ब्रह्मा और सरस्वती का असहज प्यार

Urmi Chanda-Vaz
Lord Brahma

बुद्धि और ज्ञान की हिंदू देवी सरस्वती एक अद्वितीय चरित्र है। लोकप्रिय कला में, हम उसे चार हाथों, वीणा, शास्त्र (वेद) और कमंडल पकड़े हुए एक सुंदर लेकिन दृढ़ देवी के रूप में पहचानते हैं। वह कमल पर बैठी हैं और उनके साथ एक हंस है – ये दोनों ही ज्ञान के प्रतीक हैं। वेदों से लेकर, महाकाव्यों से लेकर पुराणों तक, सरस्वती के चरित्र में महत्त्वपूर्ण रूप से बदलाव होता है, लेकिन वे लगातार एक स्वतंत्र देवी के रूप में नज़र आती हैं।

विवाह और मातृत्व के लिए तत्पर अन्य देवियों के विपरीत, सरस्वती विशेष रूप से अलग है। उनका सफेद रंग और वस्त्र -लगभग विधवा जैसे- उनकी तपस्या, उत्थान और शुद्धता को इंगित करते हैं। हालांकि, उनकी अन्यथा बताई गई कहानी में एक विषमता है – ब्रह्मा के साथ उनका तथाकथित संबंध।

वैदिक सरस्वती -वह कौन थी?

ये भी पढ़े: तुम्हीं मुझे सबसे ज़्यादा परिभाषित करती होः द्रौपदी के लिए कर्ण का प्रेम पत्र

वैदिक सरस्वती अनिवार्य रूप से तरल पदार्थों, नदियों की देवी थी, जिन्हें सिखाया गया था कि वे नदियों के किनारे पर प्रार्थना करने वालों को शक्ति, प्रजनन क्षमता और शुद्धता प्रदान करे। दिव्यता प्रदान की गई पहली नदी, वैदिक काल के लोगों के लिए सरस्वती वो थी जो आज के लोगों के लिए गंगा है। थोड़े समय बाद, उन्हें वाग (वाक) – वाणी की देवी के रूप में पहचाना जाने लगा। अधिकांश वैदिक देवी देवताओं की तरह वह भी अब तक अमूर्त थीं। महाभारत में उनके चरित्र का थोड़ा ठोस व्यक्तित्व आया, जहां उन्हें ब्रह्मा की बेटी माना जाता था। पुराण (उदाहरण के लिए मत्स्य पुराण) हमें बताते हैं कि फिर वह उनकी पत्नी कैसे बन गई। और हमारी रूचि की कहानी यहीं से शुरू होती है….

ब्रह्मा – सरस्वजी के सृजनकर्ता

कल्प की शुरूआत में, विष्णु की नाभी से एक दैवीय कमल उग आया और इससे पूरी सृष्टि के पितामह ब्रह्मा प्रकट हुए। अपने दिमाग और अपने विभिन्न रूपों से, उन्होंने देवता, संत, राक्षस, पुरूष, प्राणी, दिन और रात जैसी कई रचनाएं उत्पन्न की। फिर एक दिन, उन्होंने अपने शरीर को दो भागों में विभाजित किया -जिसमें से एक सौ रूपों की देवी शतरूपा बन गई। उन्हें सरस्वती, सावित्री, गायत्री और ब्रह्माणी नाम दिया गया।

ये भी पढ़े: कन्नकी, वह स्त्री जिसने अपने पति की मृत्यु का बदला लेने के लिए एक शहर को जला दिया

जब ब्रह्मा की रचनाओं में से सबसे सुंदर सरस्वती ने अपने पिता की प्रदक्षिणा की, ब्रह्मा प्यार में पागल हो गए। ब्रह्मा की मुखर उत्तेजना स्पष्ट रूप से देखी जा सकती थी और उनके दिमाग से उत्पन्न बेटों ने अपनी बहन की तरफ उनकी अनुचित नज़रों पर आपत्ति जताई।

लेकिन ब्रह्मा को कोई रोक नहीं सकता था और वह बार-बार कह रहे थे कि वह कितनी सुंदर है। ब्रह्मा पूरी तरह उन पर आसक्त हो गए और उनका पीछा करने से अपनी आँखों को रोक नहीं पा रहे थे, उन्हांने चार दिशाओं में चार सिर (और आँखें) उत्पन्न कर ली, और जब सरस्वती छुपने के लिए ऊपर उछल गईं तब ऊपर पांचवा सिर उत्पन्न कर लिया। जब वह उनकी नज़रों से बचने की कोशिश कर रही थीं, तब उन्होंने उन पर अपना प्रभुत्व दिखाने की भी कोशिश की।

ये भी पढ़े: दुर्योधन की बेटी होकर भी इस राजकुमारी का जीवन दुखमय रहा

रूद्र ने ब्रह्मा का पांचवा सिर अलग कर दिया

इस कहानी का एक लोकप्रिय संस्करण इस स्थान पर रूद्र -शिव का परिचय करवाता है। हमें बताया गया है कि तपस्वी भगवान को ब्रह्मा का यह व्यवहार इतना घृणित लगा कि उन्होंने उनके पांचवे सिर को धड़ से अलग कर दिया। ब्रह्मा को अपनी रचना के प्रति लगाव दिखाने के लिए यह दंड दिया गया था। यही कारण है कि हम ब्रह्मा को केवल उनके चार सिरां के साथ देखते हैं।

