर्फ गृहस्ती से जुडी काम भर की ही बातें करते थे.

मुझे इस बात का भी एहसास नहीं हुआ की काफी समय से हम दोनों ने एक दुसरे को स्पर्श तक नहीं किया था और न ऐसी कोई इच्छा ही जताई थी.

ये भी पढ़े: जब हमने बच्चों को उनका खुद का बेडरूम दिया, तो हमारी नींद बेहतर हो गई

drifted away
Image source

मैंने तो शीशे में देखना पता नहीं कब का छोड़ दिया था और सच कहूँ तो मुझे खुद नहीं पता था की मेरा शरीर अब लगता कैसा है. पति के शरीर की तरफ भी सालों से ध्यान नहीं दिया था. मुझे नहीं पता था की उनकी ज़िन्दगी, उनके काम कैसे चल रहे हैं या ये की उनके आगे के प्लान्स क्या हैं. चूँकि उन्होंने कुछ सालों पहले अपना व्यवसाय ही बदल लिया था तो अब उन्हें उस क्षेत्र में मेरी ज़रुरत नहीं थी.

इस बात से उन्हें कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता की आप दुखी हो, बीमार हो, बदसूरत हो या खुश हो. आपने बालों को रंगा है या अब वो सफ़ेद हो रहे हैं. अगर आप उन्हें ये बताओ की आपको नहीं पसंद अगर वो किसी और स्त्री का हाँथ पकडे तो उन्हें आपकी इस शिकायत से भी फ़र्क़ नहीं पड़ेगा.

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की आप जानना चाहते है वो क्या सोच रहे हैं या उनके प्लान क्या हैं. आप हो सकता है की उनसे कुछ शेयर करना चाहें, बातें या फिर एक ड्रिंक मगर उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा. मैं चाहे उन्हें ये बताऊँ की मुझे किसी ने सराहा है या ये की मैं हमारे बच्चे के लिए परेशां हूँ-उनके भाव एक ही होते है. मैंने अपनी शादीशुदा ज़िन्दगी के सबसे अधिक पल शायद या तो अपने पति की पसंदीदा डिश बनाने में बीते है या फिर उनके सकुशल घर लौटने की प्रार्थना में. उन्हें इस बात से बिलकुल फर्क नहीं पड़ता की जब मैं अपने रूप रंग स्वस्थ्य और इक्छाओं को भूल कर हमदोनों की दुनिया अकेले ही बसा रही थी, वो कहीं किसी आलिशान पार्टी में किसी ग्लैमरस स्त्री के साथ वो आँखों में आँखें डाल दुनिया जहां की बातें कर रहे होते हैं. और जो बात सबसे ज़्यादा तकलीफदेह है वो ये है की इस पूरी चमकधमक की उनकी दुनिया में किसी ने मेरे पति से ये नहीं पुछा की मैं कहाँ रह गई हूँ.

ये भी पढ़े: कैसे एक बेटी ने अपने परिवार को शादी के बाद भी संभाला

रिश्ते गुदगुदाते हैं, रिश्ते रुलाते हैं. रिश्तों की तहों को खोलना है तो यहाँ क्लिक करें

ज़रूरी नहीं है आपके पति आपको मारें, आपकी बेइज़्ज़ती करें या उनका कोई विवाहेतर सम्बन्ध हो, तभी आप अपनी पहचान को कुचलता महसूस करेंगे. कई बार एक पति जो आपके आर पार यूँ देखता हो मानो आपका कोई अस्तित्व ही नहीं हो, आपको ख़त्म करने के लिए काफी है. जब आप अपने पति के लिए एक स्त्री, एक साथी नहीं रह पाती और वो बस आपको उसके घर को संभालने वाली समझता हो, तो भी आप ख़त्म ही महसूस करते हो.

तकलीफ होती है जब आपका साथी आपकी इज़्ज़त नहीं करता. मैं नलिनी हूँ, बस नलिनी हूँ, कोई ख़ास इंसान नहीं.

(जैसा मौपिआ बासु को बताया गया)

बिमारी और दर्द में हम साथ हैं

वेतन मायने रखता है

शादी के बाद संयुक्त परिवार में रहना मेरे लिए अच्छा रहा

Facebook Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also enjoy:

Yes No