भारतीय स्त्री के लिए साड़ी सिर्फ एक वस्त्र नहीं बल्कि एक भावना है

Sumati Gogna
lady in saree

साड़ी, बचपन की एक आम याद

ज़्यादातर लड़कियों की अपने बचपन की कम से कम एक तस्वीर होती है जिसमें उन्होंने दुपट्टा या वास्तविक साड़ी लपेट रखी है। भारतीय महिलाओं के बीच यह स्मृति इतनी आम क्यों है? शादी के दौरान साड़ी आज तक पसंदीदा पोशक बनी हुई है और ऐसा शायद इसलिए है क्योंकि यह एक लड़की के स्त्री बनने का प्रतीक है। एक साधारण साड़ी के भीतर सैकड़ो किस्में हैं, कई ड्रेपिंग शैलियां हैं और अपने व्यक्तित्व के अनुसार उन्हें पहनने के लिए कई और विकल्प हैं। किसी भी अन्य पोशाक की तरह, यह पहनने वाले के व्यक्तित्व को परिभाषित करती है। यह कपड़े और पहनने की शैली के आधार पर रिज़र्व्ड, समकालीन, फ्लर्टी, इनवाइटिंग, बोल्ड, सुरूचिपूर्ण, शाही या सरल हो सकती है।

भारतीय महिलाओं के लिए परफेक्ट

महिलाओं को साड़ी इतनी पसंद होने का कारण है कि यह भारतीय महिला के शरीर के लिए एकदम सही पोशाक है। यूरोपिय, जो अधिकतर लंबे एवं दुबले होते हैं, उनके विपरीत भारतीय महिलाएं स्वाभाविक रूप से कर्वी और आकर्षक होती हैं। वे साड़ी में सबसे ज़्यादा सुंदर दिखती हैं और यह उनके शरीर के साथ बहुत फबती है।

Pink saree

साड़ी सदियों से पहनी जा रही है

इसे पहनने के सैकड़ों तरीके हैं जो हर क्षेत्र और संस्कृति में भिन्न होते हैं। कई सालों में, पहनने की शैलियों का विकास हुआ है लेकिन उनकी वजह से इस पोशाक की सुंदरता कम नहीं हुई है। सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला प्रकार निवी कहलाता है, जो आंध्र प्रदेश से निकला है। साड़ी की लंबाई 6 से 9 मीटर तक होती है और परंपरागत रूप से, साड़ियों को धोती की तरह पहना जाता था, जिसे पहन कर काम करने में महिलाओं को आसानी होती थी।

बहुत कम लोग जानते हैं कि साड़ी बनाने के लिए कितने ज़्यादा कौशल और प्रयास की ज़रूरत होती है। जटिल बुनाई, हर बूटे को असली सोने और चांदी के धागों से बुनने और बॉर्डर पर बारीक काम के कारण एक साड़ी पूरी करने में महीनों लग सकते हैं। इन कलाकृतियों के रचैयता लोग अज्ञात चेहरे हैं जो भारत की समृद्ध संस्कृति को बनाए रखने और आगे बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

कपड़े और क्षेत्र द्वारा वर्गीकृत

साड़ी को कपास, रेशम, लिनन जेसे कई कपड़ों में बनाया जाता है, और इन्हें क्षेत्र के अनुसार आगे वर्गीकृत किया जाता है। आपकी अलमारी में कुछ अनिवार्य साड़ियों में पश्चिम बंगाल से तांत, तमिलनाडु की कांजीवरम, ओडिशा की बोम्कई, महाराष्ट्र, गुजरात से बांधनी, राजस्थान की लहरिया, ओडिशा की संबलपुरी, असम की मुगा, वाराणासी से बनारसी, तेलंगाना से पोचंपल्ली और पंजाब से फुलकारी शामिल हैं।

