भारत में लिव-इन संबंध में रहने की चुनौतियां

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बॉलीवुड के सितारों, विदेशी प्रभाव और हमारी अपनी बदलती सोच के कारण आज लिव इन हमारे समाज में लोकप्रिय हो रहा है, मगर फिर भी यह हमारे लिए एक नयी सोच है. आइये बातें करें उन चुनौतियों की जो सामने आती है जब दो लोग बिना विवाह में बंधे साथ रहने का निश्चय करते हैं.

लिव-इन संबंध कई युवा भारतीय जोड़ों के प्रेम जीवन का विकास है जिसका पालन बहुतायत में किया जाता है। बल्कि, अगर हम कहें कि इसने विवाह का स्थान ले लिया है/ उसे विलंबित कर दिया है, तो यह अतिश्योक्ति नहीं होगी। हॉलिवुड की बहुत सी फिल्में और पश्चिमी टीवी शो देखने के बाद, आप भी मान चुके हैं कि सीधे विवाह में छलांग लगाने से कहीं बेहतर है पहले लिव-इन में रहना। कई बॉलिवुड सितारों द्वारा इस का इस्तेमाल करने से यह अवधारणा भारत में काफी लोकप्रिय हो गई है। फिल्में, टीवी धारावाहिक, आपका मोहल्ला -लिव इन संबंध कम से कम महानगरों में तो आपके जीवन के सभी क्षेत्रों में लोकप्रिय हैं। यह बहुत व्यवहारिक प्रतीत होता है और शादी से पहले थोड़ा सा प्रशिक्षण आप दोनों में से किसी को भी नुकसान नहीं पहुंचा देगा, है ना?

देखिए, पूरी तरह नहीं! यहां पर आप एक बहुत महत्त्वपूर्ण वस्तु भूल गए हैं। आपका देश और वह समाज जिसमें आप रहते हैं। भारत कई मोर्चों पर तेज़ी से स्वयं का आधुनिकीकरण कर रहा है। हालांकि, लिव-इन संबंध उनमें से एक नहीं हैं। अभी तक इतने नहीं हैं।

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हालांकि यह एक ऐसी अवधारणा है जो लोकप्रिय हो रही है, खासकर महानगरीय शहरों में, लेकिन यह बहुत तेज़ी से नहीं बढ़ रही है। समाज का एक बड़ा हिस्सा अब भी लिव इन संबंधों को घृणा की दृष्टि से देखता है। अगर आपने भारत में कहीं अपने साथी के साथ रहने का फैसला किसा है, तो संभावित चुनौतियों के बारे में जानना अच्छा होगा, जिनका शायद आपको सामना करना पड़ सकता है।

Couple in a new house
एक घर ढूंढना -कठिन काम

लिव इन संबंध में रहने के कारण सामाजिक निंदा

अधिकांश भारतीय, खासकर उम्रदराज़ पीढियां, लिव-इन संबंधों को एक निषेध के रूप में देखती हैं। अत्यधिक संभावना है कि आपके माता-पिता स्वयं इस श्रेणी में आते हैं। उनके लिए, साथ में रहना एक वैध शादी के बाद ही मान्य है और लिव-इन उनकी सीमित धारणाओं के अनुरूप नहीं बैठता। जहां आप एक लिव-इन संबंध के लाभों को देख पा रहे हैं, आपके बुजुर्ग पूरी तरह से इसके विरूद्ध हैं। यह ‘पीढ़ी का अंतराल’ आपके माता-पिता के साथ आपके संबंधों को दांव पर लगा सकता है। आपको अपने परिवार के बुजुर्ग सदस्यों से कठोर प्रतिरोध का भी सामना करना पड़ सकता है और यहां तक कि आप पारिवारिक आयोजनों और समारोहों से बेदखल भी किए जा सकते हैं।

