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एक अधेड़ उम्र की औरत से प्यार करने के लिए उसे पीटा गया और दंडित किया गया

श्रीनाथ गिरीश एक वर्जित प्यार की दिल को चीरने वाली कहानी और मोरल पॉलिसिंग के एक जघन्य मामले के बारे में बताते हैं

कोई रिटर्न नहीं

भले ही आप इसके बारे में कुछ भी कहें, कानून का अभ्यास करने के बारे में एक बात तो है। हर दिन आपको नए परिदृश्य और विभिन्न समीकरणों के संपर्क में रखता है। मुझे लगता है कि इसी की वजह से मैं अपने काम में टिका हुआ हूँ।

लेकिन यह ऐसा नहीं है कि मैं हमेशा अपने ऑफिस में बैठने, समय पर सलाह देने और हर उस व्यक्ति को सटीक कार्यवाही बताने में सक्षम होता हूँ, जिसे कुछ समस्या है। इसके विपरीत, कई बार ऐसा हुआ है जब मेरे सभी कानूनी प्रशिक्षण, राह में मिले मेरे सारे अनुभव बिल्कुल बेकार साबित हुए हैं – जब मैं सिर्फ असहाय होकर सुन सकता था जब कोई मुझे अपनी पीड़ाएं सुनाता था।

पद्मनाभन एक ऐसा ही व्यक्ति था।

मैं पहली बार उससे समिति सदस्य के रूप में हमारे बिल्डिंग असोसिएशन के लिए सब्सक्रिप्शन बकाया जमा करने के प्रभारी के रूप में मिला था। वह एक मांसल, सुखद पुरूष था जिसने बड़ी आसानी से मुझसे मेरी बकाया राशि का भुगतान करवा लिया। इन वर्षों में, मुझे उसे काफी अच्छे से जानने का मौका मिला। वह एक पार्टनर के साथ इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर फर्निचर की दुकान चलाता था। उसका व्यापार अच्छा चल रहा था और वह उस विनम्र पृष्टिभूमि से काफी उंचा उठ गया था जिससे वह आया था। वह उस घर में अपने परिवार के साथ रहता था जिसे उसने अपनी बचत से बनाया था। उसका बेटा व्यापार में उसकी मदद करने लगा था।

सोचा जाए तो, पद्मनाभन के पास खुश होने का कारण था।

फिर एक दिन मैंने सुना कि उसका बेटा मर चुका है, उसने आत्महत्या की है। मैंने सोचा कि बेचारे के साथ कितना बुरा हुआ। मैं जाकर पद्मनाभन से मिलना चाहता था, लेकिन मैं नहीं जानता था कि उसका सामना कैसे करूं।

लेकिन तीन हफ्ते बाद मुझे उसका सामना करना ही पड़ा, जब वह मेरे ऑफिस आया।
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वह बिल्कुल रोगी जैसा दिख रहा था। उसकी ठोड़ी पर सफेद दाढ़ी आ गई थी। आँखें लाल थी और उनके नीचे काले घेरे हो गए थे। वह कुर्सी पर बैठा कुलबुला रहा था, टेबल पर रखे पेपरवेट के साथ खेल रहा था, निरंतर यहां-वहां देख रहा था। मैंने अपना शोक व्यक्त किया, यह जानते हुए भी कि मैंने जो कुछ भी कहा उससे उसका दुःख कभी कम नहीं हो सकता था।

उसने कहा, ‘‘वक्कील , मैं और मेरी पत्नी एक वसीयत बनाना चाहते हैं।’’ जब वह कह रहा था तब उसकी आवाज़ बहुत मंद थी और वह धीरे-धीरे बोल रहा था, हालांकि शब्दों को अपने दिमाग से जु़बान तक ले जाने के लिए उसने कड़ा प्रयास किया।

‘कोई बात नहीं’ मैंने कहा। मुझे चिंतामुक्त महसूस हुआ। मैं उसके लिए कुछ कर सकता था। ‘अगर आप मुझे अपनी इच्छाएं बताएं, तो मैं वह लिख सकता हूँ। आपके पास क्या संपत्तियां हैं?’

‘मैं व्यापार में अपना हिस्सा अपने पार्टनर को देना चाहता हूँ। और घर – मैं उसे चैरिटी में देना चाहता हूँ…’

‘क्या यह आपके नाम पर है?’ मैंने पूछा, राइटिंग पैड पर विवरण लिखते हुए।

‘नहीं, आधा हिस्सा मेरा है। बाकी का आधा मेरी पत्नी का है’

‘ठीक है, तो मैं इसे इस तरह से करूंगा – अगर आपकी मृत्यु आपकी पत्नी से पहले होती है, तो घर का आपका हिस्सा आपकी पत्नी के नाम हो जाएगा। अगर उनकी मृत्यु पहले हो जाती है, तो उनका हिस्सा आपको मिल जाएगा। आप दोनों की मृत्यु के बाद, यह आपके द्वारा निर्दिष्ट की गई चैरिटी में चला जाएगा।

