दोस्ती से दांपत्य तक …

Priyanka Chauhan
irrfan khan and rishi kapoo

“जाने से पहले, एक आखरी बार मिलना क्यों जरूरी होता है।”
(ऋषि कपूर)

“चांद पर तो बाद में चले जाना ।
पहले धरती को तो ठीक से जान लो ।।”
(इरफान खान)

फिल्म इंडस्ट्री ने पिछले 2 दिनों में अपने ऐसे दो चमकते हुए सितारों को अलविदा कहा है, जिनकी कमी को भर पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। कभी-कभी दो लोगों की जिंदगियों में कितनी समानताएं होती हैं। अब आप इन दोनों हस्तियों को ही ले लीजिए।

यहां बात हो रही है इरफान खान और ऋषि कपूर जी के बारे में। दोनों ही लोगों को अपनी बीमारी के बारे में 2018 में पता चला, दोनों का संघर्ष इस मर्ज से 2 वर्षों तक चला और दोनों ही ने दुनिया रुखसती का समय भी एक ही दिन के अंतराल में चुना, कितने सारे संयोग व इत्तेफाक एक साथ। इसी के साथ एक और संयोग भी है जो इन दोनों के जीवन को काफी हद तक जोड़ता है। वह है उनका दांपत्य जीवन जिसकी शुरुआत काफी हद तक सदृश्य है।

ऋषि कपूर जी और इरफान खान दोनों ने ही अपने वैवाहिक जीवन में ‘दोस्ती से दांपत्य’ तक का सफर तय किया है। वे दोनों लोग ही अपने जीवनसाथी के सबसे अच्छे मित्र थे यहां यह कहना भी कदाचित गलत नहीं होगा कि उन्होंने अपने सबसे अच्छे दोस्त को ही अपना जीवन-साथी चुना था।

इरफान खान-सुतापा सिकदर

इरफान खान पठानों के संपन्न परिवार से तारूफ रखते थे। जहां परिवार का अपना ही कारोबार था लेकिन इस कला प्रेमी को तो अपना मुकाम कहीं और ही बनाना था। जिसके चलते किस्मत उनको ‘नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा’ लेकर आ गई। यहां उनकी मुलाकात सुतापा सिकदर से हुई वो एक दूसरे के काफ़ी क़रीबी दोस्त बन गए और एन.एस.डी. की पढ़ाई खत्म होते-होते यह दोस्ती इतनी गूढ़ हो गई कि दोनों ने मुंबई जाने का फैसला साथ में किया और जब तक दोनों अपना मुकाम ना हासिल कर ले शादी ना करने का इरादा भी रखा। वह कहते हैं ना…

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‘एक ईमानदार साथी ही उत्तम साथी होता है’

दोनों लोग एक दूसरे के लिए वही उत्तम साथी थे।एक दूसरे को उनके काम की बारीकियां बताना, कमियां निकालना, एक सख्त आलोचक की तरह सामने आकर एक-दूसरे को बेहतर बनाने की कोशिश में लगातार लगे रहना। सही मायने में तो एक आदर्श जोड़ी यही होती है, जहां आप एकसाथ विकसित होते हैं । दोस्ती को दांपत्य तक ले जाना कोई आसान बात नहीं होती है इसके लिए दो लोगों की आपस की समझ का मजबूत होना बहुत आवश्यक होता है।

इरफान खान और सुतपा सिकदर की शादी एक आदर्श और मुकम्मल शादियों में से एक है और वह ‘दोस्ती से दांपत्य तक’ के हर पायदान पर खरे उतरते हैं। जब 2018 में इरफान खान की बीमारी के बारे में खबर आई और उनको इलाज के लिए लंदन ले जाया गया तो सुतपा हर कदम पर उनके साथ एक मजबूत ढाल बन कर खड़ी रहीं। दोनों का प्रेम इस कदर प्रगाढ़ था कि इरफान खान उनसे शादी करने के लिए अपना धर्म परिवर्तन तक करने के लिए तैयार थे। यह वह रिश्ता है जो किसी एक के जाने के बाद भी खत्म नहीं होता जैसे कि ‘गुलजार साहब’ ने कहा है…

हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते,
वक्त की शाख से लम्हे नहीं तोड़ा करते ।।

रिश्ते बनाना मुश्किल है, उन्हें बनाए रखना और भी मुश्किल

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ऋषि कपूर-नीतू सिंह

कुछ प्रेम कहानियां सबको ही पता होती है उनमें से एक है यह कहानी, यह रिश्ता भी दोस्ती से शुरू होकर दाम्पत्य तक पहुँचा।

ऋषि कपूर और नीतू सिंह जी ‘जहरीले इंसान’ फिल्म के दौरान पहली बार मिले और उनमें दोस्ती हो गई। उनकी दोस्ती इतनी अच्छी थी कि वे एक-दूसरे को व्यक्तिगत सलाह भी देते थे। ऋषि कपूर जी को प्यार का एहसास तब हुआ जब वह किसी फिल्म की शूटिंग के लिए मुम्बई से बाहर गए और वहां उन्हें नीतू सिंह जी की इतनी कमी महसूस हुई कि उन्होंने नीतू सिंह जी को टेलीग्राम किया कि ..’ ये सिखनी बड़ी याद आती है ।’ और यहां से शुरुआत हुई एक सशक्त रिश्ते की एक ऐसा रिश्ता जो पीढ़ियों के लिए मिसाल बन गया।

ऋषि कपूर-नीतू सिंह

ऋषि कपूर-नीतू सिंह Image Source

इस रिश्ते ने भी अपने उतार-चढ़ाव देखे लेकिन वह इन उतार-चढ़ावों के साथ और भी मजबूत व खूबसूरत होता गया। शादी के बाद जब नीतू सिंह जी ने फिल्मों में काम ना करने का फैसला किया तो बहुत सारी अलग-अलग तरह की अटकलें सामने आई। जिनमें से सबसे विख्यात यह थी कि ‘कपूर खानदान की औरतें फिल्मों में काम नहीं करती।’ उस समय ऋषि कपूर जी ने इन सभी अटकलों को नजर-अंदाज करते हुए नीतू सिंह जी का साथ इस फैसले में दिया। ऋषि कपूर जी ने कहा था कि

” मुझे हमेशा लगा कि यह मुझे संभाल लेगी।” और वो अपनी जगह सही भी थे। जब उन्हें कैंसर जैसी गंभीर बीमारी ने घेरा तो नीतू सिंह जी ने उनको इस कदर संभाल कर रखा कि लगा वह दोनों इस बीमारी को हरा देंगे और काफी हद तक हराया भी लेकिन कभी-कभी कुदरत को कुछ और ही मंजूर होता है।

कुछ रिश्ते अपने आप में इतने पूर्ण होते हैं कि वह एक जीवन में ही सदियां जी लेते हैं। उनको शब्दों या किसी और परिभाषा की जरूरत नहीं होती, वह सर्व व्याप्त होते हैं और सबको उनके बारे में पता होता है । यह दोनों कहानियां भी उन्हीं रिश्तों के उदाहरणों में से एक हैं।

किसी भी रिश्ते की खूबसूरती, उसको जीने वाले लोगों पर निर्भर करती है। वह जितने ईमानदार, निष्कपट और शुद्ध होंगें उतना ही उनका रिश्ता खूबसूरत और यादगार बन जाएगा ।

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