लिव-इन संबंध को गुप्त रखना

भारत में जो जोड़े लिव-इन में रह रहे हैं उनके लिए इसे अपने परिवारों से छुपाना एक तरह का चलन है। ऐसे मामलों में, जोड़े काम के सिलसिले में अपने गृहनगर से दूर रहते हैं और अस्वीकृति के डर के कारण अपने परिवारों को बताए बगैर, एक साथ रहने का निर्णय ले लेते हैं। ज़ाहिर है, यह विभिन्न जटिलताओं जन्म देता है, जैसे आपके माता-पिता के आने पर आपके साथी के अस्तित्व को पूरी तरह छुपाना, जिसमें आपके साथी का घर से बाहर रहना भी शामिल है। अगर आप इस राह पर जाने के बारे में सोच रहे हैं, तो माता-पिता की एक अनियोजित यात्रा के परिणामों के बारे में सोचें!

एक घर ढूंढना -कठिन काम

अगर आप अपने साथी के साथ रहने का प्रयास कर रहे हैं तो रहने के लिए एक घर ढूंढना अगली बड़ी चुनौती है। वैश्वीकरण के इस आधुनिक युग में भले ही यह अविश्वसनीय लग सकता है, लेकिन स्वयं के लिए एक घर ढूंढना महानगरीय क्षेत्रों में भी काफी कठिन हो सकता है। बहुत कम लोग आपको अपना घर किराए पर देने के लिए तैयार होंगे। अगर आप एक फ्लैट खरीदने का फैसला लेते हैं, तो आपको भवन के परिसर या मोहल्ले के अन्य लोगों से सामाजिक निंदा का सामना करना पड़ सकता है। इस चुनौती का सामना करने के लिए कई जोड़े स्वयं को झूठे तौर पर विवाहित घोषित कर देते हैं।

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Couple planning their finance
आर्थिक/ कैरियर की चुनौतियों का सामना करना मुश्किल हो सकता है

वित्तीय दबावों के साथ जूझना

जानते हैं? एक साथ रह रहे भारतीय जोड़े की सफलता पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करती है कि वह वित्तीय दबावों को किस तरह संभालता है। घरेलू बजट या घर के वार्षिक किराये के प्रबंधन सहित खर्च का अतिरिक्त भार संभालना अलग बात है, लेकिन क्या आप बड़ी वित्तीय जटिलताओं से निपटने के लिए तैयार हैं? कुछ मामलों में, हो सकता है एक साथी, साथ रहने पर सारी बचत निवेश कर दे, जबकि दूसरा साथी सारे आर्थिक पत्ते ना खोले। या तो वे एक दूसरे से व्यक्तिगत ऋण या फिर वेतन छुपा सकते हैं। यह आपको एक आर्थिक रूप से शोषण करने वाले संबंध में डाल सकता है। क्या आप इसके लिए तैयार हैं?

आर्थिक/ कैरियर की चुनौतियों का सामना करना मुश्किल हो सकता है

इन परिदृश्यों की कल्पना कीजिए – अगर आपके साथी को नौकरी से निकाल दिया गया है, या अपने व्यवसाय के सेटअप में वह लगातार नुकसान उठा रहा है, तो आप क्या करेंगे? क्या आप इस संबंध से बाहर जाना पसंद करेंगे या भावनात्मक रूप से उनकी मदद करेंगे, और इस तरह की मुसीबत में आर्थिक रूप से उनकी सहायता करेंगे? भले ही ‘शादी’ जैसी कोई कागज़ी प्रतिबद्धता नहीं है, फिर भी आप दोनों ‘प्यार’ के प्रति प्रतिबद्ध हैं। अगर आप एक दूसरे से प्यार करते हैं, तो उनकी आंतरिक अशांति को समझिए, उनका अंदरूनी आत्मविश्वास पाने में उनकी मदद कीजिए और सभी उतार चढ़ावों में उनकी सहायता कीजिए। लिव-इन में प्रवेश करने से पहले, समझें कि यह निरंतर चलने वाला काम है और सभी प्रकार की चुनौतियों का सामना करने के लिए जोड़ों को बहुत कुछ निवेश करने की ज़रूरत है। कैरियर या व्यापार की कठिन चुनौतियों के दौरान अनवरत भावनात्मक सहयोग आपके संबंध का स्वरूप ही बदल सकता है। इसलिए संभावित वित्तीय जोखिमों के बारे में सोचें और लिव-इन में रहने के लिए वचनबद्ध होने से पहले किसी भी परिस्थिति में एक दूसरे का साथ देने के लिए अपने मन को तैयार कीजिए।