ये भी पढ़े: एक मंदिर जो स्त्री की प्रजनन शक्ति को पूजता है
एक अन्य संस्करण में, अपनी बेटी की लालसा रखने के कारण उन्हें तपों की सभी शक्तियों को खोने का दंड मिला। अब सृजन करने में अक्षम होने पर, उन्हें सृजन करने के काम को आगे बढ़ाने के लिए अपने बेटों को नियुक्त करना पड़ा। ब्रह्मा अब सरस्वती को अपना बनाने के लिए स्वतंत्र थे। उन्होंने उनके साथ संभोग किया और उनके मिलन से ही मानव जाती के पूर्वज उत्पन्न हुए।

अन्य संस्करण में, हालांकि हमें कहा गया है कि सरस्वती उतनी उनमुक्त नहीं थी जितनी ब्रह्मा ने कल्पना की थी। वह वहां से भाग गई और उन्होंने बहुत से नारी रूप धरे; लेकिन ब्रह्मा ने ठुकराया जाना स्वीकार नहीं किया और उन्ही प्राणियों के नर रूप धर कर पूरे ब्रम्हांड में उनका पीछा किया। अंततः उनका विवाह हो गया और उनके मिलन ने सभी प्रकार की प्रजातियों को जन्म दिया।

ब्रह्मा और सरस्वती की कहानी हिंदू पौराणिक कथाओं में सबसे असंगत कहानियों में से एक है। और फिर भी हम देखते हैं कि इसे सामूहिक चेतना द्वारा दबाया नहीं गया है और ना ही इसे विभिन्न अन्य कहानियों द्वारा मिटाया गया है। शायद इसे किसी भी व्यभिचार पूर्ण इरादे वाले व्यक्ति के लिए चेतावनी देने वाली कहानी के रूप में संरक्षित रखा गया है।

एक सामाजिक परिप्रेक्ष्य में, इनसेस्ट का विचार सबसे सार्वभौमिक टेबू में से एक है, और फिर भी यह अधिकांश संस्कृतियों में एक आधारभूत मिथक के रूप में मौजूद है। सृजन की हर कहानी में पहले पुरूष और पहली स्त्री की सभी कहानियों में यही समस्या है। एक ही स्त्रोत से उत्पन्न होने के कारण, पहला जोड़ा स्वाभाविक रूप से भाई बहन भी है, और अन्य विकल्प ना होने के कारण, उन्हें यौन साथी के रूप में एक दूसरे को चुनना भी होगा। जहां मानव समाज में ऐसे कृत्यों को अस्वीकार किया जाता है, भगवानों को दिव्य स्वीकृति मिल जाती है। लेकिन क्या वाकई ऐसा है?

Photo banner of hindi

ब्रह्मा के मंदिर नहीं होने के कारण

आपने ध्यान दिया होगा कि ब्रह्मा के मंदिर इतने आम नहीं है, शिव और विष्णु के मंदिरों के विपरीत, जिन्हें देशभर में देखा जा सकता है। क्योंकि ब्रह्मा ने अपनी ही रचना की लालसा की, इसलिए भारतीयों ने उन्हें क्षमा नहीं किया है और उनकी पूजा करना बंद कर दिया है। ज़ाहिर है कि ब्रह्मा की पूजा करना इसलिए बंद कर दी गई थी क्योंकि उन्होंने ऐसी ‘भयानक चीज़’ की थी और इसीलिए भारत में ब्रह्मा के कोई मंदिर नहीं हैं (जो सच नहीं है लेकिन वो कहानी किसी और दिन सुनाएंगे)। अन्य किवदंती यह है कि ब्रह्मा रचैयता है, थकी हुई ऊर्जा है, जबकि विष्णु रखरखाव करने वाला या वर्तमान है और शिव विनाशक है या भविष्य है। विष्णु और शिव दोनों वर्तमान और भविष्य हैं, जो लोगों द्वारा मूल्यवान समझे जाते हैं। लेकिन अतीत को छोड़ दिया जाता है -और इसीलिए ब्रह्मा की पूजा नहीं की जाती।

ये भी पढ़े: कैकेयी का बुरा होना रामायण के लिए क्यों ज़रूरी था

trimurti

Trimurti Image Source

प्यार सिर्फ प्यार है; यह सच प्रतीत नहीं होता क्योंकि मिथक ही सामाजिक कोड बनते हैं। सरस्वती के लिए ब्रह्मा के प्यार को बेटी के प्रति पिता के कामुक प्यार और अपनी रचना के प्रति रचैयता के अहंकारी प्यार के रूप में गलत माना जाता है। यह नाजु़क कहानी यह याद दिलाती है कि कुछ प्रकार के प्यार मानव जाती में होते ही हैं भले ही वे कितने भी गलत क्यों ना लगें। लेकिन सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि यह चेतावनी देता है कि हमेशा इसकी कीमत चुकानी पड़ती है -या तो सम्मान (सिर), शक्ति (सृजन की) की समाप्ती या पूर्ण सामाजिक बहिष्कार

कुछ रिश्तों को स्वीकार करना मुश्किल होता है, खासकर अगर वो आपको व्यक्तिगत रूप से प्रभावित करते हैं। सोल सर्चर ने उसकी पत्नी और उसके पिता के बीच संबंधों की कहानी साझा की है

गांधारी का अपनी आँखों पर पट्टी बांधने का फैसला गलत क्यों था

क्या सिखाते हैं देवी-देवता हमें दांपत्य जीवन के बारे में

You May Also Like

Leave a Comment

Login/Register

Be a part of bonobology for free and get access to marvelous stories and information.