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भारतीय मुस्लिम शादियों के अनूठे रिवाज़

सभी भारतीय शादियों के रीति-रिवाज़ की अनूठी श्रृंखला होती है। देखिए एक पारंपरिक मुस्लिम शादी कैसी होती है
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किसी के भी व्यक्तिगत जीवन में एक भारतीय शादी सबसे बड़ी घटना है। बच्चे के जन्म सहित अन्य सब कुछ इसके सामने फीका है। ऊपर से हमारा बहु धार्मिक और बहु-सांस्कृतिक राष्ट्र। हर समुदाय के विवाह के रीति रिवाज़ अनूठे होते हैं और कुछ देश के अन्य रीति-रिवाज़ों को प्रतिबिंबित करते हैं। इस्लामी शादियां कोई अपवाद नहीं हैं। भारतीय मुस्लिमों द्वारा अपनाए जाने वाले कुछ अनोखे और कुछ दूसरों से प्रेरित रिवाज़ हैं।

निकाह से पहले

इश्तिखारा और इमाम ज़मीन

जब शादी तय हो जाती है, तो परिवार के बड़े या इमाम, जोड़े के मिलाप के लिए ईश्वर का आर्शिवाद लेते हैं। इसे इश्तिखारा कहते हैं। इसके बाद, दुल्हे का परिवार दुल्हन के घर जाता है, और दूल्हे की माँ रेशम में लिपटा हुआ सोने या चांदी का सिक्का दुल्हन की बाँह में बांधती है। यह उनके परिवार में उसकी स्वीकृति का प्रतीक है और उसकी शुभकामनाएं और समृद्धि की कामना करता है।

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मांझा या उबटन
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भारत में ऐसे अन्य विवाह रिवाज़ों की तरह, शादी से सिर्फ कुछ दिन पहले ही मांझा समारोह आयोजित होता है। पीले रंग के कपड़े पहनी हुई दुल्हन को मित्रों और परिवार के सदस्यों द्वारा हल्दी, चंदन, गुलाब जल, खस और अन्य जड़ी बूटियों का विशिष्ट घोल लगाया जाता है। यह एक हल्के-फुल्के माहौल वाली शाम होती है, जहां कुछ परिवारों में लोक गीत भी गाए जाते हैं। इस समारोह के बाद, वह शादी के दिन तक अपना घर नहीं छोड़ती है।

रतजगा

यह शादी की पूर्व रात है जिसे पश्चिमी संस्कृति एक बैचलर्स नाइट या हेन डू के रूप में मनाती है। मुस्लिम विवाह भी इसे होने वाले दूल्हे और दुल्हन के कुंवारेपन की अंतिम रात के रूप में, अलग-अलग मनाते हैं। लेकिन ऐसे लोगों के बिना जो पेट पालने के लिए कपड़े उतारते हैं! फिर भी, उसके बिना भी चीज़ें साहसी हो जाती हैं। आलिया, एक नई दुल्हन अपने रतजगा को याद करते हुए कहती है, ‘‘पूरा परिवार बात करते हुए, गाना गाते हुए और बस मज़ा लेते हुए पूरी रात जागा था। और मानो या ना मानो, मैं अपनी पहली सिगरेट पीने और कुछ कश मारने में कामयाब हुई थी। मेरे परिवार में यह वाकई कलंक है, तो यह वाकई में एक क्षण था जिसे मैं हमेशा याद रखूंगी।”

निकाह

विवाह इस्लाम में एक अनुबंध है और निकाहनामा कर्तव्यों और ज़िम्मेदारियों के साथ इस अनुबंध की रूपरेखा है।

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सहमति लेने के लिए मौलवी पहले दुल्हन के पास जाता है। दुल्हन को पहली प्राथमिकता दी जाती है और यह सुनिश्चित करने के लिए तीन बार पूछा जाता है कि क्या वह मिलन के बारे में पूरी तरह निश्चित है। इसके बाद दूल्हे से उसकी सहमति पूछी जाती है। जब दोनों सहमत हो जाते हैं, वे निकाहनामा पर हस्ताक्षर करते हैं और विवाहित हो जाते हैं। निकाहनामा में दूल्हे की ओर से दुल्हन के लिए एक उपहार भी होता है जिसे मेहर कहा जाता है। इस्लाम में इसे दुल्हन का अधिकार माना जाता है और यह दुल्हन की संपत्ति है। यह दूल्हे की आर्थिक स्थिति के अनुसार तय किया जाता है।

