अपने पति को धोखा देने के दौरान वह पति की सलामती की प्रार्थना क्यों कर रही थी?

यह रेखा* के साथ मेरा तीसरा प्रयास था। एक व्यापारी के रूप में जिसे अक्सर यात्रा करनी पड़ती थी, ये गुप्त मुलाकातें मेरे लिए आसान थीं। उसका और उसके पति का तालमेल इतना अच्छा था कि पति शायद ही उसे किसी चीज़ के लिए मना करता था। इस अवसर पर, वह एक विवाह पूर्व समारोह के लिए एक आउटस्टेशन दोस्त के घर जाने के बहाने मेरे साथ थी। उसके हाथों और पैरों पर मेहंदी की खूबसूरत डिज़ाइन हमारी योजना के लिए बिल्कुल सही लग रहे थे।

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रेखा अपने आकर्षक व्यक्तित्व और उदार दृष्टिकोण के साथ 30 के उत्तरार्ध में एक आकर्षक और जीवंत महिला थी। वह एक मल्टी नेशनल कंपनी में एक एचआर एक्सीक्यूटिव थी और पहली बार हम उसकी कंपनी द्वारा आयोजित कार्यक्रम के दौरान मिले थे। हम बाद की यात्राओं के दौरान आकस्मिक रूप से और अधिक बार मिले और दोस्त बन गए। ऐसे ही एक अवसर के दौरान, बात आगे बढ़ती गई और हमारा संबंध बन गया। हम दोनों को ही इस यौन साहस में इतना मज़ा आया कि जब उसका पति और बच्चे छुट्टियों पर जल्दी चले गए तो हम दुबारा मिले। उस समय उसने मुझे अपने घर पर बुलाया और हमने बहुत अच्छा समय बिताया। तब हमने पहली बार एक लंबी छुट्टी की योजना बनाई, घर से लगभग तीन दिन बाहर।

“क्या तुम्हारा पति चैक करने के लिए तुम्हारी सहेली को फोन नहीं करेगा?’’ मैं थोड़ा सा चिंतित था लेकिन उसके आत्मविश्वास के बारे में थोड़ा उत्सुक भी था।

“नहीं। अगर वह फोन करेगा, तो मुझे करेगा। एक-दूसरे पर हम बहुत विश्वास करते हैं,’’ वह यह कहते हुए मुस्कुराई। मुझे उसकी अभिव्यक्ति में धोखा या चालाकी नज़र नहीं आई। मैं अब भी नहीं मान पा रहा था।

“तुम अपने पति, बेटे और बेटी से तीन दिन दूर रहोगी, और वह तुम्हें चैक भी नहीं करेगा?’’

ज़रूर मेरी आवाज़ में हैरत दिखाई दे रही होगी, क्योंकि तभी वह हंसी, ‘‘चिंता मत करो! मैं उसे बहुत अच्छे से जानती हूँ। वह कभी मुझे असमंजस में नहीं डालेगा या मेरा विरोध करने का जोखिम नहीं उठाएगा। वह जानता है कि अगर वह क्रॉसचैक करेगा और मुझे इस बारे में पता चल गया, तो मैं दुखी हो जाउंगी। और ऐसा करना वह कभी नहीं चाहेगा।”

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“और बच्चों के बारे में,’’ उसने मुस्कान के साथ आगे कहा, ‘‘राधा (उसकी बेटी) इतनी प्यारी है, कि उसने मुझसे कहा कि मैं उसके डैडी और भाई की चिंता ना करूं, क्योंकि वह खाना पकाने वगैरह का खयाल रखेगी। वैसे भी, मदद करने के लिए नौकरानी भी है, लेकिन मैं जानती हूँ कि वह विशेष देखभाल करेगी, उसे ज़िम्मेदारी लेना पसंद है।”

वैसे भी, तीन स्टीमी, बेपरवाह दिनों तक साथ में रहने के उत्साह ने बाकी सभी विचारों को पीछे छोड़ दिया। अगले कुछ दिन आनंदमय सेक्स, शराब और खाने-पीने में निकल गए।

अब मेरे जाने का समय आ गया था। ‘‘मेहंदी  एक अच्छा टच था!’’ मैंने हंसते हुए टिप्पणी की, जब मैं अपने ट्रैवल बैग में अपना सामान डाल रहा था। ‘‘तुम्हारी कहानी में अच्छी तरह फिट होती है।”

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“नहीं, पागल!’’ उसने कहा, ‘‘यह करवाचौथ व्रत में लगाई थी, जो मैंने पिछले हफ्ते रखा था।”

मैं नहीं जानता कि यह उसके कथन की विडंबना थी या महज जिज्ञासा जिसने मेरे दिमाग में इतने सारे प्रश्न उत्पन्न कर दिए थे। मैं उसे अपमानित नहीं करना चाहता था, फिर भी मैंने पूछा, ‘‘ओह तुम इन परंपराओं में विश्वास रखती हो और उनका पालन भी करती हो?’’

“हाँ, बिना भूले।” उसने बहुत स्पष्ट रूप से कहा।

“लेकिन करवाचौथ व्रत तो अपने पति की सलामती के लिए होता है, है ना?’’

“हाँ…’’

“और तुम यहां मेरे साथ हो…’’

“हाँ…तो?’’ वह मेरे सवाल सुनकर वास्तव में भ्रमित लग रही थी।

“एक तरफ तुम उसकी सलामती के लिए प्रार्थना करती हो, दूसरी ओर उसे धोखा दे रही हो। क्या यह थोड़ा पाखंडपूर्ण नहीं है?’’ मैं सवाल अब अपने मन में नहीं रख सका था।

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रिश्ते बनाना मुश्किल है, उन्हें बनाए रखना और भी मुश्किल

वह कुछ देर के लिए चुप रही। जब उसने बात की तो एक निश्चित अक्खड़पन था। ‘‘मैं अपने पति, अपने परिवार से प्यार करती हूँ और उन्हें खुश करने के लिए कुछ भी कर सकती हूँ। मैं सिर्फ करवाचौथ के दौरान ही उपवास नहीं रखती बल्कि पूरे साल, हर हफ्ते में एक दिन व्रत रखती हूँ। मैं अपने पति की जगह तुम्हें नहीं दे रही हूँ। और ना ही तुम्हें पसंद करने की वजह से उनके लिए मेरी फीलिंग्स बदल गई हैं।

मैं तुम्हारे साथ इसलिए हूँ क्योंकि तुम मुझे एक निश्चित खुशी देती हो जो अलग है, अनूठी है। तुम इसे बेवफाई के रूप में देखते हो; मैं इसे अपने दिल की बात सुनने के रूप में देखती हूँ, ऐसी चीज़ जो मुझे मुक्त करती है, मुझे खुशी देती है।”

उसने मुझे अपनी बड़ी चौड़ी आँखों के साथ देखा, उसके मेहंदी लगे हाथ मेरे हाथों को थामे हुए थे। ‘‘मेरे पति की सलामती और मेरी खुशी, वे एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं मेरे दोस्त।”

जब हमने एक दूसरे को अलविदा कहा, मैं उसमें एक बदलाव देख सकता था, किसी मूल्यवान चीज़ को खोने की स्वीकृति। और उसकी उदास मुस्कुराहट से, मैं यह भी जान गया था कि हम अब कभी नहीं मिलेंगे।

(जैसा वैदी को बताया गया)

* पहचान छुपाने के लिए नाम बदल दिए गए हैं

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