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‘‘हम प्रेम में नहीं, वासना में लिप्त हैं” उसने कहा

जब हम पहली बार मिले थे उस बात को 21 वर्ष हो चुके हैं और मैं प्रेम और वासना को अलग करने की निशा की योग्यता को कभी नहीं भूलूंगा
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(जैसा रामेन्द्र कुमार को बताया गया)

पहचान सुरक्षित रखने के लिए नाम बदल दिए गए हैं

जब भी कोई वासना का उल्लेख करता है तो मैं निशा के बारे में सोचता हूँ, वह स्त्री जिसने मुझे सिखाया कि वासना उत्कृष्ट हो सकती है। वासना उत्कृष्ट है।

मैं उसे पहली बार तब मिला जब मैं ईंजीनियरिंग के प्रथम वर्ष में पढ़ रहा था। वह बी.एड पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने हमारे घर आयी थी। मेरे पिता, मजबूरीवश कुंवारा पुरूष और मैं, भुवनेश्वर में एक बहुत बड़े घर में रहते थे।

निशा के साथ बात करना आसान था और वह हंसी मज़ाक की कला में माहिर थी। हमने ज़्यादा से ज़्यादा समय साथ में बिताना शुरू कर दिया। मैंने देखा कि मैं निशा के साथ दिन के उजाले में हर विषय पर बात कर सकता था जिसमें मेरा पसंदीदा विषय सेक्स भी शामिल था।

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