हम सड़क पर अजनबियों के रूप में मिले और हमने शादी कर ली

Manoshi Sinha
Biker girl in a leather jacket on a motorcycle

हम पहली बार राजधानी के बीचो-बीच एक व्यस्त सड़क पर मिले थे। शीतकालीन रविवार की रात के 10 बजे थे। लगभग 12 साल पहले एक रैंडम मुलाकात! मैं अक्सर याद करती हूँ कि मैं उसकी मर्दानगी की सराहना करते हुए उसे कितनी आसक्त नज़रों से देख रही थी। उसने कोई स्वेटर नहीं पहना था और अपने बाइसेप्स और ट्राइसेप्स दिखा रहा था। वह एक टी जंक्शन था। मैं एक बाइकर थी और बाइक चलाते हुए सिग्नल के हरे होने का इंतज़ार कर रही थी। वह ट्राफिक लाइट की दूसरी तरफ था। फुटपाथ पर उसके पीछे एक एनफील्ड मोटरसाइकिल खड़ी थी। वह वहां से गुज़रते हुए ऑटो रिक्शा और मोटरसाइकिलों को रोकने की कोशिश कर रहा था। कोई नहीं रूका। लाइट हरी हो गई। जब मैं पहले गीयर में बिना किसी जल्दबाज़ी के बाईं ओर चलने लगी, उसने मुझे भी रोका। मैं रूक गई।

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वह लिफ्ट चाहता था

मैं एक टॉमबॉय थी और उस रात मैंने कोई मेकअप नहीं किया था, हल्के रंग की लिपस्टिक भी नहीं। हेल्मेट के नीचे छुपे छोटे बाल, मेरे स्पोर्ट शूज़, जीन्स और जैकेट किसी को भी मेरे लिंग के बारे में भ्रमित कर सकते थे। वह भी भ्रमित हो गया।
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जब मैंने अपना वाइज़र खोला, वह पीछे हट गया। ‘‘माफ करना मैंने तुम्हें रोका, मुझे लगा कि तुम पुरूष हो!’’ उसने कहा। मैं उस पुरूष से बात करने के लिए उत्साहित होकर मुस्कुराई, जिसकी मैं सराहना कर रही थी। ‘‘कोई बात नहीं,’’ मैंने कहा। थोड़ा रूक कर मैंने फिर कहा, ‘‘कोई समस्या है क्या? मैंने देखा कि आप ऑटो रिक्शा और मोटरसाइकिलों को रोक रहे हैं?’’

“यहां से थोड़ी दूर मेरी एनफील्ड खराब हो गई। मैं उसे यहां तक खींच कर लाया। तभी से मैं एक ऑटोरिक्शा रोकने की कोशिश कर रहा हूँ ताकि उसे ठीक करने के लिए एक मैकेनिक को ले आउं। मैंने मोटरसाइकिल वालों को भी रोकने की कोशिश की। कोई नहीं रूका,’’ उसने कहा।

Manoshi with her husband

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“मैं आपको मैकेनिक की वर्कशॉप तक छोड़ दूंगी। लेकिन क्या इस समय कोई वर्कशॉप खुली होगी?” मैंने पूछा।

“यहां से करीब 5 किमी दूर एक 24 घंटे खुली रहने वाली वर्कशॉप है। रूकने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया मैडम। लेकिन मैं मैनेज कर लूंगा,’’ उसने कहा।

“मैं आपको लिफ्ट देती हूँ, कम से कम जब तक आपको ऑटो रिक्शा नहीं मिल जाता,’’ मैंने कहा।

वह सहमत हो गया। उसने मुझसे कहा कि मैं पीछे बैठ जाउं। मैं मान गई। और हम चल पड़े।

एक किलोमीटर या उससे थोड़ दूर, वह एक ऑटोरिक्शा रूकवाने में कामयाब हो गया। हमने एक-दूसरे को गुडबाय कह दिया। मैं ऑटो रिक्शा के शुरू होने का इंतज़ार कर रही थी। तभी वह अचानक वापस मेरे पास आया।

“अगर तुम बुरा ना मानो तो क्या मुझे तुम्हारा मोबाइल नंबर मिल सकता है?’’ उसने पूछा।

“मुझे तुम्हारा नंबर दो,’’ मैंने कहा।

वह रिक्शा ड्राइवर से एक पैन और कागज़ ले आया। कुछ ही पलों में वह चिट मेरे हाथ में थी जिसमें उसका नंबर लिखा था। और हम अपने-अपने रास्ते चल दिए।

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यह पहली नज़र का प्यार नहीं था! मुझे वह बहुत अच्छा लगा था लेकिन मैं नहीं जानती थी कि क्या वह भी वैसा ही महसूस करता था। वह एक फिटनेस हल्क था और मैं बिल्कुल विपरीत थी – एक दोहरी ठुड्डी और निकलते हुए पेट के साथ एक मोटी लड़की।

क्या मैं कुछ ज़्यादा ही मोटी थी?

