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हमने एक बड़ा सुखी परिवार बनाने के लिए दो परिवारों को किस तरह जोड़ा

अपना साथी खो चुके दो लोगों ने किस तरह विवाह किया और अपने परिवारों को जोड़ा।
Matrimonial-Jigsaw

जीवन कितना अनिश्चित हो सकता है…जब मैं अपनी पत्नी, दो किशोर बेटियों और एक छोटे बेटे के साथ अपने खुशहाल भविष्य की प्रतीक्षा कर रहा था, भाग्य ने एक अजीब मोड़ ले लिया। मेरी पत्नी के स्तन कैंसर का पता चला और हमारा अस्पताल में आना-जाना शुरू हो गया। चूंकि हम भाग्यशाली थे कि रोग को पहले ही चरण में पकड़ पाए, डॉक्टरों ने उनका काम किया और हम आश्वस्त हो गए कि हमने इसे पराजित कर दिया है और पांच वर्ष की सुधार अवधि के बाद, हम शायद कैंसर मुक्त हो जाएंगे।

भाग्य ने हमारा साथ छोड़ दिया

लेकिन, आदमी मांगता है और….! जब हम पांच वर्ष के खतरनाक निशान के करीब पहुंच चुके थे, बीमारी पुनर्जीवित हो उठी और उसके पास जीवित रहने के लिए केवल छह महीने थे। हमारे आसपास की दुनिया बिखर गई थी और मुझे अपने भावनात्मक रूप से नाजुक परिवार का प्रभार लेना पड़ा। मेरी बेटियों को अपनी माँ की स्थिति के बारे में पता था लेकिन मेरा बेटा इस समस्या की गंभीरता को समझने के लिए बहुत छोटा था। आने वाले भविष्य के लिए कोई अपने परिवार को कैसे तैयार करे? हमने भरसक प्रयास किया -आध्यात्म के प्रति हमेशा उसकी रूचि रही है (मुझे लगता है इसने ही उसके चेहरे को गज़ब की शांति दी थी जिसे मैं सराहने लगा था) -और उसने मुझे और बच्चों को भी अपने विश्वास का अनुयायी बना लिया। इसने परिवारों में यदा कदा ही देखी जाने वाली अपरिहार्यता के साथ परिस्थितियों से निपटने में हमारी मदद की।
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लेकिन जब वह गुज़री, तब भी हम तैयार नहीं थे। मृत्यु का सामना करने के लिए कोई खुद को कैसे तैयार करे? मेरा परिवार हम चारों तक ही सिमट गया और हमारी बदली हुई परिस्थितियों को स्वीकार करने में धीरे-धीरे और अबाधित रूप से हमारी सहायता की। हमने अपने बिखरे हुए टुकड़े समेटे और दिनचर्या में वापस जाने ने आगे बढ़ने में हमारी सहायता की।

घर के मामलों में घर पर ना होना

एक स्व-अधिकारी और सलाहकार होने के नाते मैं काम का आदी था, इसलिए घर के सभी मामले और बच्चों की देखभाल स्वतः ही मेरी पत्नी का कार्यक्षेत्र था। अचानक मैंने खुद को उन मुद्दों से निपटता हुआ पाया जो कभी मुझ तक पहुंच नहीं पाए थे। मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ करने का प्रयास किया, लेकिन जल्द ही मुझे अहसास हो गया कि कैरीयर और घर दोनों साथ में संभालना बहुत कठिन था। जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि मेरे परिवार की देखभाल करने के लिए मेरे माता-पिता भी काफी वृद्ध थे।

मैं 21 वर्षों से विवाहित था, इसलिए जब मेरे माता-पिता ने पुनर्विवाह की बात छेड़ी, तो मैं अनिच्छुक नहीं था।

मेरा विवाह बहुत अच्छा रहा था और मैं एक पत्नी और स्त्री के स्पर्श की कमी महसूस करता था।

लेकिन मैं स्पष्ट था कि अगर मैं पुनर्विवाह करूंगा तो किसी ऐसे व्यक्ति के साथ करूंगा जिसने अपना साथी खोया हो ताकि हम जुड़ सकें। मैं जानता था कि जिस व्यक्ति से मैं शादी करूंगा, हो सकता है उसके अपने बच्चे हों और मैं उनका दूसरा पिता बन जाऊंगा, और मैं उसके साथ उन्हें अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार था। आखिरकार, अगर वह मेरे जीवन में आकर मेरे बच्चों को अपना सकती है, तो मुझे उसके बच्चों को ना कहने का क्या अधिकार है?

