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एक प्रस्ताव, नशे में भेजा गया एक मैसेज और एक हैप्पिली एवर आफ्टर

नशे में एक मेसेज भेजा और बहुत सी योजनाओं पर पानी फिर गया
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मैं वास्तव में नहीं जानती थी कि मैं किस चक्कर में पड़ रही थी जब मैंने टिमटिमाते तारों वाले आकाश के नीचे अर्जुन को हाँ कहा। मैं छत पर उसके पसंदीदा शॉर्टस पहने उसकी गोद में बैठी थी। मेरे बाल पूरी तरह बिखरे हुए थे। बालों में हरे रंग की स्ट्रीक्स अब गंदे पीले रंग में बदल रही थी लेकिन अंधेरा इतना था कि यह देखा नहीं जा सकता था। हम काफी नशे में थे जब उसने बिल्कुल अप्रत्याशित प्रश्न पूछ लिया। हाँ, हाँ, हाँ! और नशे के पागलपन में मैंने अपनी संपर्क सूची में लगभग सभी को एक स्वाभाविक मैसेज भेज दिया जो कहता था कि मैं अर्जुन से शादी कर रही हूँ। दुर्भाग्य से उस समय मुझे यह अहसास नहीं हुआ ‘लगभग सभी’ में मेरे सभी अंकल, आंटियां और सबसे महत्त्वपूर्ण मेरे मॉम और डैड शामिल थे -एक गलती जिसका अहसास मुझे अगली सुबह हुआ।

दोपहर के लगभग एक बजे होंगे जब मैं अंततः एशा के फोन से जागी जो मुझसे पूछ रही थी, ‘‘क्या तुम सही बोल रही हो?’’

“किस बारे में?’’

“शादी और अर्जुन…और क्या?’’

अर्जुन के साथ मेरे संबंध ने थोड़ा गंभीर मोड़ ले लिया और हम दोनों जान गए की हम दोनों का ‘हैप्पिली एवर आफ्टर’ एक दूसरे के साथ ही होगा। लेकिन उसे यह बात अचानक से इतनी अहम क्यों लगने लगी, हैंगोवर से जूझते हुए मैं यह बात समझ नहीं पा रही थी।

“हाँ……क्यों?’’

“तो उसने तुमसे कैसे पूछा?’’
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इसी बीच मैंने देखा की एक आंटी (आपको बता दूँ कि वो आमतौर पर फोन नहीं करती) मुझे फोन कर रही थी, इसलिए मैंने एशा को होल्ड पर रख दिया।

“हैलो?’’ मैंने कहा, मैं जानने के लिए काफी उत्सुक थी कि अचानक से उन्हें मुझमें रूचि क्यों आ गई है।

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“क्या तुम सच बोल रही हो?’’

ना हेलो, ना हाय, कोई नमस्कार नहीं, बस वही प्रश्न जो एशा का प्रारंभिक कथन दोहरा रहा था। मैं दंग रह गई।

उन्होंने अपना प्रश्न दोहराया।

“क्या तुम सच बोल रही हो?’’

और मैंने संदेह करते हुए पूछा, ‘‘किस बारे में?’’

“शादी…अर्जुन…और क्या?’’ उन्होंने हकीकत बयान करने के तरीके से उत्तर दिया।

“आपको कैसे पता?’’ मैंने पूछा। जहां तक मुझे पता था कि वे बस इतना जानती थी की अर्जुन एक दोस्त था, उन्हें यह तक नहीं पता था की मैं अर्जुन को डेट कर रही थी।

“तुम्हारा मैसेज, पागल! मैंने सुबह देखा!’’

