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भारतीय महिला सिर्फ लजा के ही प्यार क्यों दर्शाती है?

हमेशा पुरूषों को ही क्यों पहल करनी चाहिए सेक्स में? एक स्त्री क्यों नहीं अपनी यौन इच्छाएं दर्शा सकती?
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जब वह आपको चुम्बन देने के लिए नीचे झुकता है तो कितनी बार आपने मुंह की बजाए गाल प्रस्तुत किया है? अनगिनत बार, है ना?

एक राष्ट्र के रूप में, हमारी स्त्रियों को कभी भी प्रेमी की ओर झुकते हुए चित्रित नहीं किया जाता है। एक प्रेमी की आंखों में देखने की बजाए स्त्री को हमेशा परे देखते हुए दर्शाया जाता है। हमने स्वाभाविक रूप से रोमांस की इस लोकप्रिय धररणा को मान लिया है जहां नायक स्त्री की एक झलक पाने के लिए भूखा है, और स्त्री या तो दबे होंठों के साथ आखें बंद करती दिखती है या फिर जब वह सही समय आता है जब उसे अपने प्रेमी को गले लगाना है, वह दूसरी ओर देखती है या बस अपनी आंखे झुका लेती है।

परे देखने को उस मुख्य रूमानी इशारे के रूप में देखा जाता था जो एक स्त्री दे सकती थी।

कोमल और शर्मीली होना, कांपना और सीमित होना, यही स्त्री के सबसे अधिक कामुक होने के लक्षण थे। मुझे याद नहीं कि किसी अग्रणी स्त्री ने कहा हो, ‘पहलू में आ जाओ’, या ‘आओ, मैं तुम्हें गले लगा लूं’। क्या सिनेमा निर्माताओं और कला निर्माताओं ने पितृसत्ता के अपने स्वयं के विचित्र विचारों को आगे बढ़ाया या वे पारंपरिक लड़के थे, जो वह चित्रित करने का प्रयास कर रहे थे जो उन्होंने बड़ा होते हुए सीखा था?

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