एक 30 से अधिक उम्र की अकेली लड़की के जीवन के कठोर सत्य

इससे पहले कि मैं शुरू करूं, एक बात मैं स्पष्ट कर देना चाहती हूँ – मैं लेटलतीफ रही हूँ। हर वस्तु ने मेरे जीवन में आने के लिए अपना समय लिया है। कोई आश्चर्य नहीं कि आज की पीढ़ी जीवन के जो पाठ उनकी आयु के 20 के दशक में सीख रही है, वह मैंने मेरी आयु के 30 के दशक के मध्य में सीखे हैं।

इन्हें शब्दों में बयान करने और स्वयं का सामना करने में मुझे थोड़ा समय लगा। लेकिन अब, जब मैंने सबकुछ लिख दिया है, मुझे एक अजीब सी राहत महसूस हो रही है। यह सच्चाई मैं जानती हूँ कि कई ऐसी महिलाएं हांगी जो इस कहानी को स्वयं के साथ जोड़ सकेंगी और बात यह है कि जब आप इन सच्चाईयों को स्वीकार कर लेते हैं, तब जीवन आसान हो जाता है।

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मैं प्यार की तलाश कर रही हूँ और मुझे लगातार इनकार मिला है। मैंने सोचा अगर मैं इसे स्वीकार कर लूँ, तो मैं लोगों को दूर कर दूंगी। मैं ‘अनकूल’ (उबाऊ) बन जाऊंगी। तथ्य यह है कि अस्वीकृत होना और यह बताने से इनकार करना वैसे भी लोगों को दूर ही कर रहा है। इसलिए मुझे ईमानदारी बरतनी चाहिए। और किसी के साथ नहीं, बल्कि मेरे साथ। जो लोग नहीं भागेंगे, वे इस ईमानदारी से भयभीत नहीं होने वाले लोग होंगे।

मैं लगातार महसूस कर रही हूँ कि मुझे कमिटमेंट फोबिया (प्रतिबद्धता से डर) है, ना केवल संबंधों में बल्कि हर उस वस्तु में जिसमें मुझे अपना समय और प्रयास देने की आवश्यकता है। मुझे कहना होगा कि यह एक सुखद अहसास नहीं है। लेकिन मुझे खुशी है कि अब मैं इसके बारे में जानती हूँ।

जहां ‘फ्रेंड्स विथ बेनिफिट’ फिल्म मजे़दार और उसका विषय और भी मज़ेदार प्रतीत हुआ, मुझे लगता है कि मैं उसके विषय में सहज नहीं हूँ। मैंने दिखावा किया कि सब ठीक है और मैं इसके प्रति बेपरवाह हूँ लेकिन मुझे इसके नकारात्मक परिणाम भुगतने पड़े। यदि आप मेरी तरह एक सामान्य भावुक मूर्ख व्यक्ति (इमोशनल फूल) हैं, तो अनौपचारिक होने, और शामिल होने के बीच की अदृश्य रेखा कुछ रातों के बाद धुंधली हो जाती है।

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बार-बार, एक के बाद एक, मैं गलत पुरूषों के प्रेम में पड़ती रही हूँ। यह पैटर्न अब इतना ज़ाहिर हो गया है कि अब एक बच्चा भी मुझे बता सकता है कि अमुक पुरूष मेरे लिए ठीक नहीं है। लेकिन क्या मैं कभी सुनती हूँ? नहीं। मुझे पीछा करना पसंद है। मुझे ‘तुम्हारे फोन और मैसेज के वापस आने का इंतज़ार कर रही हूँ’ वाली दिनचर्या पसंद है। कभी-कभी मुझे लगता है कि मैं मसोचिस्ट हूँ (मुझे स्वयं को पीड़ा देना पसंद है) मुझे अपने नन्हें से दिल पर यह दर्द थोपना पसंद है। मैं सीख रही हूँ लेकिन मैं उन सीखों को प्रयोग में नहीं ला रही हूँ।

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मैंने अक्सर स्वयं से ‘असफल’ अथवा ‘लगभग सफल’ प्रकार के संबंधों के बारे में प्रश्न किए हैं। मैंने हर बार स्वयं को दोष दिया है, हर बार दिल टूटने के बाद दुःख भरी पार्टियां रखी हैं। किस लिए? क्योंकि मैं भावनात्मक हूँ और लोगों से आसानी से जुड़ जाती हूँ? क्यों कि मैं गहराई से महसूस करती हूँ? क्योंकि हम दोनों में से, केवल मैं ही भावनात्मक हो जाती हूँ? हाँ। कारण यही रहा है। मैंने खुद पर अत्यधिक भावनात्मक होने का आरोप लगाया है। जैसे दुनिया पर्याप्त नहीं थी कि मैंने भी खुद पर इतने अधिक प्रहार किए।

मैंने खुद पर अत्यधिक भावनात्मक होने का आरोप लगाया है।
मैंने खुद पर अत्यधिक भावनात्मक होने का आरोप लगाया है।