निकाह के बाद

अर्सी मुशरफ

इस समारोह को निकाह जैसी फिल्मों द्वारा व्यापक रूप प्राप्त हुआ है। जब दुल्हा और दुल्हन शादी के लिए हां कह देते हैं, वे शीशे में एक दूसरे का प्रतिबिंब देखते हैं। उनके ऊपर एक दुपट्टा या चादर रखा होता है और पारंपरिक अरेंज मैरिज में ये उन्हें एक दूसरे की झलक प्रदान करते हैं। उन्हें आर्शिवाद देने के लिए पवित्र कुरान भी वहां होती है। आफरीन का अर्सी मुशरफ के साथ एक पारंपरिक कश्मीरी विवाह हुआ था। वह इसे चाव से याद करते हुए कहती है, ‘‘ना केवल कुरान के साथ यह एक दिव्य आर्शीवाद था, लेकिन शीशे में पहली बार अपने पति को देखना स्वप्निल और आध्यात्मिक दोनों था। वह अब भी मुझे चिढ़ाता है कि मेरे गाल शर्म से कैसे लाल हो गए थे! लेकिन यह वास्तव में एक विशेष क्षण था, जिसने मेरे जीवन के सबसे विशेष संबंध की शुरूआत की।”

रूखसती

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विदाई की ही तरह, रूखसती दुल्हन और उसके परिवार के लिए एक भावनात्मक क्षण है। वह अपने पैतृक घर से अपने पति के घर जाती है। दुल्हन का पिता दुल्हन का हाथ अपने नए दामाद को देता है, और कहता है कि उसकी देखभाल और रक्षा करे। वह अपनी 6सास का हाथ पकड़ कर घर में प्रवेश करती है, सिर पर कुरान रखते हुए, ताकि घर में उसके पहले कदमों को आर्शीवाद मिले।

वलीमा

मिलन का जश्न मनाने के लिए दूल्हे के परिवार द्वारा यह रिसेप्शन दिया जाता है। आमतौर पर यह विवाह के एक दिन बाद आयोजित किया जाता है और यह शादी परिपूर्ण होने का भी उत्सव है। दूल्हे का परिवार मित्रों और परिवार के लिए एक भव्य दावत देता है, और उसके विस्तरित परिवार में भी दुल्हन का परिचय करवाया जाता है। नवविवाहित जोड़े को सभी के उपहार एवं आर्शीवाद प्राप्त होते हैं। वलीमा विवाह समारोह के सबसे बड़े कार्यक्रमों में से एक है जहां दूल्हा और दुल्हन के परिवार नवविवाहितों को आर्शीवाद देने और खुशी के समय में शामिल होने के लिए एक साथ आते हैं।

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चौथी

वलिमा के बाद, दुल्हन एक दिन के लिए अपने घर वापस आती है। वह अपने परिवार के साथ एक दिन बिताती है। शादी के चौथे दिन पति अपने ससुराल जाता है, अपनी पत्नी को अपने साथ लाने और जीवनभर खुश रहने के लिए।

बेशक, कई अन्य रस्में भी हैं, जो एक मुस्लिम विवाह में होती हैं, जो दुल्हा और दुल्हन के धर्म द्वारा अपनाई गई होती हैं। हिंदु विवाहों की तरह, भारत में मुस्लिम विवाहों में भी जूता चुराई की रस्म होती है जहां दुल्हन की बहने दूल्हे के जूते चुराती हैं और बदले में पैसे मांगती हैं। भारत में मुस्लिम विवाह रंगीन और जश्न मनाने वाले अवसर हैं जिसमें नवविवाहितों को आर्शीवाद देने और दुनिया के सामने उनके मिलन की घोषण करने दो परिवार साथ आते हैं। और हाँ, स्वादिष्ट भोजन सोने पर सुहागा है!
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