Hindi

एक छत के नीचे रह रहे अजनबियों की प्रेम कहानी उनकी शादी के तीन साल बाद शुरू हुई

पति को पत्नी का भिन्न होना नहीं सुहाता था क्योंकि वह बाकी पत्नियों की तरह खरीदारी करने या व्यापार और स्टेटस के अनुसार पैसा खर्च करने में रूचि नहीं रखती थी। और फिर उसने पत्नी का वास्तविक रूप देखा और उससे प्यार कर बैठा। रतनदीप आचार्य एक ऐसी प्रेम कहानी सुना रहे हैं जो शादी के तीन साल बाद शुरू होती है।
love

लंबे समय तक फाइलों को गौर से देखने, और उसमें मेरे अधीनस्थों की गलतियों को ढूंढने में मुझे बहुत संतुष्टि मिलती थी। यह हमेशा मुझे एक गुप्त गर्व से भर देता था कि इस बड़े कॉर्पोरेट हाउस में मेरे विभाग में कोई भी निर्णय मेरी सहमति के बगैर नहीं लिया जाता था। जब भी मेरे कलीग और अधीनस्थ मेरी प्रशंसा करते थे, मैं एक भावहीन चेहरा रखता था भले ही मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो जाता था।

ऑफिस में लंबा समय बिताना उचित था और मेरे सहयोगियों में से कोई भी नहीं जानता था कि एक और गुप्त कारण भी था जिसकी वजह से यह गतिशील और अच्छा दिखने वाला सीनियर मेनेजर घर पर कम समय बिताना पसंद करता था।

ये भी पढ़े: मैंने एक वृद्ध पुरूष और उसकी पत्नी से प्यार के बारे में क्या सीखा

अब मैं अपने तीसरे दशक में था और मेरे बड़े 3 बीएचके वाले घर में मैं और मेरी पत्नी अर्पिता रहते थे। अगले हफ्ते हमारी शादी को तीन साल पूरे हो जाएंगे लेकिन मैं अब भी सोचता हूँ कि क्या मैं इस दुबली-पतली चश्मा लगाने वाली मनोहर लड़की को वास्तव में जानता हूँ।

हमारी अरेंज मैरिज थी, और मैंने अर्पिता को अपने कलीग्स की पत्नियों से मिलवाया और उसे प्रोत्साहित किया कि वह उनके साथ शॉपिंग पर जाए। मैं हमेशा उससे कहता था कि वह उनके साथ निरंतर महंगे रेस्त्रां में जाए। मैं चाहता था कि वह मेरे कलीग और सीनियर्स की पत्नियों के कदम से कदम मिला कर चले। लेकिन मेरे सारे प्रयास बुरी तरह विफल हो गए।

उसकी उम्र की महिलाएं जिन विषयों पर चर्चा करती थीं, वे उसे पूरी तरह घरेलू लगते थे। उसे भव्य रेस्त्रां की बजाए साधारण से उडिपि  रेस्त्रां का नाश्ता पसंद आता था।

ये भी पढ़े: ससुराल वालों की आलोचना के साथ जीना

मैं वास्तव में उसे यह समझाना चाहता था कि उसका पति बहुत पैसे वाला था और वह पैसे उड़ाने के लिए स्वतंत्र थी। सच तो यह है कि मैं समझता था कि अगर मैं अपनी पत्नी को ज़्यादा से ज़्यादा पैसा उड़ाने की आज़ादी दूंगा तो वह मुझे बहुत सम्मान देगी। लेकिन अर्पिता ने मुझे गलत साबित कर दिया। अगर वह पैसा खर्च करती भी थी, तो सड़क के किनारे डीवीडी विक्रेताओं से शास्त्रीय संगीत की सेकैंड हैंड किताबें और डीवीडी खरीदने पर।

मैं उसकी बेढ़ंगी जीवनशैली के लिए उसकी सामान्य मध्यम वर्गीय परवरिश को ज़िम्मेदार ठहराता था। कभी-कभी मैं एक सख्त टिप्पणी के साथ उसे हिंट देता था लेकिन वह मेरे ताने को एक शांत मुस्कान के साथ अनदेखा कर देती थी। मैंने कभी नहीं सोचा कि उसके बारे में भी कुछ सीखने लायक हो सकता है।

