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वो मुझसे बड़ी थी और उसके प्यार में मैं बदल गया

ज़िन्दगी आपको हमेशा वो नहीं देती जो आपको चाहिए, मगर फिर भी कभी कभी कुछ ऐसे लम्हे मिल जाते हैं, जिनकी तासीर हमेशा आपके साथ रह जाती है.
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नवंबर का वो सुहाना दिन था, और हम दोनों क्लाइंट से मिलने के बाद ऑफिस वापस जा रहे थे. हम दोनों गुरुग्राम की एक मार्केटिंग कंपनी में कार्यरत थे. मैं चुपचाप बैठा था और वो भी कुछ नहीं बोल रही थी.

मैं बहुत अंतर्मुखी हूँ

अक्सर महिलाओं के साथ बातचीत का अनुभव थोड़ा कष्टप्रद ही रहा है. और ये इसलिए क्योंकि मैं अंतर्मुखी हूँ. मेरा ये मानना है की बात करने की कला में हर कोई निपुण नहीं होता है. ज़्यादातर लोग तो सिर्फ ये कामना ही रखते हैं की काश वो भी बातें करना जानते. तो हमारी क्लाइंट मीटिंग के दौरान भी मैं अधिकतर शांत ही रहा और उसने ही ज़्यादा बातें की. मैं तो बस वक़्त वक़्त पर हम्म्म और सर हिला कर अपनी मौजूदगी का एहसास करा रहा था.

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