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एकतरफा प्यार में क्या है जो हमें खींचता है

अप्राप्य प्यार तकलीफदेह ज़रूर है, मगर तसल्ली रखें आप इस दर्द को महसूस करने वाले अकेले नहीं हैं...
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उसके काले, घने बाल थे जो तेज़ सूरज में क्या खूब चमकते थे. उनकी चमक से मेरे चेहरे पर भी चमक आ जाती थी. हर बार जब वो मुझसे प्यार से कुछ कहता, मेरे गाल सुर्ख गुलाबी हो जाते और दिल बार बार कहता, “वो तुम्हे प्यार करता है.” मैं झट से शर्मा जाती और वो उतनी ही तत्परता से मुझे कुछ तो ऐसा कह ही देता की मेरे गुलाबी गाल और सुर्ख हो जाते. सच कह रही हूँ की जब वो मुझे देखता था, उसकी नज़र बाकियों से कुछ एक-आध सेकंड ज़्यादा तो ज़रूर रूकती थी, और मैं सपनों में खो जाती थी, जिसमे हम दोनों होतेऔर हमारा फलता फूलता सच्चा प्यार था.

“तुम लोगों को क्या लगता है, वो मुझसे प्यार करता है?” मैं अपनी सहेलियों से पूछती.

“क्या ये सिर्फ मेरी कल्पना है या सच में वो भी मुझे उतना ही प्यार करता है?”

“तुम लोगों को क्या लगता है की क्या हम कभी साथ हो पाएंगे?”

मैं अपने सवालों से खुद बहुत परेशान हो जाती थी मगर अब लगता है की शायद सहेलियां ज़्यादा परेशान होती होंगी मेरे सवालों के बौछार से. एक भी शाम ऐसी नहीं होती थी जब मैं ये सारे अनगिनत सवाल उनसे नहीं पूछती थी. उससे हुई हर बात मैं कई बार अपने मन में दोहराती, उसमे छिपे अनकहे शब्द ढूंढ़ती और फिर उन आँखों को मन ही मन फिर सी क़तर कर उनके पीछे के भाव समझने की कोशिश में जुट जाती. क्या उसने सच में बस ये कहा था? क्या उसका मतलब ये था? क्या वो … और न जाने क्या क्या सोचती रहती.
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वो खूबसूरत शालीन लड़का मुझसे उम्र में कुछ साल बड़ा था, और वो जिस तरह मुझे देखता था और मुझसे बातें करता था, मुझे यकीन था आग दोनों तरफ ही बराबर लगी थी. मगर ये बात भी सच थी कि सिर्फ एक मैं ही नहीं थी जो उसके प्यार में पागल थी. वो तो जैसे प्यार बरसा रहा था, मगर मुझे इस सच से भी कोई ज़्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ता था. मगर मेरा दिल जो पहली बार प्रेम को समझ रहा था, एक दिन टूट गया जब वो खूबसूरत शालीन लड़का देश छोड़ कर परदेश चला गया. मैं तो अपने मन की बात उसे बता भी नहीं पायी थी.

मैं उसके जाने के गम में उदास रहती थी. जब भी कोई दुखी गाना सुनती, अनायास ही यादों में वो आ जाता था और फिर शुरू होती थी मेरी कल्पना जिसमे मैं उसके साथ होती और सोचती की “वो होता तो क्या होता”. कई दिनों तक विरोह का ये दर्द चलता रहा.

हममें से कितने और लोग है जो अप्राप्य के पीछे भागे हैं? कितनी बार उसे प्यार कर बैठे हैं, जो हमारा हो ही नहीं सकता? कितनो के प्यार को तिरस्कृत या रिजेक्ट किया गया हैँ? इस सफर में हम अकेले नहीं हैं.

शब्दों में पिरोया एक प्रेम प्रसंग

लेखिका, कवियत्री अमृता प्रीतम को कौन नहीं जानता. अमृता दस वर्षों तक साहिर लुध्यानवी के लिए तड़पती रही, बावजूद इसके की वो तब तक इमरोज़ से मिल चुकी थी. इमरोज़ वही शख्स है जिसके साथ अमृता आगे जाकर अपनी ज़िन्दगी बिताती हैं. अमृता और साहिर की प्रेम कथा अधिकांश प्रेमपत्रों के माध्यम से ही हुई. जब वो मिलते तो बहुत ही काम बातें करते, अधिकतर समय एक दुसरे की आँखों में देखकर ही गुज़ार देते. अमृता ने अपनी किताब “रसीदी टिकट” में लिखा है की कैसे वो साहिर की बुझाई हुई सिगरेट के कश भरती थी, ताकि वो उसके सान्निध्य को महसूस कर सकें. साहिर ने कभी इस रिश्ते को आगे नहीं बढ़ने दिया और अमृता का दिल टूट गया.

