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इस फिल्म ने हमें जीवन और प्रेम के अर्थ पर सवाल उठाने को मजबूर कर दिया

परिचित चेहरों के बावजूद, अर्थ फिल्म के पास प्यार और जीवन के बारे में प्रस्तुत करने के लिए नई अंतर्दृष्टि है
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भारतीय सिनेमा की एक ऐतिहासिक प्रेम कहानी अब पाकिस्तान में वापस बनाई जा रही है -महेश भट्ट की अर्थ। बहुत से लोग इस फिल्म को एक प्रेम कहानी नहीं मानेंगे -फिर भी यह है। क्योंकि यह रोमांस की चमकीली परत को छीलते हुए प्यार के सार तक पहुंचती है, जैसा करने में कुछ ही फिल्में कामयाब हुई हैं। प्यार और सुरक्षा, या शायद इस मामले में असुरक्षा। इसे एक फेमिनिस्ट मास्टरपीस भी बताया जाता है जिसमें स्त्री को उसकी इच्छा के अनुसार जीने का विकल्प दिया गया, भले ही विकल्प तक ले जाने वाली परिस्थितियां उसने खुद नहीं चुनी थीं। लेकिन मेरे जैसा मिलेनियल उस पीढ़ी की सच्ची आवाज़ नहीं है जिसे इस फिल्म ने आकार दिया। इसलिए मैं इस फिल्म से संबंधित विषय – प्यार, दूसरी औरत और जीवन के अर्थ पर चर्चा करने के लिए 50 वर्ष से अधिक उम्र की स्त्रियों के साथ बैठा।

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(चेतावनीः आगे स्पॉइलर्स हैं)

सिक्योरिटी को खोना

“एक रोमांटिक प्यार से हम क्या चाहते है?’’ 56 वर्षीय नीति ने मेरी अज्ञानता से पूछा। ‘‘हाँ, साथ, सेक्स, बच्चे पैदा करना ये सब होता है – लेकिन सबसे ज़्यादा हम जो चीज़ चाहते हैं वह है सिक्योरिटी। ऐसा कोई जो हर हाल में हमारा साथ देगा। यही कारण है कि कई लोगों के लिए कभी-कभी भावनात्मक धोखा शारीरिक धोखे से बड़ा हो जाता है। जब यह सुरक्षा कवच हट जाता है तो आप कमज़ोर हो जाते हैं। पूजा के साथ भी यही हुआ जब इंदर ने बताया कि वह किसी और से प्यार करता है। क्योंकि उसका बचपन अनाथालय में बीता था, इसलिए इस सुरक्षा कवच की कीमत दस गुना बढ़ जाती है।”
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“बिल्कुल ठीक! यह सुरक्षा- असुरक्षा कवच बहुत अच्छी तरह प्रस्तुत किया गया था और इसी ने फिल्म में मेरी दिलचस्पी बनाए रखी। क्योंकि जो भी सोचते हैं कि वे सिक्योर नहीं हैं, वे वास्तव में नहीं होते हैं। पूजा ने सोचा कि वह सिक्योर है क्योंकि उसके पास घर है लेकिन वास्तव में उसने अपना पति खो दिया था। कविता लगभग पूरी फिल्म में सिक्योरिटी तलाशती रहती है और जब उसे वह पुरूष मिलता है, तो उसे अहसास होता है कि अगर वह अपनी सात साल पुरानी पत्नी के प्रति वफादार नहीं है तो क्या गारंटी है कि उसके प्रति वफादार होगा?’’ रश्मी कहती है जो फिल्म की रिलीज़ के समय 24 साल की थी और नवविवाहित थी। ’’इसने मुझे मेरी शादी और अपेक्षाओं को एक अलग नज़र से देखने के लिए प्रेरित किया।”

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घृणा की वस्तु नहीं

ग्रूप में स्मिता पाटिल की प्रशंसक ने कहा, ‘‘असुरक्षा बेवफाई से पैदा हुए रिश्ते से उत्पन्न होती है। और इसी अहसास के कारण कविता ने इंदर से शादी नहीं की। क्योंकि पूजा ने मिलने के बाद उसे पता चला कि भले ही इंदर उसके पास है लेकिन ज़्यादा सिक्योर पूजा है। पाटिल ने वास्तव में उस चरित्र को बखूबी निभाया है। मुझे अब भी उसका संवाद याद है, ‘मैं बस अपना घर बनाना चाहती थी, तुम्हारा घर तोड़ना नहीं।’ और पूजा उत्तर देती है कि यह घर कभी उसका था ही नहीं इसलिए इसे देने वाली वह कोई नहीं है। कविता यह भी समझती है कि इंदर कभी उसका भी नहीं हो सकता। फिल्म देखने के बाद मुझे कविता से नफरत नहीं हुई – बल्कि मुझे उस पर दया आई, मैंने उसे समझा और कुछ हद तक उसकी सराहना भी की।