और तब मुझे कल रात की सारी घटनाएं याद आ गईं। मैंने फोन काट दिया।

तब मैंने देखा की सुबह से कितने लोगों ने मुझसे संपर्क करने की कोशिश की थी। मेरे फोन में 16 मिस्ड कॉल और 23 मैसज थे। अंतिम मैसेज अर्जुन का था, जो आधे घंटे पहले आया था। मुझे लगा यह सबसे ज़्यादा सुकून देने वाला होगा और उस पर क्लिक कर दिया। उसमें लिखा था, ‘‘तुम्हारे डैड ने फोन किया था। मैं अभी तुम्हारे घर पर हूँ। जाग जाओ और जितनी जल्दी हो सके बाहर आ जाओ। चाहे कुछ भी हो जाए अब भी तुमसे प्यार करता हूँ।”

लग रहा था जैसे मर जाऊं। ठीक उसी क्षण मेरी मॉम अंदर आ गईं ‘‘तुम्हारी आंटी बुला रही हैं। तुम्हारा काम हो जाए तो प्लीज़ बाहर आ जाना, लगभग सभी लोग यहां हैं। कुछ को तुम्हारा मैसेज मिला, कुछ को डैड ने बुलाया है,’’ उन्होंने इतने भावहीन चेहरे के साथ कहा की मैं समझ गई की वह तुफान से पहले की शांति थी।

मैं कमरे से बाहर निकली, कोशिश करते हुए की अपने सच्चे प्रेमी के हाल की कल्पना ना करूं, जब मुझे ड्राइंग रूम से बहुत सी आवाज़ें सुनाई दे रही थी। मैं घबरा गई थी। मुझे लगा की निश्चित ही मुझे दिल का दौरा पड़ जाएगा। मुझे लगा मैं गिर रही हूँ। कुछ नहीं हुआ। मैं जानती थी की मुझे जाना होगा, आगे बढ़ना होगा और उन सबका सामना करना होगा। आवाज़ें हंसने की आ रही थीं। मैं समझ गई कि उसका मतलब था की शादी की बात स्वीकार ली गई है, और मुझे कच्चा नहीं चबा लिया जाएगा। फिर भी मेरे कदम नपेतुले और धीमे थे। अचानक से मुझे महसूस हुआ की मैं पूरी तरह शर्मिंदगी में डूबी हुई हूँ। मैं साहसी टॉमबॉय थी, ऐसी कभी नहीं थी, लेकिन मुझे क्या पता था कि कैसे सबकुछ बदलने वाला है, अब मुझे कितनी अलग तरह से देखा जाएगा, मैं कितनी नामहीन बन जाऊंगी, कैसे मैं बस एक अन्य दुल्हन बन जाऊंगी।

“अरे, अभी भी शॉर्टस में हो? जाओ और कम से कम सलवार तो पहन लो!’’

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“मुझे तो पता ही नहीं चला कि ये कितनी जल्दी बड़ी हो गई! बहुत सुंदर!’’

“मुझे एक अच्छी साड़ी की दुकान मिल गई है, हम शादी की साड़ी वहां से खरीद लेंगे।”

“तुम्हें मेहंदी वाली को सूचित करना होगा, यह शादी का मौसम है।’’

“शादी की पत्रिका!’’

“स्थान और मेन्यू के बारे में क्या?’’

“मैरिज रजीस्ट्रार को सूचित करना होगा।”

“पहली बात, काले बाल! फिर ब्यूटी पार्लर….हे भगवान, ब्यूटिशियन को बुक करना होगा!’’

यह सबकुछ जो हो रहा था, उसे समझने में मुझे थोड़ा समय लगा। एक बुरे सिरदर्द के बीच मैंने अपनी शादी को अपने हाथों से फिसलते देखा। मेरे सभी रिश्तेदार बिना नाम के चेहरों की तरह लग रहे थे, जो उत्साह को मूर्त रूप दे रहे थे। एक नाटक का पर्दा खुलना था और उन सभी की भूमिकाएं थीं। मुझे भी मेरे संवाद जल्द ही दे दिए जाएंगे। मुझे बस उन्हें रट कर प्रस्तुत करना था। मैंने यह जाने बिना कि आगे क्या होगा, नायिका की भूमिका स्वीकार कर ली थी।

कल रात, हमने अपनी शादी की योजना बना ली थी।

“हम एक पीली पनडुब्बी में विवाह करेंगे।”

“डेनिम शॉर्टस में”

“हम एक सात मंज़िलों वाला केक लेंगे।”

“और फ्लरीज़ से चिकन पैटिस।”

“मुझे गुलाबी रंग में दिल के आकार के गुब्बारे चाहिए।”

“क्या यह ज़्यादा ही बचकाना नहीं होगा?’’

