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जब आप साथी के साथ भावनात्मक अंतरंगता चाहते हैं तो ये 5 प्रश्न पूछिए

एक स्वस्थ संबंध के लिए भावनात्मक अंतरंगता शारीरिक अंतरंगता जितनी ही महत्त्वपूर्ण है।
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सिर्फ बिस्तर पर ही नहीं

अंतरंगता हमेशा बिस्तर पर ही नहीं होती, यह दो दिलों के बीच भी होती है। इसे इस तरह सोचो। आप एक जोडे़ के रूप में केवल बच्चे पैदा करने के लिए, या समाज में उपस्थिति बनाए रखने के लिए या फिर घूमने फिरने और रेस्त्रां में जाने के लिए ही साथ में नहीं हैं। आप संभावित रूप से आजीवन सहयोग की तलाश में हैं। कोई ऐसा व्यक्ति जो आपके जीवन का साक्षी बने। जब आप ऐसी कोई चीज़ चाहते हैं, लेकिन संबंध की गुणवत्ता पर काम नहीं करते, संबंध खत्म हो जाते हैं या विषाक्त हो जाते हैं और आप अकेले हो जाते हैं। संबंध की पूरी अवधारणा दो लोगों के एक साथ दुखी होने के बारे में नहीं बल्कि खुश होने के बारे में है।

जब एक जोड़ा साथ में रहने, हँसने और प्यार करने के लिए एकसाथ आता है, तो भावनाओं का एक जटिल जाल बन जाता है जो किसी व्यक्ति की आदतों या प्राथमिकताओं को जानने से कहीं ज़्यादा है। एक संबंध में वह ऊर्जा भावनात्मक अंतरंगता है।

खुश रहने के लिए आपको भावनात्मक अंतरंगता विकसित करने की ज़रूरत है और यह बस बात करने से ही हो सकता है। यहां कुछ संदर्भ बिंदु हैं।

मुझे अपने बचपन के बारे में बताओ

अगर आपकी शादी हो चुकी है या आप एक दीर्घकालीन संबंध में हैं, तो इतने समय साथ रहने के कारण आपको अपने साथी के बचपन के बारे में बहुत कुछ पता होगा। हालांकि, अगर आप अब भी हनीमून के चरण में हैं, तो आपको इन चीज़ों का पता लगाने के लिए समय चाहिए होगा। एक व्यक्ति के रूप में हम कैसे हैं, ये हमारे बचपन के अनुभव तय करते हैं। हालांकि वे अक्सर हमें परिभाषित नहीं कर सकते, वे हमारे व्यवहार की व्याख्या ज़रूर कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी अजनबी या परिवार के सदस्य द्वारा शोषण, आपके व्यक्तित्व को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है। आपके साथी को जानना, और समझना कि वे ऐसे क्यों हैं, उनके प्रति सहानुभूति रखने के लिए और भावनात्मक अंतरंगता विकसित करने के लिए महत्त्वपूर्ण है।

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क्या मैं स्वयं से प्यार करता हूँ?

भले ही यह कितना भी नए ज़माने का और आध्यात्मिक लगे, अनुसंधान ने यह साबित किया है कि जो स्वयं के प्रति प्यार व्यक्त करते हैं, जो स्वयं को पसंद करते हैं और जिनका एक स्वस्थ आत्म-सम्मान होता है, वे बेहतर साथी बनते हैं। आपको बार-बार अपने साथी को यह आश्वस्त करने की ज़रूरत नहीं है कि वे प्यार करने योग्य हैं या फिर उनकी ईर्ष्या को दबाने की ज़रूरत नहीं है। वे निश्चिंत लोग हैं। स्वयं से यह पूछना कि क्या आप ये सब हैं, एक संबंध के लिए महत्त्वपूर्ण है। यह प्रश्न आपको स्वयं की भावनाओं के साथ संपर्क करने का अवसर देता है और यह आपको आपके साथी से इत्तेफाक रखने में मदद कर सकता है।

मेरे बारे में तुम्हें क्या अच्छा लगता है?

अपने साथी से यह प्रश्न पूछने पर आपको हास्यास्पद और गहरी प्रतिक्रियाएं प्राप्त हो सकती हैं। लोग सामान्य रूप से एक दूसरे को ‘मैं तुमसे प्यार करता हूँ’ और ‘मैं तुम्हें पसंद करता हूँ’ विभिन्न रूपों में कह सकते हैं लेकिन इन चीज़ों के बारे में कोई भी विशिष्ट रूप से नहीं कहता। अपने साथी और स्वयं को यह अभ्यास करने के लिए प्रेरित करने से आप दोनों फिर से एक दूसरे की सराहना करने लगेंगे। यह वरदानों को गिनने जैसा है और यह आप दोनों के बीच भावनात्मक और शारीरिक अंतरंगता को फिर से जीवंत करने में सहायक हो सकता है।

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हमारी भावनात्मक आवश्यकताएं क्या हैं?

यह एक कठिन चर्चा है, इसलिए पहले यह जान लिया जाए कि यह क्या नहीं है। यह एक दूसरे को बताने का तरीका नहीं है कि आपको एक दूसरे के साथ क्या ‘ज़्यादा’ करना चाहिए। यह कोई आलोचना का सत्र या फिर ट्रिगर नहीं है जो उंगली उठाने या झगड़ा करने का कारण बने। खैर, यह चर्चा इस बारे में है कि आप दोनों को भावनात्मक रूप से किस चीज़ की आवश्यकता है। यह वफादारी, सराहना, आभार, सम्मान की भावना, प्यार की अधिक मौलिक अभिव्यक्ति, अधिक तवज्जो, कम तवज्जो, आदि है। जब आप एक दूसरे से ये प्रश्न पूछते हैं, इसे इस तरह मत कहिए ‘‘मैं तुम्हारे लिए और क्या कर सकता हूँ?’’ इसकी बजाए अपने साथी से पूछिए, ‘‘तुम्हारे अनुसार भावनात्मक रूप से तुम्हें किस चीज़ की ज़रूरत है?’’। यह आप दोनों को उस चीज़ की तस्वीर प्रदान करेगा जो आप दोनों के लिए महत्त्वपूर्ण है और आप दोनों एक दूसरे को इन भावनाओं को महसूस करवाने में मदद कर सकते हैं।

क्या आप दोनों वास्तविकता को स्वीकार कर सकते हैं?

अगर आप दोनों या किसी एक ने महसूस किया है कि आपका संबंध कठिनाइयों से गुज़र रहा है, क्या आप दोनों, एक-दूसरे के विचार को खारिज किए बिना इसे समझ सकते हैं? क्या आप गर्मागर्मी के बगैर ये चर्चाएं कर सकते हैं, और इसके बारे में ईमानदारी से बात करने की कोशिश कर सकते हैं? क्या आप में से कोई एक इनकार करता है? समस्या को सुलझाने में पहला कदम समस्या को स्वीकार करना है ना कि उसे मिथ्या मानकर खारिज करना। ऐसा करने की क्षमता आपको दो विरोधी पक्षों से एक टीम में बदल सकती है जो समस्या के विरूद्ध हो।

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