pink and blue saree

हर अवसर के लिए सही है

चाहे यह एक ग्लेमरस शाम हो, नौकरी पर एक सामान्य दिन हो, एक फैंसी शादी की पार्टी हो या साधारण पारिवारिक पूजा हो, एक ना एक साड़ी हमेशा होगी जो पूरी तरह से इस अवसर के लिए उपयुक्त होगी। बोम्कई जैसी कॉटन की साड़ी सरल लेकिन उत्तम दर्जे की दिखती है और आम तौर पर दैनिक रूप से पहनने के लिए और कॉर्पोरेट सेटिंग्स में भी पसंद की जाती है। एक कड़क कलफ लगी कॉटन की साड़ी जैसा जादू और कोई चीज़ नहीं कर सकती है और यह भारत के गर्म और आद्र मौसम के लिए बहुत अच्छी है। रेशम आमतौर पर उत्सव वाले अवसरों के लिए होता है और चुनने के लिए बहुत सारे विकल्प मौजूद हैं। चंदेरी रेशम से बनी साड़ियों में एक शान होती है और वे स्टाइल को बढ़ा देती हैं। फिर एक स्टाइलिश शिफॉन होती है जो आपका आकार ले लेती है और एक टोन्ड लुक देती है, नेट की साड़ी जो बाकियों की तुलना में थोड़ी ज़्यादा रिवीलिंग होती है, जॉर्जेट साड़ियां जो वज़न में हल्की होती हैं और किसी भी शाम के कार्यक्रम के लिए बिल्कुल सही होती हैं। सूची अंतहीन है और जितना ज़्यादा हम जानते हैं, चुनना उतना ही मुश्किल होता है।

साड़ी वापस आ गई है!

एक समय था जब साड़ी पहनने वाले को बोरिंग और उम्रदराज़ समझा जाता था। लेकिन समय बदल गया है और यहां तक की आधुनिक युवा लड़कियां भी समझ गई हैं कि अगर अच्छे से कैरी किया जाए तो साड़ी भी कितनी स्टाइलिश हो सकती है। कच्चे रेशम की साड़ियां लुका-छिपी का अच्छा खेल खेलती हैं जहां काफी कुछ कल्पना के लिए छोड़ा जा सकता है। साड़ी आज साधारण ब्लाउज़ को क्रॉप टॉप, शर्ट के साथ बदल कर और आस्तीनों के साथ थोड़ा सा प्रयोग करके फैशन के पुनर्निमाण में अपना योगदान दे रही है।

black saree

अपनी व्यक्तिगत स्टाइल के अनुरूप ऐसेसरीज़ पहनें

साड़ी पहनने का एक और फायदा यह है कि महिलाओं को बहुत सारी ऐसेसरीज़ पहननी मिलती हैं। सिर्फ आभूषण ही नहीं बल्कि ब्लाउज़ के पैटर्न, हैंडबैग या क्लच, जूते जो ऊंची एड़ी से लेकर फ्लेट्स तक हो सकते हैं और अतिआवश्यक बिंदियां ऐसेसरीज़ में शामिल हैं। यह उन कारणों में से एक है जिसकी वजह से 100 दिनों का साड़ी पैक्ट (2015 के अंत से पहले एक साड़ी को 100 बार पहनना) इतना हिट हुआ था और अब भी कई लड़कियों और महिलाओं द्वारा इसका पालन किया जाता है। यह ना सिर्फ महिलाओं द्वारा अपनी साड़ियों के बारे में अपनी कहानियाँ साझा करने के लिए एक श्रेष्ठ पहल थी, लेकिन ये साड़ी को फिर से सबकी नज़रों में ले आई, विशेष रूप से युवा पीड़ी के लिए। भारतीय महिलाओं के लिए साड़ी सिर्फ एक वस्त्र नहीं है बल्कि एक भावना है।

हमारे देश की इस समृद्ध परंपरा और विरासत को पोषित किए जाने, सराहे जाने और अगली पीढ़ियों को पारित किए जाने की ज़रूरत है। तो कोठरियों में बंद पड़ी वे साड़ियां निकाल लीजिए और इस सुंदर वस्त्र को पहन कर खुद की एक नई कहानी बनाने के लिए तैयार हो जाइये।

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