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जब मुझे और मेरे बेस्ट फ्रेंड को एक ही लड़के से प्यार हो गया

क्या होता है जब एक लड़की और एक लड़का, जो खुद बेस्ट फ्रेंड हो, एक ही लड़के से प्यार करने लगें.

जैसा निहारिका नंदी को बताया गया
(पहचान छुपाने के लिए नाम बदले गए हैं)

मैं जहाँ तक याद कर पाती हूँ, मुझे बार बार अपनी दोस्ती उस पड़ोस के दुबले पतले लड़के के साथ याद आती है. मैं दस साल की थी और हम दोनों बहुत मजे किया करते थे. अली दुसरे लड़कों जैसा नहीं था. वो क्रिकेट, फुटबॉल जैसे खेल न खेल कर गुड़ियों के साथ , ब्लैक से ज़्यादा पीला पसंद करता था, मार दाढ़ वाली फिल्में न पसंद कर मेरे जैसी फिल्में पसंद करता और उसके मज़ाक बहुत अलग होते, जिन्हे सुन कर हम दोनों ही हँसते हँसते लोट पोट हो जाते. जब दो लोग अपनी ज़िन्दगी के पंद्रह कीमती साल रोमांटिक कॉमेडी फिल्में, ऑस्कर के रेड कारपेट वेशभूसा और बीटल्स के गानों के साथ बिताते हैं तो वो गहरे दोस्त बन ही जाते हैं.

मुझे अली की सबसे अच्छी बात ये लगती थी की मैं अपने सबसे छुपे और गहरे राज़ भी उसे बता सकती थी और वो मुझे और हम दोनों एक दुसरे को किसी सही गलत के तराज़ू में नहीं आंकते.

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फिर एक नया लड़का आया

अली सबसे अच्छा था मगर फिर हमारे पड़ोस में एक नया लड़का आया. अदित सक्सेना शालीन गबरू जवान था और उसे एक बार वो भारी भारी बक्से उठा के देख कर ही किसी भी २७ वर्षीया स्त्री उसके प्यार में पड़ सकती थी. एक दिन मैं और अली यु ही डिनर के बाद तफरीह कर रहे थे जब अदित ने हमसे पुछा की क्या वो भी हमारे साथ वाक कर सकता है क्योंकि वो वहां किसी को नहीं जानता है. उस दिन चलते चलते हमने अदित के बारे में बहुत कुछ जाना — जैसे ये की वो अपनी जड़ों से पहचान करने भारत आया है, वो बहुत ही शानदार फूटबाल खेलता है और किसी दिन वो इस खेल में ही आगे बढ़ना चाहता है और सबसे ख़ास बात ये की वो बहुत ही मज़ाकिया है. आप उसकी बातें सुनते सुनते घंटो बिता सकते थे बिना बोर हुए या थके.

जल्दी ही मुझे महसूस होने लगा की मुझे अदित ज़्यादा ही अच्छा लगने लगा है. एक दिन हम दोनों एक फिल्म देख रहे थे जब मेरे कुछ बोलने से पहले ही अली ने कबूल किया की उसे अदित से प्यार होने लगा है.

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“मगर तुम उसे कैसे पसंद कर सकते हो. वो स्ट्रैट है और तुम्हे शुरू से ही पता था की मुझे उसमे दिलचस्पी है!” मैंने उसे कहा.

“वो दोनों में ही उत्सुक है. और मैं जब उससे पहली बार मिला था, मुझे वो तब से ही पसंद है.”

“तुम बकवास कर रहे हो. तुम बहुत घटिया हो और चाहते हो की पड़ोस के सारे लड़के गे हो!”

“ओह्ह! तो तुम्हे लगता है की मैं इतना गिरा हुआ हूँ की हर लड़के में मुझे दिलचस्पी होगी?”

बातचीत जल्दी ही एक लड़ाई में बदल गई और मैं और अली एक दुसरे को बहुत भला बुरा बोलने लगे. अंत में अली ने कहा,”देखते हैं की ये किसे मिलता है!”

अब हम एक महायुद्ध में थे

मैंने अली की उस बात को एक चुनौती की तरह लिया और अगले दिन अदित के घर उसकी पसंद के गायकों का एक टेप साथ ले गई. वहां पहुंची तो देखा की अली वहां पहले से ही बैठा था और दोनों बैठ कर कूकीज खाते हुए गप कर रहे थे, जो अली अपने साथ लाया था.

ये अब कोई छोटी मोटी लड़ाई नहीं थी. अब ये युद्ध था हम दोनों के बीच उस लड़के के लिए, जिसे मैं और अली दोनों ही प्यार करते थे.अदित को रिझाने में आने वाले कई दिन चले गए. कभी उसे उसकी पसंदीदा चीज़ें उपहार में देती, कभी उसे बाहर ले जाती मगर फिर भी इन सब के बीच कई बार एक अकेलापन भी महसूस हो रहा था.

मेरे अली के आलावा भी कई दोस्त थे मगर वो पागल अजीब सा मेरा दोस्त मुझे सबसे प्रिय था. जब मुझे नौकरी में पहली तरक्की मिली, मैंने सबसे पहले अली को ये बात बताने की सोची. जब मेरी तबियत ख़राब हुई तो मैं अली और उसके ज़बरदस्ती मुझे सुप पिलाने की आदत को मिस करने लगी. मैं हमदोनों के बीच की बातों को मिस कर रही थी. ज़िन्दगी में एक खालीपन सा लग रहा था.

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मैं तुम्हे मिस कर रही हूँ!!!

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मेरे सब्र का बाँध तब टूटा जब दो महीने बाद मेरा एक एक्सीडेंट हो गया. मेरे बाएं पैर की हड्डी टूट गई थी और मेरे माथे पर भी टांकें लगाए गए थे. जब मैंने आँखें खोली तो एक पतला सा लड़का मेरे हॉस्पिटल के बिस्तर के बगल में खड़ा था और उसके हांथों में फूल और चॉक्लेट थी.

“मुझे पता है की हॉस्पिटल का खाना बहुत बुरा होता है. इसके दो टुकड़े खा लो, अच्छा लगेगा,” अली ने मेरे हाथ में चॉक्लेट देते हुए कहा. अचानक मुझे वो शारीरिक दर्द तो महसूस ही नहीं हो रहे थे. मेरे अंदर तो भावों का जैसा सैलाब आ गया था. हम दोनों ही फुट फुट कर रोने लगे और एक दुसरे को बताया की कैसे एक दुसरे के बिना हमारी ज़िन्दगी बिलकुल अधूरी और अकेली हो गई थी. मुझे इस बात का सुकून था की अली ने मुझे उन कटु बातों के लिए माफ़ कर दिया था.

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एक हफ्ते बाद अली मेरा हाथ पकड़ कर मुझे चलाने की कोशिश कर रहा था. मैंने उसकी तरफ देखा और सोचा की हम दोनों कैसे किसी लड़के के लिए आपस में यूँ लड़ सकते थे. हमने अपनी ज़िन्दगी की शायद सबसे बड़ी गलती एक ही लड़के से प्यार करने की की थी.

दो महीने एक दुसरे से बिना कोई बात किये हम ये बात बहुत अच्छे से समझ गए थे की लड़के तो आते जाते रहेंगे मगर ये सनकी पागल दोस्त मेरे साथ हमेशा रहेगा.

दो साल बाद मैं और अली एक साथ अदित की सगाई में गए.

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