तब मेरी उम्र 31 वर्ष थी और मैं तीन संभावित दूल्हों द्वारा ठुकराई जा चुकी थी, लेकिन मेरा करियर स्थिर था, मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि सड़क पर मिला एक अजनबी मेरा जीवनसाथी बन जाएगा!

मैंने वह चिट घर पर एक दराज में रख दी। तीन महीनों तक मैं उसके बारे में भूल ही चुकी थी। एक चार दिन लंबे साप्ताहंत ने मुझे अपने फ्लैट की सफाई करने पर मजबूर कर दिया। और मेरी नज़रें उस चिट पर पड़ी। मैं उस हैंडसम अजनबी को लगभग भूल ही चुकी थी। उसके बारे में सोचकर ही मेरे होंठों पर मुस्कान आ गई। मैं नहीं जानती थी कि क्यों। और अगली कार्यवाही ऑटोमेटिक थी। मेरी उंगलियों ने यंत्रवत रूप से एक मैसेज टाइप किया, ‘‘क्या तुम्हारी एनफिल्ड ठीक है?’’ कुछ ही पलों में मेरे पास उसका कॉल आया। उस दिन शाम के बाद हम पास ही के एक रेस्त्रां में कॉफी के लिए मिले।

हमारी बॉन्डिंग कैसे हुई

अगले कुछ महीनों तक, हमने केवल फोन पर बात की और मैसेजों का आदान प्रदान किया। हम मिले नहीं। या शायद मुझे उससे मिलने की इतनी इच्छा नहीं थी। लेकिन हमने एक दूसरे को जाना। वह एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर और एक राज्य स्तरीय कोंपिटिटिव बॉडीबिल्डर था। मैं एक प्रकाशन हाउस में संपादक और एक पीआर फर्म के लिए पार्ट टाइम कंटेंट परामर्शदाता भी थी। मेरे बहुत से दोस्त थे, स्त्री और पुरूष दोनों, लेकिन वह बाकी सबसे अलग था। बाद में, मुझे उसके साथ एक तरह की बॉन्डिंग महसूस हुई।

पहले उसने प्रपोज़ किया। उसके परिवार को कोई आपत्ति नहीं थी। वे मुझसे मिलने भी आए। समय के साथ, उसने अपना व्यवसाय एक फिटनेस ट्रेनर में बदल दिया और पूर्वी दिल्ली में अपना जिम चलाने के साथ ही एक राष्ट्र स्तरीय कोंपिटिटिव बॉडीबिल्डर बन गया।

 

सामाजिक रूप से वर्जित

अगर मैं अपने समुदाय से बाहर किसी से शादी करती तो मेरे माता-पिता को हमारे समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता और किसी भी सामाजिक अवसर पर उन्हें बुलाया नहीं जाता। उसे और अपने माता-पिता में से एक को चुनने की दुविधा ने मेरी रातों की नींद उड़ा दी। अंत में, मैंने अपने माता-पिता को सब बता दिया। शुरू में, उनकी ओर से बहुत बड़ी ‘ना’ थी। हां करने के लिए उन्हें 2 साल लग गए। हमने शादी कर ली! तब तक, उसकी फिटनेस युक्तियां का इस्तेमाल करके मैंने अपना वज़न 72 किलो से घटा कर 52 किलो कर लिया और एक मज़बूत प्रतिरक्षी तंत्र के साथ ज़्यादा आत्मविश्वासी व्यक्तित्व भी पा लिया!

मेरा डर सच निकला। हमारे अधिकांश समुदाय ने मेरे माता-पिता को उस संस्कृति का हिस्सा नहीं माना जिससे वे संबद्ध थे। लेकिन वे मेरे लिए खुश थे। अब हम 9 वर्ष से विवाहित हैं।

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