मैं अपने पिता की देखभाल सिर्फ इसलिए नहीं कर सकती क्योंकि मैं शादीशुदा हूँ?

sad girl thinking

(जैसा इरावती नाग को बताया गया)

मेरे पिता की तरफ उसके रवैये से मैं पति से तलाक ले रही हूँ

आज मैं तलाक की कगार पर खड़ी हूँ. अजीब लगता है ये सोच कर की आज की सदी में भी एक औरत को अपनी बेसिक ज़रूरतों और मुद्दों पर संघर्ष करना पड़ता है. मैं तलाक इसलिए चाहती हूँ क्योंकि मेरा पति मुझे अपने बुज़ुर्ग पिता की देखभाल करने नहीं दे रहे हैं. कारण-क्योंकि मैं एक बेटी हूँ और शादी के बात बेटी “पराया धन” होती है. जब भी अपने पति या ससुरालपक्ष से ये सुनती हूँ, अंदर तक मन छलनी हो जाता है.

मैंने अपनी माँ को अभी कुछ वर्षों पहले ही खो दिया था. तब से ही मेरे पिता अकेले रह रहे हैं.

मेरी शादी आठ साल पहले हुई थी. मेरे दो भाई हैं मगर वो मेरे पिता की देखभाल करने की स्तिथि में नहीं हैं. इसके अलावा अगर मैं अपने पिता की देखभाल कर सकती हूँ तो क्यों नहीं करून. मुझे नहीं लगता की इस विषय में मुझे किसी को भी सफाई या जवाबदेही देने की ज़रुरत होनी चाहिए. है न?

ये भी पढ़े: उसने तलाक माँगा, मगर पति ने उसे कुछ और ही दिया

अपने माता पिता की देखभाल पति का फ़र्ज़ है

अगर कल को मेरे सास ससुर को मदद की ज़रूरत हो तो क्या मैं अपने पति से इस विषय में कुछ पूछने का हक़ रखती हूँ? उसके भी भाई हैं. मगर नहीं, मैं कुछ नहीं पूछ सकती क्योंकि वो एक बेटा है और अपने माता पिता की देखभाल करना न सिर्फ उसका अधिकार है बल्कि फ़र्ज़ भी है. हमारा कानून इस बारे में बिलकुल साफ कहता है की चाहे बेटा हो या बेटी, बुज़ुर्ग माता पिता दोनों की ही ज़िम्मेदारी हैं.

हमारा कानून इस बारे में बिलकुल साफ कहता है की चाहे बेटा हो या बेटी, बुज़ुर्ग माता पिता दोनों की ही ज़िम्मेदारी हैं.

अगर ऐसा है तो क्यों मुझे बार बार ऐसे सवालों के जवाब देने पड़ते हैं, जैसे — “तुम्हारे पिता ने अकेले तो अपनी पत्नी को नहीं खोया है. दुनिया में और भी लोग अकेले रहते हैं.”

“तुम्हारे पिता के लिए ये इतना मुश्किल क्यों है?”

“तुम्हारे भाई क्यों नहीं तुम्हारे पिता का ध्यान रखते हैं?”

“अब तुम्हारी शादी मेरे बेटे से हुई है. अब ये घर तुम्हारा है, ये परिवार तुम्हारा है. वो परिवार नहीं.”

ऐसे ही सवालों को सुन कण मेरा अंतर्मन विद्रोह करने लगा.

तो मैं अपने पिता की देखभाल क्यों नहीं कर सकती?

“ऐसा क्यों है की मेरा प्यार मेरे पिता के लिए गलत है मगर मेरे पति का स्नेह उनके परिवार के लिए उनका कर्त्तव्य?”

ये भी पढ़े: मैंने शादी की तीसवी सालगिरह को खुद को तलाक़ उपहार में दिया

“ऐसा कैसे मान लिया जाता है की शादी के बाद मैं अपने सारे खून के रिश्तों को भुला दूँगी?”