लेकिन जीवन हमेशा अपने सरप्राइज़ पैकेज के साथ तब आता है जब हम इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं होते हैं।

एक दिन जब मैं ऑफिस में था, तब मेरा दोस्त और कलीग अमितेश अचानक से मेरे कमरे में घुस आया, एक पिरीयोडिकल लेकर।

“क्या यह भाभी है?’’ उसने मुझसे सीधा पूछ लिया, मेरे सामने पिरियोडिकल खोल कर। यह अर्पिता भादुड़ी द्वारा एक फिक्शन कथा थी! एक भी शब्द कहे बिना, मैंने कहानी के कुछ पैराग्राफ पढ़े और जान गया कि लेखिका और कोई नहीं बल्कि मेरी पत्नी ही थी।

ये भी पढ़े: क्या हुआ जब पूरा ससुराल मेरे खिलाफ खड़ा था…

“हाँ, यह वही है,’’ मैंने धीरे से अमितेश को कहा।

“बहुत अच्छा यार, तुमने हमें कभी बताया नहीं कि भाभी इतनी प्रतिभाशाली हैं। यह कितना प्रतिष्ठित पिरियोडिकल है। इसमें प्रकाशित होना कितने सम्मान की बात है।”

अमितेश के जाने के बाद, अपने दिल के बारे में गहरे मंथन के साथ मैंने कहानी को बारीकी से पढ़ा।

कहानी ऐसी लड़की के बारे में थी जो पक्षियों के साथ अपने अकेलेपन का आनंद लेती थी, जिन्हें वह पानी और भोजन के टुकड़े और नन्हें पौधे खाने के लिए देती थी जो उनके फ्लैट के वरांडे में मिट्टी के गमलों में उगते थे। मुझे यह कभी पता नहीं चला था कि दिन के दौरान, जब मैं ऑफिस में व्यस्त होता था, अक्सर हमारे कमरे में छोटी चिड़ियाएं आती थी, उसकी हथेली पर आराम से बैठती थी और अनाज खाती थी।

women with bird
Image source

ये भी पढ़े: एक अरेंज मैरिज का कठोर सच

यह मेरी कल्पना से बाहर था कि एक औरत पौधों को इतने प्यार से पानी डाल सकती है जैसे कि वे उसके अपने बच्चे हों। भाषा पर उसकी पकड़ और उसके लेखन कौशल ने मुझे विश्वास दिलाया कि वह काफी समय से लिख रही थी।

कहानी दो बार पढ़ने के बाद मैं लंबे समय तक चुप रहा। आत्म गर्व और अहंकार की भूलभुलैया में खोते हुए मैंने कभी अर्पिता को समझने की ज़हमत नहीं उठाई जबकि वह अपने ही तरीके से विकसित होती रही।

देर किए बगैर, मैं रोज़ की तुलना में ऑफिस से जल्दी निकल गया।

घर पहुंचने पर मैंने उसे खिड़की पर खड़े देखा, ढलते सूरज को निहारते हुए।

प्यार की कहानियां जो आपका मैं मोह ले

ये भी पढ़े: एक तलाकशुदा स्त्री को भारत में अभिशाप के रूप में क्यों देखा जाता है?

“तैयार हो जाओ, आज हम शॉपिंग करने जाएंगे,’’ मैंने उसे सीधा कहा।

“लेकिन मुझे शॉपिंग मॉल से कुछ नहीं चाहिए,’’ उसने उत्तर दिया।

“नहीं शॉपिंग मॉल नहीं, हम सेकैंड हैंड किताबें खरीदने जाएंगे, जितनी भी तुम्हें लेनी हो। आज वही हमारी शॉपिंग होगी,’’ मैं उसे देख कर मुस्कुराया।

एक बार के लिए उसकी आँखें खुशी से चमक उठी।

15 मिनट बाद जब हम हाथ में हाथ डाले जा रहे थे, मैंने अपने अन्यथा सबसे वफादार साथियों को अलविदा कह दिया – पुरूष अहंकार और सूक्ष्म अभिमान को।

वेतन मायने रखता है

बिमारी और दर्द में हम साथ हैं

पिता ने नयी पीढ़ी को मतलबी कहा मगर जब बात खुद पर आई

Facebook Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also enjoy:

Yes No