हर बार दिल टूटने के बाद मेरे आसपास विवाहित अथवा संलग्न (एंगेज्ड) लोगों का होना और मुझे दिलासा देना सांत्वना देने वाला हो सकता है और मैं मेरा साथ देने के लिए उन सबकी आभारी हूँ। लेकिन कई बार वे नहीं समझते कि मैं किस स्थिति से गुज़र रही हूँ। ‘आगे बढ़ जाओ’, ‘वह तुम्हारे लिए सही नहीं था’, ‘तुम्हें प्रेम संबंध में नहीं होना चाहिए, तुम बहुत स्वतंत्र हो’, ‘तुम विवाह करने वालों में से नहीं हो’, ‘उसे भूल जाओ’ ये वे कुछ वाक्य हैं जो मैं सुनती हूँ। मैं जानती हूँ कि उनका मतलब अच्छा है, लेकिन वे नहीं जानते कि हमेशा के लिए अकेला होना क्या होता है। कभी-कभी मैं चाहती हूँ कि मेरी भावनाओं को गंभीरता से लिया जाए।

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जैसे-जैसे मेरी उम्र बढ़ती जा रही है, कई लोग मुझसे दूर होते जा रहे हैं जिन्हें मैं दोस्त कहा करती थी। जाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। क्या मुझे इस पर गर्व है? नहीं। लेकिन मैं ऐसे लोगों के साथ नहीं रह सकती जो दोस्ती के नाम पर मुझे दुःखी करते हैं, मुझे नीचा दिखाते हैं।

मैंने जीवन जीने के लिए खुद का एक आदर्श बनाया हैः जीवन खराब नौकरी करने और खराब लोगों के साथ रहने के लिए बहुत छोटा है।

जो नौकरियां मैंने छोड़ी उसकी सूची लंबी है, लेकिन मुझे उनमें से एक के लिए भी अफसोस नहीं है। लोग मेरे कैरियर ग्राफ में असंगतता और अनिर्णायकता पाते हैं, लेकिन वे लोग मेरे बिल नहीं भरेंगे? क्या वे ऐसा करेंगे? मैं जानती हूँ कि मैं वह नौकरी और नहीं निभा सकती जो मुझे हर रोज़ रूला रही है। यह मेरा सत्य है।

खैर, यदि आप इनमें से किसी भी बिंदु के साथ स्वयं को जोड़ पाते हैं, तो बस इतना जान लीजिए कि आप अब अकेले नहीं हैं। और समस्या का सामना करना उसे हल करने के एक कदम समीप ले जाता है। है ना?

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Readers Comments On “एक 30 से अधिक उम्र की अकेली लड़की के जीवन के कठोर सत्य”

  1. Meri v life apke life jaisi hi ho gai h maine v bs ek hi chij chaha sacha pyar or jo life time sath rahe lekin ye sab bas filmo me hi hota h real ne ye sab nahi hota maine khud k sapno k sath samjhota kr liya h

    1. I support this totally. Because I feel lonely and need someone to share my pain. People around me have their own world and they can’t understand what I am going through.

      1. IAm 29 seriously iam done with private job I have left many jobs nd honestly I left becoz of clever political mind people iam not like them not atoll I want to grow I want to learn I want to inspire people I can’t bitch about people or dominate people so that I can climb corporate ladder. Our sovit is full of hypocrites and they don’t like people specially women who speak tut but you are bold to share your story God is our first love trust me genuinely I have experienced him don’t give his place to anyone he is our best frnd and evn by mistake u get along with bad person yoh won’t stay with him so that is a blessing .staying alone is better then in wrong relationship. 3o is better then 20’s ay way we understand people better and ourselves too.

  2. KALYANI P BACHHAV

    Ye problem sub k sath hoti hai.. bt koi batat aur koi nahi.. Some think happened with me I’m 30 & my sis She is 3. Still struggling.. But never give up hope ..

  3. same life.. h meri v kuch aap jaisa hi dard h h mujhe kai bar sochti hu ki duniya hi chor du lekin…. sochti hu jo upar wale ne likga h whi hoga mai kayar nhi… bt aapki story bhut impressiv h as like jaisi meri hi same life h…. so thanks aapka

  4. Nanina kay ye apki kahani hai
    Bhot sundar dang se apne likha proud of you dear i am also 30 year single woman apki kahani sun k kuch apni yaad aa gayi….mai sirf itna kahungi piyaar mai baar baar asafal hona ye prof karta hai hum kitne honest hai kud se or duniya se hame dikhawe ki zindgi pasnad nahi ese log best hote hai….

  5. I read this article for a long time, I thought, it was my opinion… Mujhe lagta tha mai hi ye sari samsyao ko jhel rhi hu, well iss ko padh kr kafi achchha feel kar rhi hu,…

  6. Sach me aap akeli nahi he….God ne sirf aapko hi anokha nahi banaya….aap jesi kai …es duniya me he…or jis dard se aap har pal gujar rahi he….wesi hi kashmkash aur bhi kai ladkiya jhel rahi he…

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