‘नहीं, नहीं…’

उसकी आवाज़ की टोन में ऐसा कुछ था जिसकी वजह से मैंने उसे देखा।

‘मैं चाहता हूँ कि आप एक ऐसी वसीयत तैयार करें जिसमें हम दोनों के मरने के तुरंत बाद संपत्ति चैरिटी में दे दी जाए’

‘यही तो मैं कह रहा था। आप दोनों की मृत्यु के बाद, यह चला जाएगा…’

‘नहीं। ऐसे किसी खंड की ज़रूरत ही नहीं है जिसके द्वारा यह पहले हम में से किसी को भी मिले। इसे सीधे चैरिटी में ही जाने दो’

‘लेकिन यह नहीं किया जा सकता है। ऐसी कोई संभावना नहीं है कि आप दोनों एक ही समय मरेंगे, जब तक कि आपकी कोई दुर्घटना ना हो या…’

धीरे से मेरे मन में एक भयानक विचार आया।

हे भगवान! क्या ये एक साथ मरने की योजना बना रहे हैं ? एक डबल आत्महत्या पैक्ट? क्या ये वास्तव में ऐसा सोच रहे हैं? ये नहीं हो सकता !

‘माफ करना पद्मनाभन। मैं आपको इस तरह की वसीयत नहीं बना कर दे सकता। मैं यह समझने की कोशिश कर रहा हूँ कि आपके मन में क्या चल रहा है….प्लीज़ ऐसा मत सोचो। ऐसे हर विचार को छोड़ दो। आपको इस समय एक वकील की ज़रूरत नहीं है। मैं आपको एक अच्छा मनोवैज्ञानिक बताता हूँ।

उसने उन रक्तरंजित आँखों से मुझे देखा और पूछा, ‘क्या तुम जानते हो कि मेरा बेटा क्यों मरा?’

मैं कुछ नहीं कह पाया। एक युवा पुरूष की आत्महत्या को न्यायसंगत कैसे ठहराया जा सकता है? वह अपने माता-पिता को ऐसे छोड़कर कैसे जा सकता है, भले ही उसे किसी भी कारण ने इस कगार पर धकेला हो? उस समय मैं उस युवा पुरूष की अवहेलना करने के सिवा और कुछ नहीं कर सकता था।

‘वह एक अच्छा लड़का था, मेरा इकलौता बेटा। उसने कॉलेज में अच्छी पढ़ाई की थी, और भी आगे पढ़ना चाहता था। लेकिन मैंने ज़ोर दिया कि वह मेरे व्यापार में शामिल हो जाए। आखिरकार मैंने सबकुछ उसके लिए ही तो किया था, है ना? जब उसने काम शुरू किया, तो मैं धीरे-धीरे क्षेत्र की बिक्री से बाहर निकल आया और वह काम उसपर छोड़ दिया, ताकि वह शोरूम में बोरियत महसूस ना करे। अब जब मैं इसके बारे में सोचता हूँ, तो लगता है मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था….

वह हमारे जीवन का उजाला था। सारे पड़ोसी यह कहा करते थे कि हमारा परिवार कितना सुखी है। लेकिन ऐसी खुशी कभी टिकती नहीं है। मुझे पता होना चाहिए था।

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जब भी वह कुछ गलत करता था, मैं उसे यह कह कर चिढ़ाया करता था कि वह कोई रिटर्न नहीं ला रहा है। मैं उस पर चिल्लया करता था, ‘नो रिटर्न’, तुम्हें पालने की बजाए, मुझे शेयर्स में निवेश करना चाहिए था…. और वह सिर्फ मुस्कुराया करता था और कहता था कि एक दिन वह मेरा सबसे अच्छा निवेश साबित होगा। यह हमारे बीच एक नियमित मज़ाक बन गया – नो रिटर्न्स…’

वह अचानक रो पड़ा और आँसूओं को पोछने के लिए एक रूमाल निकाला जो उसकी आँखों से मुक्त रूप से बह रहे थे। मैंने देखा कि उसने खुद को चुप करने और कांपे बगैर दुबारा बोलने के लिए बहुत प्रयास किया।

‘वह एक अफेयर में पड़ गया। एक अधेड़ स्त्री के साथ। मैं नहीं जानता कैसे या कब। हमारे पड़ोसी ने उन्हें साथ में देखा और मुझे बताया। मैंने उससे पूछा और उसने बता दिया। मैंने उसे डांटा, चेतावनी दी। मेरी पत्नी ने उसके हाथ जोड़े की उसके पास ना जाए। और उसने वादा किया कि वह नहीं जाएगा…

लेकिन वह बहुत गहराई से उसके प्यार में था। जब उसने उसे अपने घर पर बुलाया, तो मेरा बेटा बेचारा जाने से खुद को रोक नहीं सका। उसने उस पर क्या जादू किया था, मैंने सोचा?

