एक विधवा स्त्री और विवाहित पुरूष की अनूठी प्रेम कहानी

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मैंने पहली बार उसे उसकी अदालत में देखा। वह माननीय जज था और मैं एक मुलज़िम के साथ उसकी अदालत में आई थी। वकीलों ने कहा, ‘‘बेहतर होगा कि आप जितना हो सके उसकी अदालतों से बचें। वह समय का पाबंद, ईमानदार और साहसी है।” मैं आज की दुनिया में एक दुर्लभ नमूने के रूप में उसकी एक झलक पाने के लिए उत्सुक थी। मैंने दरवाज़े से न्यायकक्ष में झांका। वह वहां अपनी सीट पर उत्तमता से बैठा था। एक आकर्षक सज्जन, स्मार्ट; लेकिन मैं 10 सेकंड से ज़्यादा देर उसे नहीं देख सकी, क्योंकि उसकी तीखी नज़रे मुझे पर थीं।

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उसने स्वीकार किया कि वह मुझे पसंद करता है

चमत्कारिक रूप से, हम अगले महीने ही सोशल मीडिया के माध्यम से जुड़ गए। उसने मेरे लेखों के प्रति अपनी पसंद व्यक्त की और जल्द ही हम अच्छे दोस्त बन गए। मैं उसे हर दिन लिखा करती थी, मैं अपनी चिंताएं, दर्द, योजनाएं और खुशी उसके साथ बांटती थी। अपने व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद, वह मुझे धैर्य से सुनता था और जब भी मैं परेशान होती थी मुझे सांत्वना देता था। उसे मुझे एक विधवा के रूप में देखना पसंद नहीं था और वह मुझे पुनर्विवाह करने की सलाह देता था। वह समय जल्द ही आ गया जब हमें एक दूसरे के साथ बातें करने में आनंद आने लगा। और एक शाम, मैंने देखा कि वह 20 वर्ष के एक लड़के की तरह मेरे फोन का इंतज़ार कर रहा है।

वह मेरे लिए केवल एक जज नहीं था जिसका मैं ईमानदार, सख्त और बुद्धिमान होने के लिए सम्मान करती थी। वह उससे ज़्यादा कुछ बन गया।

“ऐसा लगता है तुम्हें मुझसे प्यार हो गया है,’’ उसने कहा।


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“तुम्हें भी मुझसे प्यार हो गया है,’’ मैंने कहा।

शब्दों में प्यार

यह एक अद्भुत प्रेम कहानी की शुरूआत थी। हाँ, मैं उससे प्यार करती थी। मैं एक विवाहित पुरूष से प्यार करती थी। लेकिन मैं निश्चित थी कि सिर्फ सकारात्मकता फैलाने के लिए इस संबंध को अर्थपूर्ण बनाऊंगी। मैं नहीं चाहती थी कि कानून का पालन करने वाला जज कानून तोड़े और मैं कभी ऐसे प्यार के लिए नहीं तरसी जिसपर किसी और के आसूंओं के दाग हों। इसलिए, प्यार में गहराई से डूबे होने के बावजूद, हमने शारीरिक दूरी बनाए रखने का निर्णय लिया। हालांकि दूरी पीड़ादायक थी, मैंने प्यार और परवाह को महसूस किया। हर दिन, दिन के अंत में, हम एक दूसरे से बातें करते थे और एक दूसरे को मासूमियत भरे चुटकुले सुना कर एक दूसरे को खुश करने की कोशिश करते थे। हम उन सभी चीज़ों से बचते थे जो हमें शारीरिक रूप से करीब ला सकती थीं। मैं उस स्त्री की भावनाओं का सम्मान करती थी जो मेरे प्रेमी का एक हिस्सा थी।

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“मुझे तुम्हें अपने बेटे के साथ खेलता हुआ या उसकी परवाह करता हुआ देखना पसंद है,’’ उसने कहा। उसे मेरे अंदर की मजबूत माँ देखना पसंद था। और मुझे उसे एक गरिमामय पुरूष के रूप में देखने पर गर्व होता था।

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हमने अलग होने की कोशिश की

दो वर्ष बीत गए। पिछले एक साल मैं उससे नहीं मिली। मैंने उससे बात करना बंद किया ताकि वह मुझे भूल पाए। अचानक, एक रात उसने बिखरी हुई आवाज़ में मुझे फोन किया।

“मुझे तुम्हारी ज़रूरत है। मुझे छोड़ कर मत जाओ,’’ उसने रोते हुए कहा। मेरे दिल में तूफान आ गया। अगले दिन, मैं उसके पास गई। मैं एक खराब सेहत वाले पुरूष से मिली। उसका दाढ़ी वाला चेहरा मुझे देखकर चमक गया। हमने उसके व्यस्त कक्ष में बात की। हमने नियमित रूप से संपर्क में रहने का फैसला किया और सामाजिक कार्य के क्षेत्र में एक साथ काम करने का निर्णय लिया। हाँ, हमें और कुछ नहीं बल्कि अपने जीवन में एक दूसरे की उपस्थिति की ज़रूरत थी।

भावनात्मक रूप से हम इतने अधिक जुड़े हुए थे कि हम एक दूसरे के प्रति हमारी शारीरिक वासना को अलग रख सकते थे।

जल्द ही उसका स्वास्थ्य ठीक हो गया और मैं अपने जीवन में वह सकारात्मक ऊर्जा महसूस कर सकती थी।

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अब हम सामाजिक कार्यों के लिए मिल कर काम कर रहे हैं। वह पहाड़ों पर रहता है और मैं मैदानों में। यह मेरे लिए काफी प्रतीकात्मक है। हम एक साथ होने के लिए नहीं बने, लेकिन हमारी अपनी सुंदरता है और हम अपने तरीके से दुनिया में योगदान कर सकते हैं।

फूल और खुशबू

“जब अंधेरे में देवदार के पेड़ आवाज़ करे, मुझे याद कर लेना। उनकी सांस लेने की आवाज़ सुनना और बस मुझे याद कर लेना। मैंने वहां सिर्फ तुम्हारे लिए एक मुस्कान रखी है, उसे अपने होठों पर सजा लेना, और बस मुझे याद कर लेना। मैं चांदनी से खेलती हुई तुम्हारे लिए यहां हूँ, बस मुझे याद कर लेना और पहाड़ी से नीचे आ जाना।” जब मैं शिलांग की पहाड़ी सड़क पर देवदार और बुरूंश के जंगलों को पार कर रही थी, मैंने फोन निकाला और ये शब्द उसे मैसेज कर दिए। मुझे हवा में उसकी खुशबू महसूस हुई। क्या वह पिछले बसंत में इस राह से गुज़रा था जब बुरूंश पूरी तरह खिले थे?

इस प्रेम कहानी का कोई अंत नहीं है। आप चाहे तो मेरी आलोचना कर सकते हैं। ये खिलते हुए बुरूंश गवाह हैं।

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Readers Comments On “एक विधवा स्त्री और विवाहित पुरूष की अनूठी प्रेम कहानी”

  1. Is love story me kuchh b galat nai h.jaise radha ne shyam ko pyar kiya ye waisa hi pavitra pyar h .koi kisi ko brbad nai kr rha aur apni had me h.radha krishan ko kisi ne galat nai kaha to is aurat ko kyu.galat jb hota jb wo apni had par krti aur kisi aurat ka ghar todne ki sochti.

    1. Bahot khoobsurat love story hai .pyaar kabhi bhi kisi ko bhi ho sakta hai kisi se.apni maryaada nhi bhoolni chahiye apne daayre nhi bhoolna chahiye

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