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एक्स्ट्रामैरिटल अफेयर के शुरू और खत्म होने का रहस्य

तो इस प्रकार एक अफेयर शुरू हुआ
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(जैसा कि अनीता बाबूनारायनन को बताया गया)

एक एक्स्ट्रामैरिटल अफेयर (विवाहेतर संबध) आमतौर पर कितने समय तक टिक सकता है और टिकता है? कौन इसे शुरू करता है, कौन खत्म करता है और क्या है जो एक अवैध, अनैतिक संबंध को खत्म करता है? और अंत में, कौन हैं वे लोग जो ऐसे व्यवहार में लिप्त होते हैं?

एक एक्स्ट्रामैरिटल अफेयर की उम्र कितनी होती है?

ये कुछ सवाल थे जो मीरा के खयाल में आते थे, जब तक यह उसके साथ नहीं हुआ। और हालाँकि यह घिसा-पिटा लगा, उसे यह मानना ही पड़ा की यह ऐसे ही हो गया! हालाँकि जब उसने पीछे मुड़कर देखा, उसे लगा कि परिस्थितियों के कारण ऐसा तो होने ही वाला था, उसकी पूरी ज़िंदगी में।

एक साधारण जीवन

एक मध्यम वर्ग का शहरी अस्तित्व, रूढ़िवादी माता-पिता और सास-ससुर, एक ‘फंसा हुआ’ पति पर्याप्त कारण नहीं थे कि एक स्त्री सुरक्षित और स्थिर विवाह से बाहर भटके। और स्थायित्व उन मुख्य कारणों में से एक था जिसकी वजह से उसने अरेंज मैरिज का ‘चयन’ किया था।

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कोई वास्तविक दुख नहीं था। लेकिन शादी के छह महीने के भीतर बैचेनी शुरू हो गई थी। यह एक टीस उठाने वाला विचार था कि क्या जीवन के पास प्रस्तुत करने के लिए, एक सुरक्षित शादी, एक पति जो हर शाम घर आए और शालीन ससुराल वालों से ज़्यादा रोचक भी कुछ था।

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और फिर वह उसकी ज़िंदगी में आया।

इस उदासीन अवस्था के दौरान विशाल ने उसकी ज़िंदगी में प्रवेश किया। वह उन पीछे-पीछे घूमने वाले पुरूषों के विपरीत था जो उसे पहले मिले थे। वह हमेशा अपने सामान्य कार्यस्थल पर हानिरहित छेड़खानी का आनंद लेती थी लेकिन विशाल अलग था। वह एक प्लेयर नहीं था। हालांकि वह शादीशुदा था, उसकी छेड़खानी में एक सच्चाई थी और वह उसके साथ इतनी निर्दोश तरह से यह खेल नहीं खेल सकती थी जितना वह पहले दूसरों के साथ करती थी।

और इस तरह अफेयर शुरू हुआ

उस दिन, वे रेल्वे स्टेशन जा रहे थे जब अचानक विशाल ने चक्कर लगाते हुए कहा…‘‘बीच पर जाना चाहती हो?’’ उसने विशाल को कई बार बताया था कि मुंबई में रहने के बावजूद, उसने कभी अरब महासागर में सूरज को डूबते नहीं देखा था। उसने बिना कुछ सोचे ‘क्यों नहीं’ कह दिया।

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जल्द ही वे समुद्र तट पर थे, सूर्य पहले ही डूबने लगा था, और इससे पहले की उसे पता चलता, विशाल का दाँया हाथ उसके बाँए वक्ष (ब्रेस्ट) पर था। स्पर्श बहुत ही रोमांचक था और भले ही उसे पता था कि उसे यह रोकना चाहिए, वह खुद को रोक नहीं सकी। इसकी बजाय, वह उन चुम्बनों का आनंद लेने लगी जो किसी भी बातचीत को असंभव बना रहे थे। उस पल में कुछ भी मायने नहीं रखता था, और तब उसे पता चला कि यह कैसे शुरू हुआ।

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उसके बाद उसे दुखी होने का दिखावा करना फालतू लगा। उसके बाद उसने खुद को जुनून और इच्छित होने की कसक में बहने दिया जैसा उसने पहले कभी महसूस नहीं किया था। उपहार, अंतहीन फोन कॉल्स, हाथ थामना, पार्कों और लिफ्टों में चुराए हुए पल, सब कुछ मधुर था, जिससे वह अकेले में मुस्कुरा पड़ती थी। उसने तथाकथित हनीमून के दिनों में भी इस उत्साह का अनुभव नहीं किया था। अपराधबोध ने मादक मिश्रण को केवल बढ़ाया ही था।

अफेयर का अंत

लेकिन सूर्य को अस्त होना था और एक दिन वह हुआ। कम होते फोन कॉल्स, एक साथ देखे जाने की अनिच्छा, उनके बीच दूरी एक ही बार में नहीं आ गई। इसे पाँच महीने लगे। अंत में उसने विशाल से पूछ ही लिया, ‘‘क्या हुआ? तुम मुझे अनदेखा क्यों कर रहे हो?’’

“मुझे माफ करना। शायद मेरी पत्नी को पता चल गया है। वह मुझसे हर समय तुम्हारे बारे में संदिग्ध सवाल पूछती रहती है। हर दिन मैं उससे झूठ बोलता हूँ। मैं अब और सहन नहीं कर सकता। मैं सोचता था कि मैं कर सकता हूँ, लेकिन नहीं। यह मेरे बस की बात नहीं है। मैं तुमसे प्यार करता हूँ, लेकिन हमारे बीच सब खत्म हो चुका है।”

और इसलिए अब वह यह भी जान चुकी थी कि ये चीज़ें खत्म कैसे होती हैं!

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