इन सामाजिक बंधनों से खुद को मुक्त कीजिये

konkana sharma in lipstick under my burkha

जब एक नवजात शिशु का जन्म होता है, वो किसी साड़ी में लेटा दो पेड़ों के बीच धुप से चिलचिलाता सोयेगा या फिर किसी अमीर पालने में सोने की कटोरी से दूध पियेगा, ये किसी के हाँथ में नहीं है. जैसे जैसे वो बच्चा बड़ा होता है, समाज, परिवार, बड़े बुज़ुर्ग सब उन्हें अपने अपने हिसाब से एक सांचे में ढाल लेते हैं. वो आपको चलना, बोलना, और सोचना तक सिखाते है. वो ये सब आपके भले के बारे में ही सोच कर ही करते है. कुछ बच्चे मगर ऐसे होते हैं जो समाज की हर बात पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं और अगर आपने उन्हें तर्क और सही युक्ति के जवाब दे दिए तो वो आपकी बात मानेगे. खैर यहाँ कुछ ऐसे नियम हैं जो समाज ने हमारे लिए बनाये हैं मगर उनके ना होने से ज़िन्दगी कही आसान हो सकती है.

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लोग क्या कहेंगे?

परिवार सबसे मज़बूत बेड़ियाँ इस सवाल के साथ ही हमारे हांथों और पैरों में डाल देता है — लोग क्या कहेंगे? मगर एक बात ध्यान रखियेगा अगर आपका पड़ोसीआपकी टेबल पर रात का खाना ला कर नहीं रख रहा न आपका किराया दे रहा है,तो विश्वास कीजिये आपको इस सवाल के जवाब की चिंता नहीं होनी चाहिए. आप किसी के टिपण्णी और भेदी सवालों के लिए जवाबदेह नहीं हैं. यकीं मानिये, अगर आप अपने मन से इस प्रश्न का डर मिटा देंगे, तो आपकी ज़िन्दगी बहुत आसान हो जाएगी और आपकी वो मुस्कान बेफिक्र खिलती रहेगी.

तुम लड़की हो. तुम ये नहीं कर सकती..

हाँ, ये अब भी हमारे समाज में अक्सर कहा जाता है. कई परिवारों लड़कियों को पैर ठीक से मोड़ कर बैठा, धीरे धीरे बोलना और घर के पुरुषों के बाद खाना खाना सिखाया जाता है. अगर आप इस एक बाधा को पार कर वो सब कर सकते हैं जो आप करना चाहते हैं, तो ज़िन्दगी के कई नए हसीं पल आपकी झोली में आ सकते हैं.

Girl playing with boys
तुम लड़की हो. तुम ये नहीं कर सकती..

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औरतों का धार्मिक तौर पर कमतर होना

दुनिया के सारे धर्म पुरुषों को स्त्रियों से बेहतर मानते हैं. सभी धर्म स्त्रियों के आज्ञाकारी होने को एक बड़ी उपलब्धि मानते हैं. पहले ज़माने में ऐसा इसलिए था ताकि लोग परिवारमें बंधे रहे और पुरुषप्रधान समाज में स्त्रियां उनसे प्रश्न न करें. अगर आप अपने विश्वास और अपने ज्ञान का सही मिलान कर लेंगी तो आपको कभी में बेसिर पैर के फैसले नहीं लेने होंगे. आप किसी भी प्रताड़ना के खिलाफ अपनी आवाज़ उठाने की हिम्मत रखेंगी, फिर वो चाहे जाती की बात हो, या शादी, गर्भपात, तलाक या नौकरी की. कृपया इस बात को समझे मैं आपको समाजविरोधी होने की सलाह नहीं दे रही, बल्कि ये समझा रही हूँ की आप सिर्फ उन मान्यताओं और रिवाजों को मानें जिन्हे आप दिल से मानती हों.

आधुनिक समाज का अंध अनुकरण न करें

मेरे माता पिता डॉक्टरों को ईश्वरतुल्य मानते आये हैं. एक हद तक मुझे भी ऐसा ही लगता था मगर एक बार जब आँख टेस्ट कराने एक डॉक्टर के पास गई और उसने मुझे अभर्द तरीके से छुआ, उस दिन मुझे एक बात समझ आ गई की किसी पर भी अन्धविश्वास गलत है. वो चाहे डॉक्टर हो या वकील, स्कूल टीचर हो या कोई कंपनी, ये सोचना की उनसे बेहतर कोई नहीं जानता हमारी सबसे बड़ी भूल होती है. हमें इस आधुनिक दौर में, जहाँ इंटरनेट सभी जानकारी इतनी सरलता से हमारे सामने ला देता है, किसी एक पर यूँ विश्वास नहीं करना चाहिए बल्कि अपने आप भी और जानकारी लेनी चाहिए.

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शादी का अर्थ है कभी न टूटने वाला बंधन

इस मिथक से हम जितनी जल्दी खुद को निकाल पाएं, हमारे लिए उतना ही अच्छा होगा. लोगों को ये समझना होगा की हमारे शरीर के सेल हर चार साल में दोबारा बनते हैं. हमारे दिमाग में भी हर कुछ सालों में न्यूरॉन नए तरीके से एक दुसरे से जुड़ते हैं. इन सारी वैज्ञानिक तथ्यों का अर्थ ये है की इंसान अपनी पूरी ज़िन्दगी बदलता रहता है. शायद इसी का नतीजा है की आज के दौर में तलाक, अलग रहना, ब्रेक आप आदि जैसी घटनाएं काफी सुनने में आने लगी हैं. हमें अपने मन से इस भावना को मिटाना होगा की एक शादी का टूटना सबसे बड़ा अभिशाप है.

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Married couple
बैंक, इश्तेहार और मीडिया कुछ भी भरोसे लायक नहीं

बैंक, इश्तेहार और मीडिया कुछ भी भरोसे लायक नहीं

चूँकि हमारी ज़िंदगियाँ इतनी व्यावसायिक सी हो गई है की हम अक्सर अपने तार्किक दिमाग का इस्तेमाल करने से कतराते हैं. हम दिमागी तौर पर सुन्न होते जा रहे हैं और इसलिए भेड़चाल में चल कर हर चर्चित चीज़ करने को तैयार हो जाते हैं. फिर चाहे वो घर हो, या फिर इन्शुरन्स या म्यूच्यूअल फण्ड या फिर कोई विचारधारा। प्रश्न करना, चीज़ों को आँखें खोल कर आंकना हमारी सफलता के लिए बहुत ज़रूरी है. ऐसा करने से आपको कभी कोई धोखा नहीं दे सकता और आप हमेशा सही फैसला लेंगे.

तो मेरे ख्याल से अगर ये छोटी छोटी बातों पर ध्यान देंगे तो शायद ज़िन्दगी में कई बड़े बड़े बदलाव आ सकेंगे.

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