Couple arguing inside car
लिव इन में ‘स्वयं का समय’ नहीं

एकरसता में फंसना

एक साथ रह रहे कई जोड़ों को अपने डेटिंग के दिन याद आते हैं। वे जो अभी स्पष्ट नहीं हैं कि क्या वे प्रतिबद्धता के लिए तैयार हैं, अपने संबंध के आनंद वाले समय की तुलना वर्तमान की चुनौतियों से कर बैठते हैं। साथी की व्यस्त व्यवसायिक दिनचर्या कई बार खलनायक बन सकती है, जिससे रोमांस में असंतोष आ सकता है। एक/ दोनों को लग सकता है कि अब उनका साथी पहले जैसा नहीं रहा। वे जीवन में डेटिंग के आनंद और रोमांच की कमी महसूस कर सकते हैं। ऐसे जोड़ों के लिए, यह एक वास्तविकता की जांच है। जीवन हैप्पिली एवर आफ्टर की एक खुशनुमा तस्वीर नहीं है, और भारत में लिव-इन कई जोखिमों और दबावों का सामना करते हैं। लेकिन, यदि आप एक दूसरे की ओर प्रतिबद्ध हैं, तो एकरसता की चुनौतियों को देर रात की ड्राइव, कुछ उपहार, डेट की रातों, और बहुत सारे आलिंगनों से जीता जा सकता है।

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लिव इन में ‘स्वयं का समय’ नहीं

किसी व्यक्ति को डेट करना और किसी के साथ पूरा समय साथ होना एक पूरी तरह से अलग अनुभव है। घर में निरंतर साथ के कारण, लिव-इन वाले साथी को उनके जीवन में निजता की और स्वयं के समय की कमी महसूस हो सकती है। यह नियंत्रित किए जाने की भावना एक कटु ब्रेकअप का कारण बन सकती है। लेकिन अगर आप अपने लिव-इन साथी के साथ खुले हैं और अपने स्वयं के समय के बारे में अपने साथी से चर्चा करते हैं, तो आप दोनों के लिए चीज़ें काफी आसान हो सकती हैं। अपने परिप्रेक्ष्य में बदलाव करने के लिए, अपनी रूचियों और शौक पर ध्यान केंद्रित करने के लिए और अपने दोस्तों के करीब आने के लिए थोड़ा समय बचा कर रखिए। लिव-इन संबंध की लंबी उम्र के लिए एक दूसरे के निजी स्थान का सम्मान करना आवश्यक है। अच्छा ‘स्वयं का’ समय बिताने के बाद अपने साथी पर भी ध्यान केंद्रित कीजिए और उसका महत्त्व समझिये। अच्छा भोजन बनाइये, डेट नाइट की योजना बनाइये, एक फिल्म या स्टैंड-अप कॉमेडी शो की टिकट बुक कीजिए। उन्हें दिखाइये की आप उनकी कितनी परवाह करते हैं और देखिए की वे आपकी प्यार भरी कोशिशों पर कितनी अच्छी प्रतिक्रिया देते हैं।