मेरा बेचारा बेटा…उन्होंने उसे उस लड़की के साथ पकड़ लिया। स्थानीय गुंडो का एक गिरोह। वे काफी समय से इसकी योजना बना रहे थे। उसे घर से बाहर निकाला और पीटा। सबके सामने उसका मज़ाक उड़ाया और ताने दिए…’

मोरल पॉलिसिंग। मोरल पॉलिसिंग अपना घिनौना चेहरा दिखा रही थी।

‘वह कभी वापस नहीं आया। वह कैसे आ सकता था? हमने उससे कहा था कि वह उसके पास ना जाए, कहा था ना? वह हमारा सामना नहीं कर सका, इसलिए उसने शहर में एक लॉज में कमरा लिया और….

मेरी पत्नी अब भी उसका इंतज़ार करती है, क्या तुम जानते हो? उसका डिनर गर्म करके रखती है और वरांडे में बैठकर मुझसे पूछती रहती है कि वह लेट क्यों हो गया है। मैं उसके लिए क्या कर सकता हूँ? मैं उसे कई बार बता चुका हूँ कि वह मर चुका है और अब कभी वापस नहीं आएगा…जानते हो उसके और मेरे बीच का मज़ाक सच बन गया। नो रिटर्न्स…अब वह कभी नहीं आएगा।’

उसके बाद उसने काफी समय तक कुछ नहीं कहा और मैंने भी कुछ नहीं कहा। फिर मैंने उसे यह समझाने की कोशिश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी कि उसके और उसकी पत्नी के पास आगे एक लंबा और उपयोगी जीवन है, और वे अपने जा चुके बेटे की याद को यादगार बना दे, अन्य युवा पुरूषों के लिए एक ऐसी चैरिटी शुरू करके जिन्होंने ऐसी ही खतरनाक परिस्थिति का सामना किया है या किसी अन्य योग्य कारण के लिए चैरिटी शुरू कर दें। मैंने उसे मनाने के लिए अपने सारे कौशल का उपयोग करते हुए हर संभव कोशिश की।

जब वह चला गया, मैंने सोचा कि मैंने उसे मना लिया है कि वह कुछ दिनों बाद अपनी पत्नी के साथ मेरे पास आएं, जबतक मैं अच्छे मनोचिकित्सक के बारे में पता कर लूंगा। मैंने उसे एक आत्महत्या परामर्श केंद्र का नंबर दिया और कहा कि उनसे बात कर ले।

प्यार, दुर्व्यवहार और धोखाधड़ी पर असली कहानियां

जाने से पहले उसने मुझे बताया कि कुछ भी गलत करने का उसका कोई इरादा नहीं है। लेकिन मुझे उसके बारे में कुछ असहज महसूस हुआ।

मैंने सोचा कि पद्मनाभन के साथी को बता दूं कि वह किस स्थिति से गुज़र रहा था। उसने मुझे बताया कि वह भी जानता था और उसने मुझसे वादा किया कि वह उस पर नज़र रखेगा ताकि कुछ अवांछित चीज़ ना हो। मैंने पूछताछ की और अच्छे मनोवैज्ञानिकों की एक छोटी सूची प्राप्त की जो शायद उनके लिए कुछ कर सकें। मैंने आत्महत्या परामर्श केंद्र को कॉल किया, पद्मनाभन का नंबर दिया, और उनसे कहा कि उसे फोन करे। मैंने उसे कई बार कॉल किया, लेकिन उसने फोन नहीं उठाया और ना ही दुबारा मुझे कॉल किया।

और मैंने पद्मनाभन का इंतज़ार किया।

वह कभी नहीं आया। दो दिन बाद, पद्मनाभन और उनकी पत्नी ने फांसी लगा ली।

यह बात अब भी मुझे परेशान करती है। क्या मैं और कुछ कर सकता था? क्या मैं भी किसी तरह से दोषी था? क्या मैंने उनकी पर्याप्त परवाह नहीं की? क्या मानव स्वभाव का घिनौना पक्ष, जो मैंने इतने वर्षों में कुछ ज़्यादा ही देखा था, उसने मुझे उनकी दुर्दशा के प्रति उदासीन बना दिया था?

मैं नहीं जानता। मैं बस गुंडों के उस गिरोह को कोस सकता हूँ, जिन्होंने प्रेमियों की एक जोड़ी को नैतिक सबक सिखाने की ज़िम्मेदारी खुद पर ली, जिन्होंने उस संबंध को तोड़ने से बहुत ज़्यादा कुछ किया, जो उन्हें स्वीकार्य नहीं था। उन्होंने उस लाड़ले बेटे के माता-पिता को लूट लिया था और उन्हें निराशा की गहराई, उसके अंत तक पहुंचा दिया था। उन्होंने एक पूरे परिवार को तबाह कर दिया था – एक ऐसा परिवार जो सुखी और खुश था, एक ऐसा परिवार जिसके पास जीवन में करने के लिए बहुत कुछ था, एक ऐसा परिवार जिसने दुनिया को रहने लायक बनाया था।

वास्तव में कोई रिटर्न्स नहीं। कितना सच है![/restrict]

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