“शायद….’’

“चलो एक शैंपेन टॉवर ले लेंगे।”

“हाँ! और हम एक दूसरे को सिल्वर पीस रींग पहनाएंगे।”

“चलो अभी एक दूसरे को अपने अनंत प्रेम का वादा करते हैं।”

मुझे लगा यह एक शानदार विचार था और हमने सिगरेट फॉइल से अंगूठी बनाई। हमने सगाई कर ली और हमने एक दूसरे को चूमा।

“तुम खयाली पुलाव बना रहे हो।”

“लेकिन मैं यह अकेला नहीं कर रहा।”

शुरू में उन सबकी आंखें मुझ पर थीं, लेकिन जैसे ही उन्होंने मुझपर वाक्यों और प्रश्नों की बरसात की, वे अपने ही शब्दों, अपने ही विचारों में खो गए। मैंने एक नज़र अर्जुन पर डाली। वह अपने चेहरे पर स्थायी मुस्कान लिए फर्श पर देख रहा था। यद्यपि हम बिना लड़े ही एक युद्ध जीत गए थे, वह जानता था की सब कुछ उपयुक्त करने के लिए मुझे बहुत सारे युद्ध जीतने होंगे। उपयुक्त -एक ऐसा शब्द जिसे परिभाषित करना अधिक से अधिक कठिन होता जा रहा था। और वह जानता था की अंततः मुझे आत्मसमर्पण करना होगा।

जैसे-जैसे शादी के दिन करीब आ रहे थे, मैं अर्जुन से बहुत कम मिल पा रही थी और बहुत ज़्यादा चिड़चिड़ी होती जा रही थी। अब मैं भतीजी, कज़िन या पोती नहीं रह गई थी, मैं दुल्हन बन चुकी थी जिसे हमेशा मुस्कुराना पड़ता है। मुझे अहसास हुआ की जिस परिवार को मैं अपना कहती थी वह अब मेरा नहीं रह गया था। लोगों ने मेरे घर पर भीड़ जमा कर ली और मेरा एकांत छीन लिया। मेरी पीली सबमरीन, शॉर्ट्स, केक, पैटीज़, शैंपेन फाउंटेन, सिल्वर पीस अंगूठी, सभी वस्तुएं जिनसे मेरे सपने बुने थे, बिखर चुकी थीं और उनकी जगह बैंक्वेट्स, बनारसी साड़ीयों, हीरों, कबाब, मिठाइयों, मेहंदी ने ले ली थी। इन सब के बावजूद मुझे मुस्कुराना था। लेकिन हैरानी की बात है, मुस्कुराते हुए मेरा मुँह दर्द करने लगा था। मेरे गाल दुखने लगे थे। मैं एक शर्मिली दुल्हन को छोड़ कर बाकी सब कुछ थी। लेकिन हर बार जब मैं अर्जुन के बारे में सोचती थी, मुझे खुशी होती थी और जैसे-जैसे हर दिन गुज़र रहा था मैं एक विचित्र पेय का बड़ा गिलास पी रही थी -भावनात्मक कॉकटेल।

“हमारे पीले सबमरीन के स्थान पर कितना कुछ,’’ मैंने अर्जुन के कान में कहा जब हमने अपनी शादी के रिसेप्शन के अंतिम मेहमान को विदा किया। मैंने उसकी आंखों में देखा और माफी मांगते हुए कहा, ‘‘इस सपने देखने वाली ने हार मान ली!’’ वह हंसा और बोला, ‘‘हाँ, प्यार के लिए।”
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