Sad man
अनियोजित गर्भधारण के बाद ‘माँ’ को त्याग देना

अनियोजित गर्भधारण के बाद ‘माँ’ को त्याग देना

एक ऐसे देश में जहां शादी से पहले सेक्स अब भी निषिद्ध है, अनियोजित गर्भधारण लिव-इन जोड़ों के लिए अब भी बहुत बड़ी चुनौती है। यह चुनौतिपूर्ण स्थिति दोनों साथियों के लिए परीक्षा की घड़ी हो सकती है, खासकर तब जब वे अपनी दीर्घकालिक योजनाओं या विवाह के बारे में निश्चित नहीं हैं। कुछ जोड़े इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए साथ मिलकर गर्भपात का फैसला कर सकते हैं। यहां तक की भारतीय कानून भी एक स्त्री को अपने लिव-इन संबंध में गर्भपात का निर्णय करने का अधिकार देता है। लेकिन फिर भी, राय के संघर्ष के कारण जोड़ों में आपसी टकराव हो सकता है। हो सकता है कि स्त्री अनियोजित बच्चा चाहती हो लेकिन पुरूष नहीं चाहता। कठोर परिणाम ब्रेकअप तक का कारण बन सकते हैं। यदि माँ बच्चे को अकेले पालने का फैसला लेती है, तो वे भारत में सामाजिक कलंक के भोगी बन सकते हैं।

अनियोजित गर्भधारण के बाद शादी की जटिलताएं

यदि बच्चे का पिता प्यार के कारण ‘गर्भवती माँ’ से शादी करने का फैसला कर लेता है, फिर से लिव-इन जोड़े के सामने कई अवांछित दबाव आ जाते हैं। पहली चुनौती दोनों परिवारों को शामिल करना, गर्भावस्था जो इस समय की सबसे बड़ी सच्चाई है, उसे प्रकट करना और उन्हें आपके विवाह के लिए मनाना है। अब ऐसी स्थिति की कल्पना कीजिए जहां परिवारों को यह भी नहीं पता है कि उनके बच्चे साथ में रह रहे हैं। और अब, उन्हें परिवार की प्रतिष्ठा को ध्यान में रखते हुए ‘समझौता’ करना पड़ेगा। कई बार, ऐसे माता-पिता उसे आवश्यक मान कर ऐसे जोड़ों को एक सरल विवाह के साथ आर्शिवाद देते हैं। लेकिन संबंध को स्वीकार करने में उन्हें कई साल लग सकते हैं।

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शोषण का सर्वाधिक जोखिम

भारत के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले, जो लिव-इन संबंध में रहने वाली स्त्री को पत्नी का अधिकार देता है, उसके बावजूद सामाजिक सुरक्षा की कमी उन्हें एक बड़े पैमाने पर अपमानजनक संबंध का भुक्तभोगी बना सकती है। एक महिला गलत पुरूष पर भरोसा कर सकती है और अपनी सारी वित्तीय संपत्ति या बचत गंवा सकती है। अगर वह नियंत्रित करने वाली प्रवृत्ति का है, तो हो सकता है कि वह घर में अपनी इच्छानुसार चीज़ों की मांग करे, जिसके कारणवश बहुत सी बहस और झगड़े भी हो सकते हैं। दुर्व्यवहार की कहानियां गाली-गलौच, यौन उत्पीड़न और भावनात्मक ब्लैकमेल जैसे विषाक्त प्रभावों की एक श्रृंखला के साथ उग्र मोड़ भी ले सकती हैं। सामाजिक स्वीकृति और परिवार की भागीदारी ना होने के कारण, स्त्री को अकेले ही शोषण सहन करना पड़ सकता है।

हमारे बोनोबोलॉजी के सलाहकार ऐसे भारतीय जोड़ों को सलाह देते हैं कि वे लिव-इन में जाने से पहले संभावित सामाजिक चुनौतियों और जोखिमों को समझें। यकीन मानिये; लिव-इन एक ऐसी नई शुरूआत हो सकती है, जो एक जोड़े के रूप में आप दोनों तलाश रहे हैं। इसलिए संबंध की चुनौती को स्वीकार कीजिए और एक जोड़े के रूप में पहले से भी अधिक मजबूती से उभरिये।

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