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एक समान अनुभव

मैं रिश्तेदारों के माध्यम से अपनी दूसरी पत्नी से मिला। उसने अपने पति को खोया था और उसके दो बच्चे थे, एक बेटा और एक बेटी। वह 16 वर्षों से विवाहित थी, जिससे मुझे पता चला कि उसका भी एक बहुत अच्छा विवाहित जीवन रहा था और उसने दो बहुत ही अच्छे बच्चों की परवरिश की थी जिसका अर्थ था कि वह मेरे बच्चों के लिए भी एक प्रेमपूर्ण माँ होगी! मैं उसके साथ उसके बच्चों से भी मिला, मैं चाहता था कि वो मुझे जाने, मुझे अपने जीवन में स्वीकार करें, और मेरी उपस्थिति के साथ सहज हों। मुझे अपने बच्चों के साथ उन्हें स्वीकार करने में कोई समस्या नहीं थी और मुझे पता था कि अगर वे मुझे पसंद करें तो मैं उनका दोस्त बनने का भरसक प्रयास करूंगा और ज़रूरत पड़ने पर उन्हें सही दिशा में निर्देशित करूंगा।

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मेरे बच्चों को मुझसे दूर करने के बारे में किसी ने नहीं सोचा, तो उसके बच्चों को उससे दूर क्यों किया जाए?

उसे बागडोर सौंपना

मैं जानता था कि यह एक कठिन काम होगा और हमारे साथ आकर रहने के लिए उन्हें उनके परिचित परिवेश को छोड़ना होगा, और साथ में रहने के लिए दोनों परिवारों को बहुत समझौता करना होगा। लेकिन आवश्यकता पड़ने पर मेरी पत्नी की मदद करने के लिए मैं उसका हाथ बटाने को तैयार था। मैंने उसके काम करने के तरीके, जैसे की घरेलू मामलों से निपटना, पांचों बच्चों को संभालना, आदि में कभी हस्तक्षेप नहीं किया लेकिन दूर से चुपचाप देखता रहा। अगर किसी बात से निपटने के उसके तरीके से मैं असहमत होता था, तो मैं उसे अकेले में बताता था। मेरी बेटियों ने उसे अपनाने में थोड़ा समय लिया। मैं उसे धीरे से याद दिलाता था कि उन्होंने भी अपनी माँ को खोया है और नई स्थिति को स्वीकार करने में उन्हें थोड़ा समय लगेगा।

उसके बच्चों के लिए, मैंने अतिरिक्त प्रयास किया, उनके लिए समय निकाला, उनकी सलामती के बारे में पूछा और उनकी आवश्कताओं को पूरा किया। मेरी पत्नी की बेटी (हमारी सबसे छोटी बेटी) 10वी कक्षा में थी जब हमारे साथ रहने आई। एकमात्र सीबीएसई स्कूल जो हमें मिला वह हमारे घर से थोड़ा दूर था, और इसलिए हमें पूरे एक वर्ष तक उसे उसके स्कूल बस स्टॉप तक छोड़ने जाना पड़ता था। शुरू में, मैं भी उसे स्कूल के बाद बस स्टॉप से ले आया करता था, जब तक उसके खुद के दोस्त ना बन गए और वह बस स्टॉप से घर अकेली ना आने लगी। हमने उसे नए वातावरण को पसंद करने के लिए सहज बनाने की यथासंभव कोशिश की। मैं जानता था कि अगर बच्चों ने मुझे और मेरे परिवार को स्वीकार कर लिया, तो उनकी माँ बहुत खुश होगी, जो अंततः एक परिवार के रूप में हमारी खुशी में प्रतिबिंबित होगी।

दो परिवारों को मिलाने के हमारे प्रयास ने अद्भुत काम किया और आज हम दो अभिभावक और पांच बच्चों के साथ एक पूरा परिवार हैं।
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