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अगर निर्माता निर्देशक गुरु दत्त ने इतना वहीदा रहमान को इस कदर बेइंतेहा प्यार न किया होता, तो शायद कभी कागज़ के फूल जैसी उम्दा फिल्म न बना पाते. अक्सर कहा जाता है की कागज़ के फूल गुरु दत्त और वहीदा रहमान के अप्राप्य प्रेम की ही कहानी है, जिसमे आखिर तक वहीदा अपने प्यार को कबूल नहीं करतीं और उसे हमेशा अपने मेंटर की तरह से दर्शाती हैं.

राज कपूर और नरगिस ने सुनहरे परदे पर कई बार जादू चलाया. उनकी रियल ज़िन्दगी में उमड़ती उनकी भावनाएं बिलकुल साफ़ तौर पर उनकी एक्टिंग में भी दिखती थी. कहा जाता है की नरगिस ने दस साल राज कपूर के इंतज़ार में बिता दिया मगर राज कपूर अपनी पत्नी को छोड़ नहीं पाए.

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संजीव कुमार के बारे में भी कहते हैं की वो हेमा मालिनी को दीवानो सी मोहब्बत करते थे मगर हेमा मालिनी का दिल तो धर्मेंद्र पर आ गया था. संजीव कुमार ने कभी किसी और स्त्री को अपने जीवन में आने नहीं दिया और अपने आखिरी दिनों में बिलकुल अकेले और दुखी थे.

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और इस रुपहले परदे के पीछे के अगर एकतरफा प्यार की बातें करें, तो एक जोड़ी भूली नहीं जा सकती और वो है अमिताभ बच्चन और रेखा की. कहा जाता है की रेखा अमिताभ के सामने इतना सकपका रही थी की अक्सर अपने डायलॉग्स तक भूल जा रही थी. यह किस्सा ७० के दशक का है जब जंजीर के हिट होने के बाद अमिताभ एक सुपरस्टार की तरह फिल्म जगत में प्रसिद्द हो रहा था. निर्माता दुलाल गुहा ने दोनों को अपनी फिल्म “दो अनजाने” के लिए था और रेखा बार बार नर्वस हो रही थी. तब एक दिन अमिताभ ने उनसे जा कर कहा, “सुनिए, ज़रा अपने डायलॉग्स याद कर लीजियेगा.”

आगे जाकर हिंदी फिल्म जगत के यह सबसे रोमांटिक ऑनस्क्रीन जोड़ी बन गए और आज भी ये माना जाता है की इनके बीच ऑफ स्क्रीन भी अफेयर था. रेखा ने एक बार फ़िल्म्फएयर पत्रिका के एक इंटरव्यू में यह कहा था, “मैं अपने आप को किसी और के साथ कमिट करते हुए देख भी नहीं सकती हूँ.” हालांकि अमिताभ ने इस रिश्ते की कभी कोई पुष्टि नहीं की.

यह उसकी नहीं आपकी कहानी है

“अप्राप्यप्रेम प्रेम करनेवाले की कहानी होती है, कुछ ऐसा कहती हैं लिसा फिलिप्स अपनी पुस्तक “अरेक्विटेड: वुमन एंड रोमांटिक ओबसेशन.” वो कहती है की ऐसा प्रेम सुनने में तो काफी अधीन लगता है मगर असलियत में ये काफी स्वाभिमानी होता है. यह वो बहुत ही चरम भावना है जो किसी को किसी के लिए कुछ भी करने पर मजबूर कर सकती है.

फिलिप कहती है की एक तरफा प्यार एक चक्र की तरह होता है, जिसमे आपको जितनी संतुष्टि मिलती है, उतनी ही और चाहत बढ़ती है. अगर इस चक्र से निकलना हो तो सबसे पहले अपने इमोशंस की दिशा बदलनी होगी और कुछ और करना होगा अपनाम न उस प्रेम से अलग भटकाने के लिए.[/restrict]

वह प्यार में पागल हो गई थी और ना सुनने के लिए तैयार नहीं थी

जब उसने हमारा संबंध समाप्त किया तो मैं उसे गोली मारना चाहता था

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