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हादसों से निकल कैसे ये सात शादियां टिकी रहीं

ये सात दम्पति बताते हैं की कैसे बड़ी बड़ी मुश्किलों से निकल अंततः उनकी शादियां आखिर बच पायीं.
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शादी एक बहुत मुश्किल वादा है

किसी एक इंसान के साथ पूरी ज़िन्दगी बिताने का फैसला करना और उसे निभाना कोई छोटी मोटी बात नहीं है. शादी सचमुच ही शायद सबसे खूबसूरत घटना होती है किसी के जीवन की मगर साथ ही साथ इसे बहुत कुछ सहना भी पड़ता है.

दुनिया के सभी विवाहित दम्पतियों को कई अलग अलग पड़ाव से गुज़ारना पड़ता है–छोटी मोटी नोक झोक से लेकर बड़ी घमासान लड़ाइयां, कम और धूमिल होता रोमांस जैसी कई बाधाएं हैं जो एक दम्पति को झेलनी पड़ती हैं. जहाँ कुछ लोगों के लिए इन बाधायों को झेलना आसान होता है, कई इन हालत में बिलकुल बिखर जाते हैं. आइये पढ़ेऐसे ही कुछ दम्पतियों की कहानीयां जिन्होंने कई मुश्किलों का सामना कर अपने विवाहित जीवन की नाव को डूबने से बचाया.

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1. जब हमने अपना बच्चा खोया

हमने अपने ढाई साल का बच्चा खो दिया. ये सदमा मेरी पत्नी के लिए बहुत गहरा था. उसने पीना शुरू कर दिया और ऐसा एक भी दिन नहीं जाता था, जब वो होश में रहती हो. अपने बच्चे की मौत से मैं भी बिलकुल टूट गया था मगर मुझे अपनी पत्नी को संभालना था. हम छोटी छोटी बातों पर लड़ते थे. मैं उससे नाराज़ था क्योंकि वो इस सदमे से निकलने की कोशिश भी नहीं कर रही थी. हालात इतने ख़राब हो गए थी की हमारे बच्चे की मौत के दो साल बाद मैंने अपनी पत्नी को तलाक देने की ठान ली. मगर जब एक दिन उसने अपनी कलाई काट कर अपनी जान लेने की कोशिश की, उस दिन मैंने जाना की मैं उससे कितना प्यार करता हूँ और मैं तलाक ले कर एक बहुत ही स्वार्थी कदम उठा रहा था. उसकी आत्महत्या की कोशिश ने मुझे अंदर तक झंझोर दिया और मैंने उसका भरपूर ध्यान रखने की पूरी कोशिश की. इस बात को पांच साल हो गए हैं. हम दोनों साथ हैं, मेरी पत्नी ने पीना छोड़ दिया है और हमारा एक स्वस्थ्य बेटा भी है. इन कुछ सालों में हमारा प्यार एक दुसरे के लिए कहीं ज़्यादा बढ़ गया है.
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2.जब मेरे पति का अफेयर हो गया

उसका अपनी ही एक छात्रा से छह महीने तक अफेयर था. मुझे इसकी भनक भी नहीं थी. फिर एक दिन उसने खुद मेरे सामने सब कुछ कबूल कर लिया. हम दोनों में काफी गहमागहमी हुई और एक समय ऐसा भी आया जब हम एक दुसरे की शक्ल देखना भी नहीं चाहते थे. मगर फिर चीज़ें सुधरने लगीं. बेवफाई या तो रिश्ते तोड़ती है या जोड़ती है. हमारे लिए उस घटना ने हमारे रिश्ते को और मज़बूत कर दिया. हमने कोशिशे की ताकि हम साथ हो सके फिर से और उसने पूरी कोशिश की मेरा भरोसा वापस हासिल करने की. वो आज भी अपना वादा निभा रहा है और मैं खुश हूँ की आवेश में आकर मैंने उसे उस दिन छोड़ने का फैसला नहीं किया था.