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दूसरी औरत

“अगर हम दूसरी औरत को समझने की बात करते हैं, तो शायद रोहिणी हटंगड़ी की बाई से बेहतर उसे कोई नहीं समझ पाया। जिस स्त्री के साथ उसका पति उसे धोखा दे रहा है, उसके बारे में वह कितनी उदासीनता से कहती है कि वह भी इतनी ही दयनीय स्थिति में है। वह पूजा को संघर्ष का मतलब और अपने बच्चे के लिए लड़ने का संकल्प दिखाती है -भले ही वह उसे जेल भेज देता है। पूजा, जिसे लगता था कि वह प्यार के बारे में कुछ नहीं जानती, वह उससे रूबरू होती है -एक बच्चे के लिए माँ का सच्चा प्यार। और मुझे लगता है कि उसे अहसास हो गया था कि वह भी जीवन में यही चाहती थी। मैंने अपनी बेटी को उसके पहले बच्चे के जन्म से पहले यह फिल्म दिखाई – और पुलिस स्टेशन वाले दृश्य में हम दोनों की आँखों में आँसू आ गए थे,’’ अभी-अभी नानी बनी एंजेला ने बताया।

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इस फिल्म के नाम के बारे में क्या? ‘‘देखो, जैसा की राज का किरदार कहता है -तुम्हारे लिए जीवन क्या है? इसका अर्थ तुम निर्धारित करते हो या भाग्य करता है? और हर किरदार अपनी तरफ से इसमें चार चांद लगा देता है – राज, नौकरानी, बेस्ट फ्रैंड और उसका पति यहां तक कि होस्टल की रूममेट भी जो बहुत स्पष्ट है कि वह जीवन में कहीं जाना चाहती है और इसके लिए समझौता करने को तैयार है। फिल्म की दिशा भी हर दृश्य को अर्थ प्रदान करती है। उदाहरण के लिए इंदर और ज्वेलर, जिसका एड वह शूट कर रहा था, उनके बीच झगड़े का दृश्य ले लीजिए। व्यापारी इंदर और कविता के संबंध का अपमान करता है – और पूजा उसे बचाती है। जब उसे चोट लगती है तब वह उसका ख्याल भी रखती है। लेकिन फिर एक ऐसा समय आता है जब वह कहती है कि अब वह ना तो उसकी मदद करेगी और ना ही बचाएगी – जब वह उसके पास वापस आता है,’’ रश्मी ने कहा।

आपके जीवन का अर्थ

“हाँ, और हर दृश्य के लुक का क्या। बेटी के साथ अनेकों बार देखने पर मैंने उन चीज़ों पर ध्यान दिया जिन्हें मैंने नज़रंदाज़ कर दिया था। जैसे कि पूजा और कविता के बीच का वह आइकॉनिक दृश्य -आप देख सकते हैं कि उनके टकराव की शुरूआत में कविता को पूजा से उंचा दिखाया गया है – और इस बीच पूजा अपनी जगह से ज़रा भी नहीं हिली! एक ऐसी स्त्री थी जिसने उसके जीवन में हर दर्द निर्धारित किया, अब वह बैठी-बैठी उसका मूवमेंट निर्धारित कर रही है,’’ एंजेला कहती है।

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अर्थ देखने पर आपको अपने जीवन और प्रेम के अर्थ के बारे में प्रश्न और उत्तर मिलते हैं। प्यार रोमांटिक से ज़्यादा कुछ है, प्यार सेक्स से ज़्यादा है और शायद स्वयं के बारे में हमारी भावना से ज़्यादा नहीं है। जैसा राज पूजा को कहता है, जब वह खुद के अलावा बाकी सारी पहचान छोड़ देगी, तब वास्तव में उसका जन्म होगा। हाँ, हम सभी माँ/पिता, बहन/भाई, बेटी/बेटे, पत्नी, पति हैं – फिर भी क्या हम बस यही हैं? जीवन को अपने स्वयं के कार्यों में अर्थ मिल सकता है – एक राह में आगे बढ़ कर और दूसरी को छोड़ कर। और, जैसा की फिल्म में पूजा को फिर से पता चलता है, जीवन शायद प्यार के बारे में भी हो सकता है।
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