“सिर्फ इसलिए क्योंकि मेरी शादी हो गई है, मुझे क्यों सिर्फ अपने सास ससुर की सेवा करनी है फिर चाहे वो मुझे अपना समझे या नहीं?

couple talking

“तो क्या ये सजा सिर्फ इसलिए क्योंकि मैं एक लड़की हूँ? मेरे माता पिता भी इसलिए ही सब सहें क्योंकि उनकी बेटी है, बेटा नहीं?”

कई बार ऐसी घटनाएं सुनने में आती हैं जहाँ बेटे और बहु बेटे के परिवार के साथ बहुत ही दुर्व्यवहार करते हैं. मुझे आश्चर्य होता है की हमारे समाज में ऐसी घटनाएं घटती ही कैसे है? क्या इसका कारण ये हो सकता है की बहु को अपने परिवार की देखभाल करने की सहूलियत नहीं दी जाती? कोई भी लड़की किसी नए परिवार को सच्चा प्यार कैसे कर सकती है अगर वो नया परिवार उसे उसके ही परिवार से अलग करने की भरकस कोशिश में लगा हो? क्या ये एक कारण हो सकता है हमारे रूढ़िवादी समाज की समस्याओं का?

मैं आठ साल तक एक प्रेमहीन विवाह में बंधी रही. मैंने अक्सर अपनी सास को ये कहते सुना था की मेरा पति कितना दयालू है की उसने इतने सावले रंग की लड़की से शादी की और निभा रहा है. मैंने अपनी पूरी कोशिश की थी की मैं सबको खुश रखूँ. मगर जब मेरे पति ने मुझे अपने ही पिता की देखभाल करने पर आपत्ति जताई तो मेरे सब्र का बाँध टूट गया.

मुझे नहीं लगता की वो किसी का ध्यान रखने में सक्षम है

उसके इस रवैये से न सिर्फ मैंने अपमान महसूस किया बल्कि उसके लिए मैंने सारी इज़्ज़त भी खो दी. मुझे कभी कभी लगता है की क्या वो सचमुच अपने खुद को माता पिता की भी देखभाल करने में सक्षम होगा? वो तो अपने माता पिता को अक्सर फ़ोन भी करना भूल जाता था और उनसे मिलना भी ज़रूरी नहीं समझता था. अगर किसी दिन ऐसा हो की उसे अपने माता पिता की पूरी देखभाल करनी पड़े तो वो कैसे करेगा? अब तक तो उसके पास मैं थी–एक फुल टाइम नर्स जो हर समय सेवा के लिए तैयार थी.

ये भी पढ़े: सात साल की शादी, दो बच्चे, हमें लगा था की हम सबसे खुशकिस्मत है और फिर…

जब मैंने अपने दोस्तों और सहकर्मिओं के साथ इस बारे में बात की, तो मैंने महसूस किया की मैं अकेली नहीं नहीं थी. हर जगह वर्षों से ही महिलाएं पीड़ित थी और वो चुपचाप ये सब सह रहीं थी. हम क्यों इन रिवाज़ों और विचारधारों को आज भी मानते है अगर उनकी कोई तुक नहीं है? एक समय था जब संयुक्त परिवार खेती पर निर्भर होते थे और इसलिए उन परिवारों और उनकी सम्पति को संभाल कर रखना अनिवार्य होता था.

हम क्यों नहीं अपने साथ किये गए इस व्यवहार के खिलाफ आवाज़ उठाते हैं? क्यों इंतज़ार करते है अपने सब्र के बाँध के टूटने का? ये ज़रूरी है की हम औरतें तरह के सामाजिक शोषण के खिलाफ आवाज़ उन्हें ताकि आगे जाकर हमारे बच्चों को और हमें तकलीफों का सामना न करना पड़े.

उसकी मां ने कभी उसके पिता को नहीं छोड़ा लेकिन इसकी बजाय उन्होंने आत्महत्या कर ली

लोग अफेयर करने के लिए ये 6 कारण देते हैं

जब हमने एक गोल्ड डिगर को अपने घर की बहु के लिए चुना

Tags:

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

This website uses cookies to ensure you get the best experience on our website.