3. जब उसकी नौकरी छूटी

मेरे पति जिस कंपनी में काम करते थे, अचानक से वो ठप्प हो गई और मेरे पति की नौकरी भी चली गई. बेरोज़गारी ने उन्हें बिलकुल पागल सा कर दिया था. और क्योंकि मेरे या उनके परिवारवाले भी हमारी कोई मदद नहीं कर रहे थे, तो वो और परेशां और हताश हो गई. जो थोड़े बहुत पैसे मैं कमाती थी, वो उन्होंने फालतू गैरज़रूरी चीज़ों में उड़ाने शुरू कर दिए. घर में या बच्चे की परवरिश में भी उन्होंने कोई मदद करने की कोशिश नहीं की. नौकरी न होना उनके आत्मसम्मान और आत्मविश्वास के लिए बहुत बड़ी चोट थी और वो दिन प्रतिदिन स्वार्थी होते जा रहे थे. हम महीनों तक एक ही छत के नीचे रहकर भी सिर्फ कामभर की ही बातें कर रहे थे. वो डिप्रेशन का शिकार हो रहे थे मगर जब भी उन्हें किसी सलाहकार के पास जाने की बात कहती, वो तुरंत ही बिफर जाते. मगर फिर उनकी नयी नौकरी लगी. उस नौकरी के पहले महीने तो वो घर भी नहीं आते थे. मगर जब उन्हें अपनी पहली तनखाह मिली, वो घर आये और सारीतनख्वाह मेरे हांथों में रख दी. उस दिन वो मेरे साथ किसी मनोचिकित्सक के पास जाने को भी तैयार हो गए. कुछ महीनों के अंदर ही वो वापस पहले की तरह हो गए थे. मगर आज भी जब मैं उन मुश्किलों दिनों को याद करती हूँ, मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं. मेरे पति मानसिक तौर पर बहुत ही प्रबल थे मगर मैंने देखा की किस तरह बेरोज़गारी एक अच्छे खासे इंसान और उसके पूरे परिवार को बिखेर सकते है.

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4. जब डॉक्टर ने बताया की मेरी पत्नी को कैंसर है

“कुछ वर्षों पहले मेरी पत्नी को कैंसर होने का पता चला. हम आर्थिक रूप से बहुत बेहाल थे मगर फिर भी हमने उस समय को निकाल ही लिया. आज सोचता हूँ तो सुकून होता है की जल्दी ही कैंसर की जांच हो गई और शुरू के स्टेज में ही उसे हम काबू कर पाए. और मैं शुक्रगुज़ार हूँ की मेरी पत्नी हमेशा हम दोनों के लिए ही हमेशा मज़बूत रही और मुझे भी संभाला. मैं उससे बहुत प्यार करता हूँ.

5.जब हमें कुछ वर्षों तक अलग देशों में रहना पड़ा

मेरी पत्नी को टीचर की एक अच्छी नौकरी ओमान मिली और उसे तीन सालों के लिए वहां जाना पड़ा. मुझे बच्चों के साथ यहीं भारत में रहना ज़रूरी था. हमें अंदेशा भी नहीं था की इस तरह दो अलग अलग देशों में रहना हमारे लिए इतना मुश्किलहोजायेगा. हम सिर्फ छुट्टियों में मिलते थे और यकीन मानिये ये बिलकुल आसान नहीं था. तीन वर्ष एक लम्बी अवधि होती है. मगर जब हम मिले तो आप कल्पना भी नहीं कर सकते की वो मिलाप कितना मधुर और प्रिय था.

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6. जब मुझे पत्नी की पहली शादी के बच्चों के साथ दोस्ती करनी थी

मेरी पत्नी के उसकी पहली शादी से बच्चे थे और हम दोनों की शादी के बाद चीज़ें काफी मधुर नहीं थीं. वो किशोर बच्चे मुझे बिलकुल पसंद नहीं करते थे. उनकी दादी अर्थात मेरी पत्नी की पहली सास मुझे खा जाने वाली नज़रों से देखती थीं. जिस तरह सब मुझसे नफरत करते थे, मेरे लिए वो झेलना बहुत मुश्किल था. और उस पर कई बार पत्नी को अपने उस परिवार का साथ देना पड़ता था, जो मेरे लिए और मुश्किल था. जब उसका बड़ा बेटा हॉस्टल गया और छोटा बेटा मुझसे कुछ हिलने मिलने लगा, चीज़ें कुछ बेहतर हुईं. खैर अब स्तिथि बिलकुल ठीक है और हम एक सामान्य परिवार की तरह ही रहते है.

7. जब मैं एक ट्रॉमा से गुज़र रही थी

मेरा बलात्कार हुआ था. मेरे लिए हर दिन एक संघर्ष बन चूका था. एक समय ऐसा भी आया जब मेरे पति हर बात पर गुस्सा और आहत हो जाते थे और मुझे हर बात के लिए दोषी ठहराते थे. वो कई बार इस बात को भी भूल जाते थे की मैं खुद ही तो तकलीफ में थी और मैं दोषी नहीं थी. उन दिनों हमने बहुत मुश्किल से एक दुसरे को जोड़ कर रखा मगर खुश हूँ की हमने वो कोशिश की. आज मेरे पति मेरी प्रताड़ना समझते हैं, और भावनात्मक तौर पर भी मुझे सहारा देते हैं.
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