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दुनिया के लिए वह कैरियर वुमन थी, लेकिन घरेलू हिंसा की शिकार थी

वह उससे ज़्यादा कमाती थी, सोचती थी कि प्यार उसके शारीरिक और मौखिक शोषण को रोक सकता है
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संबंध रातोंरात शुष्क नहीं हो जाते। मैंने रातोंरात यह फैसला नहीं ले लिया था कि अब मैं पति के रूप में इस राक्षस के साथ और नहीं रह सकती, जिसके लिए मैं केवल एक नौकरानी थी जो उसकी देखभाल करे और बिना रोए उसकी मार झेले। वह मुझसे अपेक्षा करता था कि घर के सभी काम मैं ही करूं। उसके गुस्से की वजह से कोई भी नौकर हमारे घर में अधिक समय तक टिकता नहीं था। मेरा दिन सुबह 4:30 बजे शुरू होता थाः घर साफ करना, उसके मोजे, जूते, बटुए, कपड़े सहित हर चीज़ बिस्तर पर करीने से तैयार रखना। हम तीनों के लिए नाश्ता और दोपहर का भोजन पकाना (उन दिनों उसका छोटा भाई हमारे साथ रहा करता था) और फिर ऑफिस के लिए 8:15 पर भागना। शाम को भी यही दिनचर्या थी। और अगर मुझे गुस्सा आए, तो मतलब मैं बुरी पत्नी थी। एक दिन जब रात के खाने के बाद मैंने अपने देवर से बरतन धोने को कहा, तो अगले दिन ही यह बात मेरी सास तक पहुंच गई। ‘तुम अपने देवर से बरतन धोने को कैसे कह सकती हो?’ वह फोन पर चिल्लाई।

अब जब मैं अपने पूर्व पति के साथ अपने नौ साल (सात साल का विवाह और दो साल की डेटिंग) के संबंध के बारे में सोचती हूँ, मुझे अहसास होता है कि यह समाप्त करने में निर्णायक कारक वित्तीय स्वतंत्रता नहीं थी, हाँ ऐसा करने के लिए इसने साहस ज़रूर दिया था।

मैंने एक कंपनी में मानव संसाधन अधिकारी के रूप में काम किया, मैं उससे ज़्यादा शिक्षित हूँ, मैंने उससे ज़्यादा आय अर्जित की, लेकिन यह विश्वास करते हुए कि हिन्दी फिल्मों की तरह एक दिन सब ठीक हो जाएगा, मैं एक अपमानजनक संबंध में रही। यह कहने का साहस इकठ्ठा करने में मुझे सात साल लग गए कि बस बहुत हो चुका, अब मैं और सहन नहीं करूंगी।

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यह संबंध शुरू होने से पहले ही बर्बाद हो गया था लेकिन मैं संकेतों को देखने में विफल रही क्योंकि मैं उसके प्यार में पागल थी और मुझे विश्वास था कि उसके प्रति मेरा प्यार उसे बदल देगा। शादी से पहले जब एक दिन मैं उसके लिए खाना बना रही थी, हमारी बहस हुई और वह इतना क्रोधित हो गया कि उसने तवा उठा कर मुझ पर फेंक दिया। मेरा पैर बाल-बाल बचा। मेरे माता-पिता हमारी उम्र के अंतर (वह मुझसे सात साल बड़ा है) और उसके छोटे शहर की पृष्ठभूमि की वजह से इस संबंध से खुश नहीं थे, लेकिन फिर उन्होंने मेरे लिए यह स्वीकार कर लिया।

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हम दो भिन्न व्यक्तित्व थे, जिसमें से कोई भी बदलना नहीं चाहता था। मुख्य समस्या उसका गुस्सा था। मुझे बुरा भला कहने और पीटने के लिए उसे किसी उत्तेजक की आवश्यकता नहीं थी। यह दाल में नमक ना होने जैसी छोटी सी बात से ही शुरू हो सकता था। वह गुस्से पर नियंत्रण नहीं रख पाता था और मैं चुपचाप आँसू बहाने को तैयार नहीं थी। जब भी मुझे लगता था कि वह हद से बाहर बढ़ रहा है, मैं भी चिल्लाती थी। मैं उसे मार नहीं सकती थी, क्योंकि वह शारीरिक रूप से मज़बूत था। उसे बिल्कुल पसंद नहीं आता था कि मैं झुकना नहीं चाहती थी। हर बार जब भी तकरार होती थी, वह चिल्लाता था ‘‘चुप रहो, मेरे सामने मुंह मत खोलो।”

लेकिन किसी भी परिस्थिति में मैं अपने पति के सामने झुकी नहीं। मेरी परवरिश एक खुद की राय रखने वाली स्वतंत्र लड़की के रूप में की गई थी।

यह सोचकर की वह खुद को सुधार लेगा, मैंने अपना परिवार बढ़ाने का निश्चय किया, लेकिन हमारी बेटी के जन्म के बाद, वह वापस अपने पुराने तरीकों पर लौट गया। उनका गुस्सा बात बिगाड़ देता था। शादी में सहन करने की सीमा क्या है? एक स्त्री कितना झेल सकती है? जब मैं सोच ही रही थी कि ऐसे संबंध में मैं और कितना अधिक समय रह सकती हूँ, मुझे पता चला कि उसका विवाहेतर संबंध है।

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सौभाग्य से, तलाक की कार्यवाही में एकमात्र परेशानी उन्हें शर्तों के लिए सहमत करना था, क्योंकि उसे तलाक लिए बगैर अलग रहने में भी कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन मैं उसके लिए तैयार नहीं थी। मैं अपने अत्याचार के लिए एक कानूनी अंत चाहती थी। शुरू में परामर्शदाता ने हमें मनाने की कोशिश की कि हम अपनी दो वर्ष की बेटी की खातिर एक बार फिर सोच लें, लेकिन जब वह सलाहकार पर चिल्लाने लगा, उसने हार मान ली। वह समझ गया कि ऐसे व्यक्ति के साथ रहना मेरे लिए कितना मुश्किल रहा होगा।

मैं अपने माता-पिता के घर के ऊपर रहती हूँ। इसलिए मैं स्वतंत्र हूँ लेकिन मेरे पास परिवार का सहयोग है। तलाक को एक वर्ष हो चुका है। मैं अपना जीवन उस तरह जीने लगी हूँ जैसा हमेशा से चाहती थी। शादी से पहले, मुझे बेकिंग बहुत पसंद थी लेकिन वैवाहिक विवाद के कारण अपने जुनून को पूरा नहीं कर पाई थी। अब, अपनी पूर्णकालिक नौकरी के साथ, मैं बेक किए हुए व्यंजनों का भी आर्डर लेती हूँ। जीवन शांतिपूर्ण है और आशा है। मैं स्वयं को एक पूर्ण व्यक्ति महसूस करती हूँ।

(जैसा सुजाता राजपाल को बताया गया)

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